सीएम सम्राट चौधरी बिहार में कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए सम्राट चौधरी सरकार की कैबिनेट ने बुधवार को कई अहम फैसले लिए. कैबिनेट ने 13 एजेंडों पर मुहर लगाई, जिनमें कई निर्णय सीधे किसानों, पशुपालकों, सिंचाई, भंडारण और सहकारिता से जुड़े हैं. सरकार ने खेती के लिए पानी की व्यवस्था, किसानों के लिए भंडारण सुविधा, गोवंश की नस्ल सुधारने और मछली पालकों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में कई प्रस्तावों को मंजूरी दी.
इसके तहत नलकूपों के लिए 349 करोड़ रुपये से अधिक, गोवंश नस्ल सुधार योजना के लिए 63.92 करोड़ रुपये और गोदाम निर्माण के लिए 34.95 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई. इसके अलावा पुरानी और खराब नहरों की मरम्मत के लिए भी करोड़ों रुपये मंजूर किए गए. इन फैसलों का उद्देश्य बिहार में कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ किसानों और पशुपालकों की आय को मजबूत करना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति देना है.
कैबिनेट ने किसानों के खेत तक सिंचाई का पानी पहुंचाने के लिए बड़ा फैसला लिया है. मुख्यमंत्री निजी नलकूप योजना के तहत पहले से मंजूर 35 हजार नलकूप लगाने के लिए 266 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं. वहीं, वित्तीय वर्ष 2026-27 में 11 हजार नए नलकूप लगाने के लिए 83.60 करोड़ रुपये दिए जाएंगे. यानी इस योजना के तहत करीब 349.60 करोड़ रुपये खर्च होंगे. इससे किसानों को सिंचाई के लिए भूजल की सुविधा आसानी से मिलने की उम्मीद है.
सात निश्चय-3 के तहत ‘हर खेत तक सिंचाई का पानी’ कार्यक्रम को आगे बढ़ाने के लिए कई पुरानी और खराब नहरों की मरम्मत के लिए मंजूरी दी गई है. अररिया के नरपतगंज क्षेत्र में जानकीनगर शाखा नहर और उससे निकलने वाली छोटे नहरों का मरम्मत करवाया जाएगा. इस योजना के पूरा होने से करीब 6 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता बहाल होने की उम्मीद है. इससे नरपतगंज, भरगामा, फारबिसगंज और रानीगंज प्रखंडों के किसानों को फायदा मिलेगा.
पूर्णिया प्रमंडल के अंतर्गत कटिहार वितरणी, फलका उप-वितरणी, हसनगंज उप-वितरणी, बैजनाथपुर उप-वितरणी और सेमापुर उप-वितरणी समेत नहरों की मरम्मत की मंजूरी मिल गई है. इस योजना से 7064.86 हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई होगी. पूर्णिया और कटिहार जिले के कई प्रखंडों के किसानों को इसका सीधा लाभ मिलेगा. इस परियोजना पर 35 करोड़ 81 लाख 52 हजार रुपये खर्च किए जाएंगे.
फसल उत्पादन बढ़ने के साथ किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती उपज के सुरक्षित भंडारण की होती है. इसी को देखते हुए कैबिनेट ने सहकारी समितियों के लिए 48,200 मीट्रिक टन नई भंडारण क्षमता बढ़ाने की योजना मंजूर की है. इसके लिए 200, 500 और 1,000 मीट्रिक टन क्षमता वाले गोदाम बनाए जाएंगे. वित्तीय वर्ष 2026-27 में इस योजना पर 34 करोड़ 95 लाख 27 हजार 730 रुपये खर्च करने की मंजूरी दी गई है. समितियों को गोदाम निर्माण के लिए 50 प्रतिशत सब्सिडी और 50 प्रतिशत राशि पूंजी के रूप में उपलब्ध कराई जाएगी.
कैबिनेट ने राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत बिहार में गोवंश नस्ल सुधार कार्यक्रम को मजबूत करने के लिए भी बड़ा फैसला लिया है. सात निश्चय-3 के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 में 63 करोड़ 92 लाख 95 हजार रुपये की मंजूरी दी . योजना के तहत कृत्रिम गर्भाधान, सेक्स सॉर्टेड सीमेन, नस्ल वाले पशु का भ्रूण दूसरे पशु के गर्भ में डालने की तकनीक और इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन जैसी आधुनिक तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा. सरकार का मानना है कि इससे उन्नत नस्ल के गोवंश की संख्या बढ़ेगी, दूध उत्पादन और उत्पादकता में सुधार होगा और पशुपालकों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी.
कैबिनेट ने मछली पालन वाले सहकारी समितियों को मजबूत करने के लिए राज्यस्तरीय मत्स्यजीवी सहकारी परिषद के गठन को भी मंजूरी दी. जिला, जिला समूह और प्रमंडल स्तर पर सहकारी संघों को जोड़कर एक मजबूत संरचना तैयार की जाएगी. इसका उद्देश्य मछली पालन, जलीय कृषि संसाधनों के विकास, बेहतर प्रबंधन, इनपुट आपूर्ति, मार्केटिंग और प्रोसेसिंग की व्यवस्था को मजबूत बनाना है.
सात निश्चय-3 के तहत ‘समृद्ध उद्योग-सशक्त बिहार’ की परिकल्पना को आगे बढ़ाते हुए मधुबनी के सकरी और दरभंगा के रैयाम में बंद पड़ी चीनी मिलों की जमीन पर नई सहकारी चीनी मिलों की स्थापना की दिशा में भी फैसला ले लिया गया है. इसके लिए संबंधित क्षेत्रों के गन्ना उत्पादक और गन्ना उत्पादन के लिए प्रतिबद्ध किसानों को शामिल कर प्राथमिक चीनी मिल सहकारी समितियों के गठन को मंजूरी दी गई
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