बिहार में Farmer ID बनाने का महाअभियान, 10 लाख का ऐतिहासिक आंकड़ा पार

बिहार में Farmer ID बनाने का महाअभियान, 10 लाख का ऐतिहासिक आंकड़ा पार

बिहार में एग्रीस्टैक किसान रजिस्ट्री महाअभियान के तहत 10 लाख से अधिक किसानों का रजिस्ट्रेशन पूरा हुआ. जानें फार्मर आईडी, ई-केवाईसी, जिलों की प्रगति और किसानों को मिलने वाले सरकारी लाभ की पूरी जानकारी.

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बिहार में Farmer ID बनाने का महाअभियान, 10 लाख का ऐतिहासिक आंकड़ा पार10 लाख किसानों का पूरा हुआ रजिस्ट्रेशन

बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग और कृषि विभाग मिलकर किसानों के लिए एक खास अभियान चला रहे हैं, जिसे किसान रजिस्ट्री (AgriStack) कहा जाता है. इसका उद्देश्य है कि हर किसान की एक फार्मर आईडी बने. इस आईडी से सरकार किसानों को योजनाओं का लाभ आसानी से और बिना रुकावट दे सके. इसे ऐसे समझिए जैसे हर किसान का एक पहचान कार्ड, जिससे उसे सरकारी मदद जल्दी मिले.

10 लाख किसानों का रजिस्ट्रेशन पूरा

इस महाअभियान के तहत 09 जनवरी 2026 की रात 08 बजे तक बिहार में कुल 10,41,341 किसानों का रजिस्ट्रेशन पूरा हो गया है. यह राज्य के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि पहली बार 10 लाख से ज्यादा किसान एक साथ रजिस्टर्ड हुए हैं. यह दिखाता है कि सरकार और प्रशासन मिलकर तेजी से काम कर रहे हैं.

प्रशासन की मेहनत से बढ़ी रफ्तार

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव सीके अनिल ने बताया कि 09 जनवरी को 2,68,500 किसानों का लक्ष्य था. उस दिन 1,86,073 किसानों का रजिस्ट्रेशन हुआ, यानी लगभग 69 प्रतिशत लक्ष्य पूरा हुआ. सुबह के समय काम थोड़ा धीमा था, लेकिन लगातार निगरानी और अधिकारियों की मेहनत से शाम तक रजिस्ट्रेशन की रफ्तार बहुत तेज हो गई. इसी वजह से यह अभियान अब 21 जनवरी तक बढ़ा दिया गया है.

एक दिन में बड़ा बदलाव

आंकड़ों के अनुसार 08 जनवरी की रात तक 1,30,489 किसानों का रजिस्ट्रेशन हुआ था. अगले ही दिन 09 जनवरी की रात तक यह संख्या बढ़कर 1,86,073 हो गई. यानी एक ही दिन में करीब 42 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई. यह दिखाता है कि जब सही योजना और निगरानी होती है, तो काम जल्दी पूरा हो सकता है.

बेहतर काम करने वाले जिले

इस अभियान में कुछ जिलों ने बहुत अच्छा काम किया है. मुजफ्फरपुर और वैशाली ने लक्ष्य से भी ज्यादा किसानों का रजिस्ट्रेशन किया. इनके अलावा अररिया, भागलपुर और कटिहार जैसे जिलों ने भी शानदार प्रदर्शन किया है. ये जिले बाकी जिलों के लिए एक अच्छा उदाहरण बने हैं.

जहां अभी और मेहनत की जरूरत है

कुछ जिलों जैसे मधुबनी, बेगूसराय, समस्तीपुर, सिवान, सारण और कैमूर में रजिस्ट्रेशन की रफ्तार थोड़ी कम है. वहीं पूर्वी चंपारण, पटना, जहानाबाद, लखीसराय और मुंगेर में राज्य के औसत से भी कम प्रगति हुई है. इन जिलों में कर्मचारियों के बेहतर तालमेल और निगरानी से काम को और तेज किया जा रहा है.

ई-केवाईसी और रजिस्ट्रेशन का फर्क

09 जनवरी को सुबह तक 66,834 किसानों का ई-केवाईसी हुआ, लेकिन फार्मर रजिस्ट्रेशन 29,735 ही हो सका. इसका मतलब है कि कुछ किसान ई-केवाईसी तो करवा रहे हैं, लेकिन पूरा रजिस्ट्रेशन नहीं हो पा रहा. इसे सुधारने के लिए किसानों को समझाया जा रहा है और तकनीकी मदद दी जा रही है.

कृषि मंत्री का दौरा और संदेश

कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने पटना जिले के दानापुर अंचल में फार्मर रजिस्ट्री और ई-केवाईसी कैंप का निरीक्षण किया. उन्होंने काम की प्रगति देखी और अधिकारियों को जरूरी निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि फार्मर रजिस्ट्री से खेती से जुड़ी सेवाएं आसान, साफ और किसान के लिए फायदेमंद बनेंगी.

फार्मर आईडी से क्या फायदा होगा

फार्मर रजिस्ट्री के तहत हर किसान की फार्मर आईडी बनाई जा रही है, जिसे आधार और जमीन के रिकॉर्ड से जोड़ा जा रहा है. इससे किसानों को पीएम-किसान जैसी योजनाओं का पैसा सीधे और बिना परेशानी मिलेगा. अब पीएम-किसान योजना का लाभ लेने के लिए फार्मर आईडी जरूरी कर दी गई है.

पहले पायलट, अब पूरे बिहार में काम

इस योजना को पहले सारण, गया, पूर्वी चंपारण, पूर्णिया और भागलपुर के कुछ गांवों में पायलट रूप में शुरू किया गया था. इसके बाद अप्रैल से बिहार के लगभग 44,500 राजस्व गांवों में यह काम शुरू कर दिया गया. अब तक 44 लाख से ज्यादा किसानों का ई-केवाईसी हो चुका है और 12 लाख से अधिक फार्मर आईडी बन चुकी हैं.

किसानों से अपील

कृषि मंत्री ने किसानों से अपील की है कि वे 11 जनवरी 2026 तक चल रहे विशेष अभियान में जरूर भाग लें. समय पर अपनी फार्मर आईडी बनवाएं, ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी रुकावट के मिलता रहे. यह योजना किसानों के भविष्य को सुरक्षित और मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है.

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