हिमाचल कैबिनेट के अहम फैसले (AI Image)हिमाचल प्रदेश में दूध उत्पादकों (डेयरी किसानों) को अब प्रति लीटर दोगुनी प्रोत्साहन राशि मिलेगी. राज्य सरकार ने दुग्ध प्रोत्साहन योजना के तहत सहायता 3 रुपये से बढ़ाकर 6 रुपये प्रति लीटर करने का फैसला किया है. इसके साथ ही जलाशयों में मछली पकड़ने वाले मछुआरों के लिए 100 रुपये प्रति किलोग्राम न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया गया है. मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में शनिवार, 10 अक्टूबर को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में खेती-किसानी और पशुपालन से जुड़े कई अन्य फैसले भी लिए गए. इनमें वर्षा आधारित कृषि परियोजना के लिए 603 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि, ट्राउट मछली पालकों के लिए जोखिम निधि और आपदा प्रभावित किसानों को राहत देने के फैसले शामिल हैं. बैठक में विभिन्न विभागों में हजारों पद भरने, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय में बढ़ोतरी और शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई.
मंत्रिमंडल ने दुग्ध प्रोत्साहन योजना के तहत किसानों को मिलने वाली सहायता राशि दोगुनी करने का निर्णय लिया है. अब दूध उत्पादकों को प्रति लीटर 6 रुपये की सहायता मिलेगी, जबकि पहले यह राशि 3 रुपये थी. राज्य सरकार के अनुसार, इस फैसले से हजारों किसानों को लाभ होगा. इसके अलावा सरकारी विभागों को अपनी जरूरत का दूध और दुग्ध उत्पाद मिल्कफेड से खरीदने के निर्देश देने का फैसला किया गया है. इससे दुग्ध उत्पादकों के लिए बाजार सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी.
जलाशयों में मछली पकड़ने वाले मछुआरों को लाभकारी कीमत दिलाने के लिए मुख्यमंत्री मछुआरा सहायता योजना शुरू की जाएगी. इसके तहत जलाशयों की मछलियों का न्यूनतम समर्थन मूल्य 100 रुपये प्रति किलोग्राम निर्धारित किया गया है. अगर नीलामी में मछली की कीमत इससे कम रहती है तो राज्य सरकार 20 रुपये प्रति किलोग्राम तक सब्सिडी देगी.
इस व्यवस्था का उद्देश्य मछुआरों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना है. मंत्रिमंडल ने प्राकृतिक आपदाओं के कारण ट्राउट मछली पालकों को होने वाले नुकसान से सुरक्षा देने के लिए ट्राउट जोखिम निधि योजना लागू करने को मंजूरी दी है. इसके लिए एक करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है.
सोलन जिले में सतत विकास और जलवायु अनुकूल वर्षा आधारित कृषि के लिए संचालित एकीकृत विकास परियोजना का विस्तार किया जाएगा. मंत्रिमंडल ने मौजूदा ग्राम पंचायतों के साथ आसपास की अतिरिक्त पंचायतों में भी परियोजना की गतिविधियां जारी रखने और बढ़ाने के लिए 603 करोड़ रुपये की अतिरिक्त धनराशि मंजूर की है. इसके अलावा, एचपी शिवा परियोजना की अवधि दो साल बढ़ाकर जून 2030 तक करने का फैसला लिया गया है.
कांगड़ा जिले की बोह घाटी में आपदा प्रभावित परिवारों को राहत देने के लिए विशेष पैकेज मंजूर किया गया है. पूरी तरह क्षतिग्रस्त मकानों वाले परिवारों को 7.50 लाख रुपये और घरेलू सामान के नुकसान पर एक लाख रुपये की सहायता मिलेगी. प्रभावित परिवारों को किराये के लिए 5,000 रुपये और छह महीने तक मुफ्त राशन भी दिया जाएगा.
पशुधन के नुकसान पर भैंस के लिए 55,000 रुपये और बकरी या भेड़ के लिए 15,000 रुपये का मुआवजा तय किया गया है. मत्स्य पालन में नुकसान पर एक लाख रुपये, फसल के नुकसान पर 2,000 रुपये प्रति कनाल और कृषि भूमि को नुकसान पहुंचने पर 5,000 रुपये की सहायता दी जाएगी.
मंत्रिमंडल ने पशुपालन विभाग में विभिन्न श्रेणियों के 116 पद भरने को मंजूरी दी है. बागवानी विभाग में 40 बागवानी विस्तार अधिकारियों, 5 वरिष्ठ सहायकों और 10 बागवानी विकास अधिकारियों के पद भरे जाएंगे. इन फैसलों से विभागों में कर्मचारियों की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिलेगी.
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