गेहूं एमएसपी विवादगेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP में 25 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी के बाद किसान नेता और MSP कमेटी के सदस्य गुणी प्रकाश ने सरकार की पूरी खरीद व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि MSP के नाम पर सत्तारूढ़ दल अपने राजनीतिक हित साध रहा है और किसान की फसलों का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है. गुणी प्रकाश ने सरकारी तंत्र, आढ़ती व्यवस्था, कृषि लागत एवं मूल्य आयोग यानी CACP और आवश्यक वस्तु अधिनियम को किसान विरोधी बताते हुए इन्हें तत्काल खत्म करने की मांग की.
गुणी प्रकाश ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था में MSP की घोषणा तो होती है, लेकिन किसान को उसकी पूरी फसल MSP पर बेचने की गारंटी नहीं मिलती. किसान संगठनों की लंबे समय से मांग है कि MSP को कानूनी गारंटी देने के साथ-साथ पूरी उपज की खरीद सुनिश्चित की जाए. उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार MSP पर पूरी फसल नहीं खरीदती तो सिर्फ MSP घोषित करने का किसानों को क्या फायदा है?
किसान नेता ने MSP तय करने में CACP की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि आयोग उत्पादन लागत, मांग और आपूर्ति तथा उपभोक्ता हित जैसे पहलुओं को ध्यान में रखकर MSP की सिफारिश करता है. उन्होंने दावा किया कि किसान की वास्तविक लागत का पूरा हिसाब इस व्यवस्था में नहीं हो रहा है. बीज, खाद, डीजल, मजदूरी और दूसरे इनपुट के साथ जमीन का किराया, सिंचाई, ट्रैक्टर, ट्यूबवेल और खेती में लगाए गए पूंजीगत खर्च को भी वास्तविक लागत में शामिल किया जाना चाहिए.
गुणी प्रकाश ने हरियाणा के कैथल जिले का उदाहरण देते हुए कहा कि कृषि भूमि का किराया करीब 75,000 से 80,000 रुपये प्रति एकड़ तक पहुंचता है. उनका सवाल है कि जब किसान इतनी बड़ी रकम जमीन के किराये के तौर पर खर्च करता है तो MSP की लागत गणना में उसका पूरा हिसाब कैसे हो रहा है. उन्होंने कहा कि किसान की वास्तविक लागत को नजरअंदाज करके तय किया गया MSP उसके लिए पर्याप्त नहीं हो सकता.
गुणी प्रकाश ने MSP और बाजार भाव के बीच अंतर का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने कहा कि जिस गेहूं के लिए किसान को MSP मिलता है, वही गेहूं आगे बाजार में काफी ऊंचे भाव पर बिकता है. उन्होंने बाजार में गेहूं के करीब 3,200 से 3,500 रुपये प्रति क्विंटल तक के भाव का जिक्र करते हुए कहा कि किसान और उपभोक्ता के बीच कीमतों का अंतर समझने की जरूरत है. उन्होंने आटे की खुदरा कीमत का उदाहरण देते हुए कहा कि उपभोक्ता तक पहुंचते-पहुंचते कीमत काफी बढ़ जाती है.
गुणी प्रकाश ने जरूरी आवश्यक वस्तु अधिनियम पर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि किसानों की फसल के भंडारण और व्यापार को लेकर नियम बनाए जाते हैं, जिससे किसान की बाजार में स्वतंत्रता सीमित होती है. उनका कहना है कि अगर सरकार किसानों को खुले बाजार में बेचने की पूरी आजादी नहीं देती और दूसरी तरफ MSP पर पूरी खरीद भी नहीं करती तो किसान के पास विकल्प सीमित रह जाते हैं.
उन्होंने हरियाणा और पंजाब की गेहूं-धान खरीद व्यवस्था का जिक्र करते हुए कहा कि यहां सरकारी खरीद का ढांचा इतना प्रभावी है कि निजी खरीदारों की भूमिका सीमित रहती है. गुणी प्रकाश ने कहा कि किसान की फसल सरकारी पोर्टल, मेरी फसल मेरा ब्यौरा और गेट पास जैसी प्रक्रियाओं से जुड़ जाती है. उन्होंने सवाल उठाया कि अगर सरकारी एजेंसियां किसान की पूरी उपज नहीं खरीदती हैं तो बची हुई फसल के लिए किसान को खुला बाजार उपलब्ध क्यों नहीं कराया जाता.
गुणी प्रकाश ने हरियाणा में सरकारी खरीद की निर्धारित मात्रा का मुद्दा उठाते हुए कहा कि अगर किसान की पूरी उपज खरीद के दायरे में नहीं आती तो बाकी फसल वह कहां बेचेगा. उन्होंने कहा कि सरकार या तो पूरी उपज MSP पर खरीदे या फिर किसान को खुले बाजार में कहीं भी अपनी फसल बेचने की स्वतंत्रता दे.
गुणी प्रकाश ने सार्वजनिक वितरण व्यवस्था के तहत गरीबों को मुफ्त या रियायती खाद्यान्न देने की व्यवस्था पर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि गरीबों को अनाज उपलब्ध कराने की जरूरत से उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन इसका पूरा बोझ किसान की उपज की कीमत पर नहीं डाला जाना चाहिए. उन्होंने सुझाव दिया कि जरूरतमंद लोगों के खातों में आर्थिक सहायता देने जैसे विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता है.
गुणी प्रकाश ने आरोप लगाया कि MSP और सरकारी खाद्यान्न खरीद की व्यवस्था का इस्तेमाल राजनीतिक हितों के लिए किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि किसान की फसल को कम कीमत पर खरीदकर उसी अनाज को सरकारी वितरण व्यवस्था के जरिए इस्तेमाल किया जाता है. इस पूरी प्रक्रिया में किसान को उसकी लागत के अनुरूप मूल्य नहीं मिल रहा है.
गुणी प्रकाश ने सरकार से CACP, Commodity Act और मौजूदा खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़े बदलाव की मांग की. उन्होंने कहा कि सरकार अगर MSP पर खरीद को अपने लिए आर्थिक बोझ मानती है तो उसे किसानों को खुले बाजार में प्रतिस्पर्धी कीमत पर फसल बेचने की स्वतंत्रता देनी चाहिए. उन्होंने कहा कि किसानों पर पाबंदियां और सरकारी खरीद की सीमाएं एक साथ नहीं चल सकतीं.
गुणी प्रकाश ने गेहूं और धान की लगातार खेती के कारण हरियाणा और पंजाब में भूजल स्तर गिरने का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने कहा कि जिन इलाकों में पहले पानी अपेक्षाकृत कम गहराई पर उपलब्ध था, वहां अब भूजल काफी नीचे चला गया है. उन्होंने कीटनाशकों के इस्तेमाल से मिट्टी और पर्यावरण पर पड़ने वाले असर का भी जिक्र किया.
गुणी प्रकाश ने कहा कि किसान को केवल MSP की घोषणा नहीं, बल्कि अपनी फसल बेचने की वास्तविक आजादी चाहिए. उन्होंने कहा कि किसान की लागत, बाजार की मांग और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को ध्यान में रखते हुए ऐसी व्यवस्था बननी चाहिए जिसमें किसान को अपनी उपज का उचित मूल्य मिल सके.
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