
रैली निकालते हुए बीआएस के नेता (फोटो-एएनआई)तेलंगाना में मक्का किसानों के मुद्दे पर सियासी टकराव तेज हो गया है. हैदराबाद में बुधवार को भारत राष्ट्र समिति (BRS) के नेताओं ने विधानसभा के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया. पार्टी नेताओं ने राज्य की कांग्रेस सरकार से किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) लागू करने, 500 रुपये प्रति क्विंटल अतिरिक्त बोनस देने और तत्काल सरकारी हस्तक्षेप की मांग उठाई है. BRS ने गन पार्क से विधानसभा तक रैली निकाली, लेकिन प्रवेश द्वार पर पुलिस और मार्शलों ने विधायकों और विधान परिषद सदस्यों को रोक दिया. इसी दौरान धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई.
विपक्षी दल ने आरोप लगाया कि मार्शलों ने प्रदर्शनकारियों के साथ सख्ती की और उनके पास प्रतीक के तौर पर लाया गया (भुट्टा) मक्का भी छीन लिया. हंगामे के बीच पूर्व मंत्री और BRS के डिप्टी फ्लोर लीडर टी हरीश राव के हाथ में चोट लग गई और खून बहता देखा गया, जिससे माहौल और तनावपूर्ण हो गया. इसके विरोध में BRS नेताओं ने विधानसभा गेट पर धरना दिया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की. बाद में वे सदन के भीतर पहुंचे.

BRS विधायक डॉ. कल्वाकुंतला संजय कुमार ने सरकार पर किसानों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा कि किसानों को न तो इनपुट सब्सिडी मिल रही है और न ही उनकी समस्याओं पर कोई ठोस कदम उठाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि किसान आर्थिक दबाव में हैं और हालात गंभीर होते जा रहे हैं.
वहीं, हरीश राव ने कहा कि एक तरफ MSP की कमी से किसान परेशान हैं, दूसरी तरफ बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने मक्का समेत अन्य फसलों को नुकसान पहुंचाया है. मंडियों और खलिहानों में रखी फसल भीगने से किसानों की हालत और खराब हो गई है.
उन्होंने सरकार पर फसल बीमा और सब्सिडी को लेकर वादाखिलाफी का आरोप लगाया और कहा कि पिछले दो वर्षों से किसानों को इनपुट सब्सिडी नहीं मिली है. साथ ही उन्होंने मांग की कि सरकार तुरंत सभी जिलों से फसल नुकसान की रिपोर्ट लेकर मुआवजा दे और खरीद केंद्र खोलकर MSP पर मक्का की खरीद शुरू करे.
हरीश राव ने यह भी सवाल उठाया कि सरकार ने किसानों को धान की जगह वैकल्पिक फसल उगाने की सलाह दी थी, जिस पर भरोसा कर किसानों ने बड़े पैमाने पर मक्का की खेती की. अब जब फसल बाजार में आ गई है तो खरीद केंद्र नहीं खोले गए और किसान मजबूरी में कम कीमत पर उपज बेच रहे हैं.
उन्होंने आरोप लगाया कि MSP 2400 रुपये प्रति क्विंटल होने के बावजूद किसानों को 1600-1700 रुपये में फसल बेचनी पड़ रही है, जिससे उन्हें भारी नुकसान हो रहा है. उन्होंने सरकार से स्पष्ट करने को कहा कि वह किसानों के साथ है या बिचौलियों के. इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य में सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार और विपक्षी BRS के बीच राजनीतिक टकराव को और तेज कर दिया है, वहीं किसानों से जुड़े मुद्दे एक बार फिर केंद्र में आ गए हैं. (एएनआई)
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