प्याज के दाम में भारी उछाल हैपिछले कुछ हफ्तों में मंडियों में किसानों को मिलने वाले प्याज के भाव में कुछ सुधार देखने को मिला है. इस बीच, महाराष्ट्र समेत प्रमुख प्याज उत्पादक राज्यों के किसानों का कहना है कि मौजूदा दाम अभी भी उनकी उत्पादन लागत के मुकाबले काफी कम हैं. महाराष्ट्र प्याज उत्पादक किसान संगठन के संस्थापक अध्यक्ष भारत दिघोले ने केंद्र सरकार को चेतावनी दी है कि अगर सरकारी हस्तक्षेप के जरिए किसानों को प्याज के बेहतर दाम मिलने से रोका गया और भाव दोबारा गिराए गए तो देशभर में बड़ा किसान आंदोलन किया जाएगा.
किसान नेता भारत दिघोले ने कहा कि पिछले एक से दो वर्षों के दौरान किसानों को प्याज के बेहद कम दाम पर अपनी उपज बेचनी पड़ी है. कई मौकों पर मंडियों में किसानों को प्याज के लिए सिर्फ 2, 5, 8 और 10 रुपये प्रति किलो तक के भाव मिले हैं. लंबे समय तक कम दाम मिलने से प्याज किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है.
उन्होंने कहा कि प्याज की खेती की लागत लगातार बढ़ रही है. खाद और कीटनाशकों की कीमतों में बढ़ोतरी के साथ मजदूरी भी महंगी हुई है. इसके अलावा प्याज की खुदाई, छंटाई, परिवहन और भंडारण पर भी किसानों को बड़ी रकम खर्च करनी पड़ती है. संगठन के मुताबिक, प्याज के उत्पादन और भंडारण की लागत को देखते हुए किसानों को बेहतर बाजार भाव की जरूरत है.
भारत दिघोले ने कहा कि अगर किसानों को प्याज का उचित और लाभकारी भाव मिलता है तो किसान हर साल पर्याप्त मात्रा में प्याज की खेती करने के लिए प्रोत्साहित होंगे. इससे देश में प्याज का उत्पादन और सप्लाई बनाए रखने में मदद मिलेगी. किसानों को लंबे समय तक कम भाव मिलने से खेती के प्रति उनका भरोसा कमजोर होता है, जिसका असर भविष्य में उत्पादन पर भी पड़ सकता है.
दिघोले ने केंद्र सरकार की बफर स्टॉक नीति पर सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि सरकार बफर स्टॉक में रखे प्याज को प्याज एक्सप्रेस और कांदा एक्सप्रेस जैसी व्यवस्थाओं के जरिए बड़े शहरों तक पहुंचा रही है. इसके बाद उपभोक्ताओं को कम कीमत पर प्याज उपलब्ध कराने के लिए इसे करीब 35 रुपये प्रति किलो के भाव पर बेचने की बात कही जा रही है.
भारत दिघोल ने कहा कि जब किसानों से प्याज खरीदने का समय आया, तब सरकार ने करीब 12, 15 और 20 रुपये प्रति किलो के भाव पर प्याज खरीदा. अब जब मंडियों में किसानों को कुछ बेहतर भाव मिलने लगे हैं, तब सरकारी बफर स्टॉक के जरिए बाजार में प्याज उतारकर कीमतों को कंट्रोल करने की कोशिश की जा रही है. संगठन का कहना है कि इससे किसानों को मिलने वाले बाजार भाव पर दबाव पड़ सकता है.
भारत दिघोले ने कहा कि जब प्याज के दाम लंबे समय तक गिरते हैं और किसानों को नुकसान होता है, तब सरकार की ओर से उसी स्तर पर हस्तक्षेप देखने को नहीं मिलता. लेकिन जैसे ही किसानों को कुछ समय के लिए बेहतर भाव मिलना शुरू होता है, सरकारी एजेंसियां बाजार में हस्तक्षेप कर कीमतों को कम करने की कोशिश करती हैं.
दिघोले ने केंद्र सरकार से मांग की कि प्याज के दाम में हो रही धीरे-धीरे बढ़ोतरी में सरकार को गैर-जरूरी हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए. उनका कहना है कि किसानों को उनकी लागत के अनुरूप बेहतर भाव मिलने देना जरूरी है. भारत दिघोले ने कहा कि अगर केंद्र सरकार प्याज के दाम गिराने के लिए कदम उठाती है तो महाराष्ट्र प्याज उत्पादक किसान संगठन महाराष्ट्र के साथ मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान और अन्य राज्यों के किसानों को भी आंदोलन से जोड़ेगा.
उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर महाराष्ट्र और दिल्ली में बड़ा आंदोलन किया जाएगा, जिसमें देशभर के लाखों किसान जुटेंगे. भारत दिघोले ने कहा कि मौजूदा समय में किसानों को प्याज के दाम में थोड़ी राहत मिल रही है और सरकार को इसमें अड़ंगा नहीं डालना चाहिए.
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