फ्रांस में मधुमक्खी को लेकर विवाद. (Photo: Representational)फ्रांस की पर्यावरण मंत्री मोनिक बारबुट ने अपने पद से इस्तीफा देने का ऐलान किया है. उन्होंने यह फैसला उस कानून के विरोध में लिया है, जिसमें कुछ ऐसे कीटनाशकों के इस्तेमाल को दोबारा मंजूरी देने की बात कही गई है, जिन्हें मधुमक्खियों और पर्यावरण के लिए नुकसानदायक माना जाता है.
मोनिक बारबुट ने कहा कि सरकार ने उनसे किए गए वादों के अनुसार इस मुद्दे पर चर्चा नहीं की. उन्होंने इसे पर्यावरण के लिए एक और बड़ा झटका बताया.
फ्रांस की संसद ने मंगलवार को एक कृषि कानून को मंजूरी दी, जिसमें दो कीटनाशकों एसीटामिप्रिड (Acetamiprid) और फ्लूपाइराडिफ्यूरोन (Flupyradifurone) के इस्तेमाल की अनुमति देने का रास्ता साफ हुआ है. इन कीटनाशकों को फ्रांस में पहले प्रतिबंधित किया गया था. एसीटामिप्रिड पर साल 2018 से और फ्लूपाइराडिफ्यूरोन पर साल 2019 से रोक लगी हुई थी.
नए कानून के तहत फ्रांस की स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा एजेंसी को यह अधिकार मिलेगा कि वह कुछ शर्तों के साथ इन कीटनाशकों के इस्तेमाल की अनुमति दे सकती है.
इस कानून का समर्थन करने वाले लोगों का कहना है कि फ्रांस के गन्ना (शुगर बीट), सेब और हेजलनट उगाने वाले किसानों को इन कीटनाशकों की जरूरत है. उनका कहना है कि यूरोप के दूसरे देशों के किसान इन दवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं, इसलिए फ्रांस के किसानों को भी प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए इसकी जरूरत पड़ती है. यूरोपीय संघ (EU) में इन कीटनाशकों के इस्तेमाल की अनुमति है, लेकिन हर देश अपने नियमों के अनुसार इनके उपयोग को सीमित कर सकता है.
इस कानून का विरोध करने वाले लोगों का कहना है कि ये कीटनाशक मधुमक्खियों के लिए खतरनाक हो सकते हैं. साथ ही इनके इस्तेमाल से इंसानों की सेहत और पर्यावरण पर भी बुरा असर पड़ सकता है. मोनिक बारबुट ने कहा कि फ्रांस ने साल 2016 में पर्यावरण और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए एसीटामिप्रिड पर रोक लगाने का फैसला किया था. उन्होंने कहा कि कई वैज्ञानिक अध्ययनों में अब भी इस बात को लेकर चिंता जताई जा रही है कि इन रसायनों का मानव स्वास्थ्य और प्रकृति पर क्या असर हो सकता है.
इससे पहले भी फ्रांस में एसीटामिप्रिड को दोबारा इस्तेमाल की अनुमति देने की कोशिश की गई थी. लेकिन फ्रांस की सबसे बड़ी अदालत संवैधानिक परिषद (Constitutional Council) ने उस कानून के एक हिस्से को रोक दिया था. अदालत ने कहा था कि इस रसायन से मानव स्वास्थ्य को खतरा हो सकता है. उस समय इस कानून के विरोध में 20 लाख से ज्यादा लोगों ने एक ऑनलाइन याचिका पर हस्ताक्षर किए थे.
मोनिक बारबुट पर्यावरण के क्षेत्र में लंबे समय से काम करती रही हैं. वह पहले WWF France की प्रमुख रह चुकी हैं. इसके अलावा उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के मरुस्थलीकरण रोकने वाले कार्यक्रम (UNCCD) में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. उन्होंने कहा कि राजनीति उनका क्षेत्र नहीं है और अगर राजनीति का मतलब पर्यावरण से जुड़े ऐसे फैसले लेना है, तो वह इसका हिस्सा नहीं बनना चाहतीं.
फ्रांस में इस मामले ने पर्यावरण सुरक्षा और किसानों की जरूरतों के बीच नई बहस शुरू कर दी है. एक तरफ किसान संगठन इन कीटनाशकों को खेती के लिए जरूरी बता रहे हैं, वहीं पर्यावरण कार्यकर्ता मधुमक्खियों और प्रकृति की सुरक्षा को ज्यादा महत्वपूर्ण मान रहे हैं. अब इस मुद्दे पर फ्रांस सरकार और पर्यावरण समूहों के बीच आगे भी बहस जारी रहने की संभावना है.
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