
मिर्जापुर जिले के दुबरा पहाड़ी गांव में ‘किसान तक’ किसान कारवां पहुंचा. यह उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में चल रहे विशेष कवरेज का 57वां पड़ाव था. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया. कृषि विभाग, पशुपालन विभाग, उद्यान विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र के अधिकारियों-वैज्ञानिकों ने किसानों को सरकार की योजनाओं, आधुनिक खेती तथा पशुपालन की जानकारी दी.

पहले चरण में पशुपालन विभाग के उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. तेजेंद्र सिंह ने बताया कि पशुओं के बीमार होने पर अब 1962 पशु एंबुलेंस सेवा उपलब्ध है. मुख्यमंत्री सहभागिता योजना के तहत चार पशु पालने पर प्रति पशु ₹50 प्रोत्साहन राशि दी जाती है. उन्होंने जोर देकर कहा कि पशुओं को हर 3 महीने में कृमिनाशक दवा अवश्य देनी चाहिए, चाहे पशु गर्भवती हो या न हो.

दूसरे चरण में कृषि विज्ञान केंद्र मिर्जापुर के फसल वैज्ञानिक डॉ. जय पी राय ने कहा कि बुवाई से पहले बीज का उपचार करना बहुत जरूरी है. 1 किलोग्राम बीज के उपचार के लिए दो दवाओं के 3 ग्राम का प्रयोग करें. इससे फसल में बीमारियां नहीं लगतीं. बीमारी लगने पर पहले उसकी सही पहचान करें, फिर दवा लें. दुकानदार की सलाह पर अंधाधुंध दवा न खरीदें.

तीसरे चरण में पशु चिकित्सक डॉ. उषा वैस ने गर्मी के मौसम में पशुओं को हीट स्ट्रेस से बचाने के उपाय बताए. उन्होंने कहा कि जर्सी और एचएफ नस्ल की गायों के लिए पंखा-कूलर का प्रयोग करें. भैंसों को सुबह-शाम नहलाएं और छाया में रखें. सभी पशुओं को मिनरल मिक्सर अवश्य दें. बारिश के मौसम में गला घोटू बीमारी से बचाव के उपाय भी बताए गए.

चौथे चरण में मझवा विधानसभा क्षेत्र से विधायक सुचिस्मिता मौर्य ने कार्यक्रम को संबोधित किया और पहल की सराहना की. उन्होंने कहा कि योगी आदित्यनाथ सरकार आने के बाद किसानों की आय बढ़ी है और फसलों को अच्छा मूल्य मिल रहा है. आज सरकार हर कदम पर किसानों के साथ खड़ी है.
मृदा स्वास्थ्य एवं एकीकृत खेती
पांचवें चरण में कृषि विज्ञान केंद्र के अध्यक्ष डॉ. श्री राम सिंह ने कहा कि अत्यधिक रासायनिक उर्वरक के प्रयोग से मृदा स्वास्थ्य खराब हो रहा है. खेती के साथ पशुपालन जरूरी है. पशु गोबर से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और फसल अवशेष से पशुओं का पेट भरता है. संतुलित उर्वरक एवं उन्नत बीजों का प्रयोग करें.

छठे चरण में जिला उद्यान अधिकारी पुष्पेंद्र त्रिपाठी ने बताया कि उद्यान विभाग 80% अनुदान पर सिंचाई योजनाएं (ड्रिप आदि) चला रहा है. विभाग बीज और नर्सरी के पौधे भी उपलब्ध करा रहा है, जिससे किसानों की आय बढ़ रही है.
इफको के नवीन उत्पाद
सातवें चरण में इफको के अनुराग पाल ने नैनो यूरिया और लिक्विड डीएपी के उपयोग के बारे में विस्तार से बताया. उन्होंने कहा कि इनके प्रयोग से लागत कम होती है, उत्पादन बढ़ता है और मृदा स्वास्थ्य सुधरता है.

आठवें चरण में सिटी ब्लॉक फॉर्मल प्रोड्यूसर कंपनी के सीईओ धीरज मौर्य ने बताया कि उनके FPO से 900 से अधिक किसान जुड़े हैं. मोटे अनाज से बने नमकीन-बिस्कुट का उत्पादन हो रहा है, जो ऑनलाइन, रक्षा विभाग और अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई हो रहा है.
खेती के साथ पशुपालन का महत्व
नवे चरण में पशुपालन वैज्ञानिक डॉ. गुरु प्रसाद सिंह ने कहा कि खेती के साथ पशुपालन छोड़ने से संतुलन बिगड़ रहा है. पशु दूध-घी देते हैं, गोबर-गोमूत्र मिट्टी को पोषण देते हैं.

दसवें चरण में इफको एमसी के मंडल प्रतिनिधि धर्मेंद्र कुमार वर्मा ने गुणवत्ता वाले कीटनाशकों और माइक्रो जेन उत्पाद के फायदे बताए, जो जड़ विकास, फसल ग्रोथ और उत्पादन बढ़ाने में मदद करता है.
ग्यारहवें चरण में जादूगर सलमान ने जादू के माध्यम से दिखाया कि समूह और FPO से जुड़ने से महिलाएं आत्मनिर्भर कैसे बन रही हैं और किसानों को आर्थिक लाभ कैसे हो रहा है.
कार्यक्रम के अंत बारहवें चरण में लकी ड्रॉ का आयोजन किया गया, जिसमें ₹500 के 10 इनाम, ₹2000 का दूसरा इनाम और ₹3000 का पहला इनाम किसानों को वितरित किए गए. प्रथम पुरस्कार भगवानी देवी को मिला वह द्वितीय पुरस्कार भाई लाल मौर्य को मिला.
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