
आप सोच रहे होंगे कि गोबर के इस्तेमाल से कैसे गन्ने की कोई बीमारी ठीक हो सकती है, लेकिन यह प्रयोग फायदेमंद और असरदार है. बारिश के मौसम में गन्ने की फसल में एक और फफूंद जनित रोग- तना सड़न रोग होने का खतरा बढ़ जाता है.

गन्ने की फसल को इस रोग से बचाने के लिए किसानों को प्रति एकड़ में 5 किलो सड़े हुए गोबर के साथ 250 से 500 ग्राम ट्राइकोडर्मा विरिडी का इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है. दरअसल, गोबर में ट्राइकोडर्मा विरिडी मिलाने पर यह मिश्रण जैविक रोग नाशक की तरह काम करता है.

गन्ने की फसल में गोबर का इस्तेमाल क्यों किया जाता है: गन्ने की फसल में गोबर का इस्तेमाल खाद के तौर पर किया जाता है. साथ ही रोग से बचाव के लिए भी दवा के साथ गोबर का इस्तेमाल किया जाता है.

यह जुगाड़ गन्ने को किन-किन रोगों से बचाता है: गोबर से गन्ने की बीमारी ठीक करने का जुगाड़ फफूंदजनित रोगों के लिए कारगर है. इसमें तना सड़न और अन्य कुछ रोग शामिल हैं.

गन्ने की फसल के लिए 5 किलो गोबर से कौन सा घरेलू उपाय किया जा सकता है: 5 किलो सड़े हुए गोबर में 250–500 ग्राम ट्राइकोडर्मा विरिडी मिलाकर खेत में डालने से गन्ने की फसल को तना सड़न और फफूंद जनित रोगों से बचाया जा सकता है.

इस जुगाड़ को खेत में कैसे और कब डालना चाहिए: गोबर और ट्राइकोडर्मा को खेत में गन्ने के पौधों की जड़ों के पास या मेड़ों पर डालना चाहिए. इसे बारिश के तुरंत बाद या हल्की नमी वाली मिट्टी में डालना सबसे असरदार होता है.

क्या 5 किलो सड़ा गोबर गन्ने के खेत में डालने से फसल को फायदा होता है: हां, गन्ने के खेत में 5 किलोग्राम सड़ा हुआ गोबर डालने से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है, सूक्ष्म जीव सक्रिय होते हैं. ट्राइकोडर्मा के साथ डालने पर यह फफूंद जनित रोगों से फसल को बचाने में मदद करता है.
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