
सरयू और घाघरा नदियों के किनारे स्थित गोंडा जिले के महेवा नानकर गांव में ‘किसान तक’ का किसान कारवां पहुंचा. उत्तर प्रदेश सरकार और इंडिया टूडे ग्रुप के संयुक्त पहल से प्रदेश के 75 जिलों में चल रहे इस विशेष अभियान की कवरेज में यह 43वां पड़ाव रहा. जहां कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लेकर खेती से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल कीं.

दाल उत्पादन के क्षेत्र में अग्रणी जनपद गोंडा में केवल कृषि और पशुपालन से जुड़ी योजनाओं और खेती की नई तकनीकों की ही जानकारी नहीं दी गई, बल्कि धानुका और चंबल फर्टिलाइजर जैसी मशहूर कंपनियों के प्रतिनिधियों द्वारा किसानों को रासायनिक उर्वरकों और दवाओं के सही उपयोग के बारे में भी जानकारी दी गई.

पहले चरण में कृषि विज्ञान केंद्र के मत्स्य वैज्ञानिक डॉ. ज्ञानदीप गुप्ता ने कहा कि किसान अगर मछली पालन पर ध्यान दें तो अपनी आमदनी को और बेहतर कर सकते हैं. मछली पालन के लिए सरकार कई तरह की योजनाएं चला रही है और सब्सिडी भी दे रही है. सरकार द्वारा मछली पालन को लेकर 40 से लेकर 60 फीसदी तक की सब्सिडी मिलती है.

दूसरे चरण में धानुका के प्रतिनिधि प्रद्युम्न मिश्रा ने कहा कि धानुका पिछले 50 सालों से कृषि में रसायन से जुड़े उत्पादों को बनाने का काम कर रही है. वहीं, मीठे पानी को बचाने के लिए भी धानुका पिछले 5 सालों से काम कर रही है कि कैसे पानी को बचाया जाए. उन्होंने कहा कि गन्ने में मोथा खरपतवार के निस्तारण को लेकर ‘सेमप्रा’ उत्पाद के बारे में जानकारी दी. उन्होंने बताया कि गन्ना के खेत से मोथा पूरी तरह से खत्म हो जाएगा.

तीसरे चरण में चंबल फर्टिलाइजर के प्रतिनिधि बृजेंद्र कुमार यादव ने ‘उत्तम प्रणाम’ और ‘उत्तम सुपरराइजा’ उत्पादों के बारे में जानकारी दी. उन्होंने बताया कि ये दोनों जैव-उत्पाद किसानों की आय बढ़ाने में सहायक हैं. इनके उपयोग से मिट्टी की उर्वराशक्ति भी बनी रहती है. ये उत्पाद रसायन-मुक्त हैं और खेत की सेहत को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं.

चौथे चरण में मैजिशियन सलमान ने अपनी कला के माध्यम से खेती से जुड़ी जानकारी प्रस्तुत की. उन्होंने किसानों को गोबर खाद के उपयोग और पशुपालन को बढ़ावा देने का सुझाव दिया. इसके साथ ही उन्होंने वर्मी कंपोस्ट और स्वयं सहायता समूह जैसे विषयों पर भी किसानों के बीच चर्चा-विमर्श किया.

पांचवें चरण में कृषि विज्ञान केंद्र गोंडा के शस्य वैज्ञानिक डॉ. रामलखन सिंह ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि अगर किसानों को अपनी खेती के जरिए अपनी आमदनी को और बढ़ाना है, तो उन्हें कृषि विज्ञान केंद्र और कृषि विभाग से जुड़ने की जरूरत है. आगे उन्होंने कहा कि गेहूं की कटाई के बाद किसान सबसे पहले खेतों की मिट्टी की जांच जरूर करवा लें, इससे मिट्टी में कौन से पोषक तत्व की कमी है उसकी भी जानकारी मिल जाएगी.

अंतिम छठवें चरण में लकी ड्रॉ का आयोजन किया गया, जिसमें 16 विजेताओं को 500 रुपये और दो विजेता को 1000 रुपये दिए गए. किसान तक’ का यह कारवां किसानों को आधुनिक तकनीक, बाजार से जुड़ाव और आय बढ़ाने के उपायों से जोड़ने का एक प्रभावी मंच प्रदान कर रहा है.
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