
उत्तर प्रदेश सरकार और इंडिया टुडे ग्रुप की संयुक्त पहल ‘किसान तक’ का किसान कारवां मेरठ के कुसावली गांव पहुंचा. बड़ी संख्या में किसानों की भागीदारी के साथ यह कार्यक्रम प्रदेश के 75 जिलों की श्रृंखला का 70वां पड़ाव रहा. कृषि विभाग के अधिकारियों ने योजनाओं की जानकारी दी और किसानों को लाभ लेने के लिए प्रेरित किया.

पहले चरण में कृषि विज्ञान केंद्र मेरठ के वैज्ञानिक डॉ. शुभम आर्य ने बताया कि पारंपरिक खेती के साथ सहफसली खेती अपनाना जरूरी है. उन्होंने गन्ने के साथ पॉपुलर की खेती का उदाहरण देते हुए कहा कि इससे किसानों को लगातार आय और बाद में एकमुश्त लाभ मिल सकता है.

दूसरा चरण में भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान, मोदीपुरम के वैज्ञानिक डॉ. अमृतलाल मीणा ने बताया कि खेती में विविधीकरण जरूरी है. उन्होंने गन्ने के साथ मूंगफली की खेती का उदाहरण देते हुए किसान विनोद सैनी के मॉडल को साझा किया.

तीसरे चरण में धानुका एग्रीटेक लिमिटेड के विशेषज्ञ मनु बहादुर ने बताया कि अत्यधिक रासायनिक उर्वरकों से मिट्टी की उर्वरा शक्ति प्रभावित होती है. उन्होंने “माइकोर सुपर” जैसे उत्पाद के उपयोग से मिट्टी में पोषक तत्व बढ़ाने की जानकारी दी.

चौथे चरण में इफको के उप महाप्रबंधक ब्रजवीर सिंह ने नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के उपयोग को बढ़ावा दिया. उन्होंने बताया कि ये उर्वरक उत्पादन बढ़ाने और मिट्टी के स्वास्थ्य सुधारने में मददगार हैं.
गन्ना आधारित खेती में बदलाव
पांचवे चरण में गन्ना विकास विभाग के अधिकारी सुधीर सिंह ने कहा कि एक ही फसल उगाने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति कम होती है. उन्होंने गन्ने के साथ अन्य फसलों को जोड़ने की सलाह दी.

छठवें चरण में बासमती निर्यात विकास प्रतिष्ठान, मोदीपुरम के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. रितेश शर्मा ने बताया कि बासमती चावल भारत की वैश्विक पहचान है और 150 से अधिक देशों में निर्यात होता है. उन्होंने किसानों को बासमती धान की खेती करने के लिए प्रेरित किया.

सातवें चरण में चंबल फर्टिलाइजर लिमिटेड के एस. के. सिंह ने जलवायु परिवर्तन को देखते हुए फसल पैटर्न बदलने की जरूरत बताई. उन्होंने गन्ने के साथ अन्य फसलों को अपनाने की सलाह दी.

आठवें चरण में कृषि विभाग के विकास पवार ने बताया कि किसानों को अरहर, मूंग, उड़द और धान के बीज अनुदान पर दिए जा रहे हैं. उन्होंने योजनाओं का लाभ उठाने की अपील की.
जल संरक्षण और जागरूकता के नाम रहा 9वां चरण
नौवें चरण में धानुका एग्रीटेक लिमिटेड के संस्थापक डॉ. आर. जी. अग्रवाल ने जल संरक्षण पर जोर दिया और नकली उत्पादों के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने की बात कही.

दसवें चरण में प्रगतिशील किसानों विनय कुमार, राजेश कुमार, विनोद कुमार सैनी, रामबीर पाल, मनोज पाल, पवन सैनी, रवि दत्त, योगेंद्र राणा, अनिल चौधरी, अशोक सिरोही, राजकुमार सैनी, श्यामवीर सैनी, राजन सिरोही और सुनील फौजी को सम्मानित किया गया. इसमें चिराग कृषि फार्म के संचालक विनोद सैनी ने सभी अतिथियों का धन्यवाद किया और अपने एफपीओ के कार्यों की जानकारी दी.
लकी ड्रॉ के साथ हुआ कार्यक्रम का समापन
कार्यक्रम के अंतिम यानी ग्यारहवें चरण में लकी ड्रॉ का आयोजन हुआ, जिसमें ₹500 के 10 पुरस्कार दिए गए. पहला पुरस्कार दुर्गेश कुमार और दूसरा पुरस्कार सुनीता को मिला.
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