
मुरादाबाद और बरेली के बीच कोसी नदी के बाएं किनारे पर बसा, अपनी ऐतिहासिक समृद्धि और नवाबी ठाठ के लिए प्रसिद्ध जनपद रामपुर में ‘किसान तक’ का किसान कारवां पहुंचा. उत्तर प्रदेश के 75 जिलों के कवरेज में यह 64वां जनपद रहा. बढ़ती गर्मी के बीच जनपद के रासडंडियां गांव में आयोजित कार्यक्रम के दौरान महिला, पुरुष और युवाओं की अच्छी भागीदारी देखने को मिली.

पहले चरण में वेटनरी ऑफिसर धमोरा, रामपुर डॉ. जोश कुमार ने किसानों को देसी नस्ल सुधार और देसी गौ पालन करने को लेकर जोर दिया. इसके साथ ही उन्होंने किसानों को मिनी नंदनी कृषक योजना के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि इस योजना के तहत 10 देसी गाय पालन पर 23 लाख 60 हजार रुपये लागत तय किया गया है, जिसमें 50 फीसदी सरकार के द्वारा दिया जाएगा.

दूसरे चरण में इफको एमसी बरेली के क्षेत्रीय प्रबंधक हरीश गंगवार ने किसानों को माइकोजेन, शिराशागी, हुयूमेत्शू उत्पादों के बारे में विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने बताया कि ये तमाम उत्पाद गन्ना, धान, गेहूं सहित अन्य फसलों में उपयोग किए जा सकते हैं. वहीं, इन उत्पादों को खरीदने के दौरान किसान इफको से जुड़े हुए प्रतिनिधियों से जानकारी जरूर हासिल कर लें.

तीसरे चरण में कृषि विभाग डीडीएजी रामपुर के राम किशन सिंह ने किसानों को किसान सम्मान निधि की राशि के बारे में जानकारी दी. इसके साथ ही उन्होंने फार्मर आईडी के बारे में भी किसानों को बताया और कहा कि अब जो भी योजनाएं चलाई जा रही हैं, उनमें किसान की फार्मर आईडी बहुत जरूरी है.

चौथे चरण में स्थिल कंपनी के प्रतिनिधि शुभम मिश्रा ने बताया कि कृषि के क्षेत्र में कृषि यंत्रों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है. आधुनिक कृषि यंत्रों में स्थिल कंपनी के पास कई ऐसे छोटे और बड़े यंत्र उपलब्ध हैं, जो किसानों के श्रम और समय दोनों की बचत करते हैं. कंपनी कृषि यंत्रों के क्षेत्र में अपनी गुणवत्ता और भरोसे के लिए जानी जाती है.

पांचवें चरण में केवीके रामपुर के वैज्ञानिक डॉ. अनुज बंसल ने धान की खेती के दौरान बीजों का चयन किसान कैसे करें, इसको लेकर किसानों को विस्तार से जानकारी दी. साथ ही उन्होंने किसानों को तना छेदक कीट के उपचार को लेकर जानकारी दी. इसके साथ ही धान की नर्सरी लगाने से पहले किसान खेत की तैयारी कैसे करें, इसको लेकर भी जानकारी दी.

छठवें चरण में इफ्फको रामपुर के प्रतिनिधि जे.के. रावत ने किसानों को उर्वरकों के संतुलित प्रयोग के बारे में जानकारी दी. साथ ही उन्होंने बताया कि यह किसानों के बीच अपनी जगह कैसे बना पाया है और इसके इतिहास का भी जिक्र किया. साथ ही उन्होंने नैनो डीएपी, नैनो यूरिया सहित नैनो जिंक से जुड़े उत्पादों के बारे में किसानों को बताया और समझाया कि आने वाले दिनों में अब किसानों को इन्हीं उत्पादों के साथ खेती में आमदनी बढ़ानी है.

सातवें चरण में केवीके रामपुर के कृषि वैज्ञानिक डॉ. नरेंद्र सिंह ने किसानों को उर्वरकों के संतुलित उपयोग के बारे में बताया. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि कई उर्वरक विदेश से आते हैं, इसलिए अब समय आ गया है कि किसान गोबर और जैविक उर्वरकों का उपयोग करना शुरू करें. इसके साथ ही उन्होंने मिट्टी में जीवाश्म कार्बन बढ़ाने पर जोर दिया और यह भी बताया कि जीवाश्म कार्बन कैसे बढ़ाया जा सकता है.

आठवें चरण में जादूगर ने अपनी कला के माध्यम से खेती से जुड़ी जानकारी प्रस्तुत की. उन्होंने किसानों को गोबर खाद के उपयोग और पशुपालन को बढ़ावा देने का सुझाव दिया. साथ ही हर शुभ अवसर पर वृक्ष लगाने की अपील की और आय दोगुनी करने के उपाय बताए.

अंतिम, नौवें चरण में लकी ड्रॉ का आयोजन किया गया, जिसमें 10 विजेताओं को 500 रुपये और 5 लोगों को एक-एक हजार रुपये का पुरस्कार दिया गया. ‘किसान तक’ का यह कारवां किसानों को आधुनिक तकनीक, बाजार से जुड़ाव और आय बढ़ाने के उपायों से जोड़ने का एक प्रभावी मंच प्रदान कर रहा है.
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