
उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्र में स्थित गोमती नदी का उद्गम स्थल और बांसुरी की नगरी पीलीभीत जनपद में किसान तक का किसान कारवां अपने 63वें पड़ाव के तौर पर पहुंचा. वनीय संपदा और उपजाऊ मिट्टी के साथ समृद्ध कृषि के बदौलत जनपद की अर्थव्यवस्था का आधार कृषि बना हुआ है.

पहले चरण में कृषि विज्ञान केंद्र पीलीभीत के वैज्ञानिक डॉ. एस.एस. ढाका ने सभी लोगों को इस समय खरीफ सीजन में धान की खेती से पहले खेतों की उर्वरा शक्ति को बढ़ाए रखने के लिए ढैंचा की खेती करने का सुझाव दिया. उन्होंने किसानों को गोबर खाद और कंपोस्ट खाद का खेतों में प्रयोग करने को लेकर भी सुझाव दिया.

दूसरे चरण में पशुपालन विभाग के पशु अधिकारी डॉ. साहिल ने खेती के साथ पशुपालन के और कदम बढ़ाने को लेकर किसानों को जागरूक किया. आगे उन्होंने पशुओं के टीकाकरण के बारे में भी विस्तार से बताया कि साल में कम से कम पशुओं को 2 से 3 बार कीड़े की दवा अवश्य देनी चाहिए. अगर कीड़े की दवा नहीं देते हैं तो दूध उत्पादन से लेकर पशु के स्वास्थ्य पर इसका सीधा असर पड़ता है.

तीसरे चरण में इफको पीलीभीत के प्रतिनिधि दीपक चौधरी ने कहा कि खेतों की उर्वरा शक्ति अब खत्म हो रही है, इसके लिए किसानों को अपनी खेती में बदलाव करना होगा और उर्वरकों का सही उपयोग करना होगा. उन्होंने किसान बीमा के बारे में बताया और कहा कि बीमा कंपनी दो लाख रुपए तक का बीमा देती है.

चौथे चरण में कृषि विज्ञान केंद्र पीलीभीत के वैज्ञानिक डॉ. दीपक कुमार ने किसानों को मिनरल मिक्सर के बारे में विस्तार से बताया. उन्होंने कहा कि पशुओं को हर रोज 50 ग्राम मिनरल मिक्सर अवश्य देना चाहिए. इससे पशुओं के अंदर की क्रियाएं सुचारू और सही तरीके से चलती हैं. इससे पशु स्वस्थ रहता है और दूध उत्पादन में भी वृद्धि होती है.

पांचवें चरण में धानुका के प्रतिनिधि धीरेन्द्र कुमार ने कंपनी के 90 उत्पादों के बारे में विस्तार से बताया. उन्होंने किसानों को धानुका के कोनिका, सेम्प्रा सहित अन्य उत्पादों का धान, गेहूं, गन्ना सहित अन्य फसलों में उपयोग कैसे करें, इस बारे में जानकारी दी. साथ ही उन्होंने कहा कि धानुका के सभी उत्पादों पर बारकोड लगा रहता है, जिससे उत्पादों से जुड़ी पूरी जानकारी हासिल की जा सकती है.

छठवें चरण में स्थिल के प्रतिनिधि देव शर्मा ने किसानों को कृषि से जुड़े यंत्रों के बारे में जानकारी दी. उन्होंने कहा कि सभी किसान एक बार जरूर स्थिल के कृषि यंत्रों का उपयोग करें. इस दौरान स्थिल कंपनी द्वारा 5 प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया गया, जहां किसानों ने अपना अनुभव भी साझा किया.

सातवें चरण में कृषि विभाग के एसडीएईओ इंजीनियर कौशल किशोर ने किसानों को फार्मर आईडी के बारे में बताया. उन्होंने कहा कि फार्मर आईडी में किसान का आधार नंबर, मोबाइल नंबर और उसकी जमीन की जानकारी दर्ज रहती है. आगे उन्होंने कहा कि आने वाला पीएम किसान सम्मान निधि उन्हीं किसानों को मिलेगा जिनकी फार्मर आईडी बनी होगी.

आठवें चरण में इफको एमसी के प्रतिनिधि हरीश कुमार गंगवार ने इफको एमसी से जुड़े उत्पादों के बारे में विस्तार से बताया. उन्होंने फसल सुरक्षा के लिए इफको एमसी के उत्पादों का उपयोग कैसे किया जा सकता है, इसके बारे में जानकारी दी. उन्होंने माइकोजिन के प्रयोग और उससे होने वाले लाभ के बारे में भी बताया.

नौवें चरण में गन्ना विभाग के अधिकारी रामभद्र द्विवेदी ने किसानों को गन्ना में लगने वाली सफेद तितली से बचाव के लिए फेरोमोन ट्रैप यंत्र के बारे में जानकारी दी. इसके साथ ही उन्होंने गन्ना सर्वे नीति के बारे में भी विस्तार से बताया. दसवें चरण में जीएम केन विनय कुमार सिंह ने किसानों को गन्ना की खेती से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी. उन्होंने बताया कि गन्ना की खेती में किस तरह सुधार करने की जरूरत है और चोटी भेदक कीट की निगरानी कैसे करें.

11वें चरण में जादूगर ने अपनी कला के माध्यम से खेती से जुड़ी जानकारी प्रस्तुत की. उन्होंने किसानों को गोबर खाद के उपयोग और पशुपालन को बढ़ावा देने का सुझाव दिया.साथ ही हर शुभ अवसर पर वृक्ष लगाने की अपील की और आय दोगुनी करने के उपाय बताए.

अंतिम, 12वें चरण में लकी ड्रॉ का आयोजन किया गया, जिसमें 10 विजेताओं को 500 रुपये और 5 लोगों को एक-एक हजार रुपये का पुरस्कार दिया गया. ‘किसान तक’ का यह कारवां किसानों को आधुनिक तकनीक, बाजार से जुड़ाव और आय बढ़ाने के उपायों से जोड़ने का एक प्रभावी मंच प्रदान कर रहा है.
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