
भगवान श्रीराम के पुत्र कुश की नगरी सुल्तानपुर में किसान कारवां पहुंचा. उत्तर प्रदेश सरकार और इंडिया टुडे के संयुक्त प्रयास से प्रदेश के 75 जनपदों में यह किसान कारवां आयोजित किया जा रहा है. इस विशेष अभियान के तहत 75 जिलों की कवरेज में सुल्तानपुर 34वां पड़ाव रहा.

किसान कारवां के पहले चरण में सहायक विकास अधिकारी संजय यादव ने किसानों को कृषि यंत्रीकरण योजनाओं की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि सरकार छोटे से लेकर बड़े कृषि यंत्रों पर सब्सिडी दे रही है. कई योजनाओं में एक करोड़ रुपये तक के कृषि यंत्र किसानों को उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिन पर 60 प्रतिशत तक की सब्सिडी मिलती है.

दूसरे चरण में सहायक विकास कृषि रक्षा अधिकारी अब्दुल उस्मान ने बताया कि रासायनिक खाद के अत्यधिक उपयोग से कीटों का प्रकोप बढ़ रहा है. इससे फसलों को बचाने के लिए कृषि रक्षा इकाई द्वारा सोलर ट्रैप और अन्य ट्रैप उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिन पर सब्सिडी भी दी जा रहा है.

तीसरे चरण में कृषि विज्ञान केंद्र के फसल वैज्ञानिक डॉ. ए.के. सिंह ने उन्नत बीज और सिंचाई प्रबंधन पर जानकारी दी. उन्होंने बताया कि गेहूं की DBW-87 किस्म 80 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन दे सकती है, लेकिन जानकारी के अभाव में किसान इसका पूरा लाभ नहीं ले पा रहे हैं.

चौथे चरण में कृषि विज्ञान केंद्र के डॉ. गौरव पांडे ने पशुपालन के महत्व पर प्रकाश डाला. उन्होंने बताया कि पशुओं को संतुलित पोषण देने के लिए मिनरल और प्रोटीन युक्त “मिनरल चॉकलेट” तैयार की जा सकती है. यह ईंट जैसी खुराक पशु धीरे-धीरे चाटते हैं, जिससे दूध उत्पादन में 2 से 3 किलो तक की वृद्धि हो सकती है.

पांचवें चरण में मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. चंद्रसेन गुप्ता ने बताया कि सरकार देसी गायों के संवर्धन के लिए नंदिनी और मिनी नंदिनी योजना चला रही है. मिनी नंदिनी योजना के तहत 10 देसी गायों के पालन के लिए लगभग 23.5 लाख रुपये की परियोजना है, जिसमें 11.80 लाख रुपये तक की सब्सिडी दी जाती है.

छठे चरण में जादूगर सलमान ने जादू के माध्यम से महिलाओं को स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के फायदे बताए. उन्होंने बताया कि समूह से जुड़ने पर महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत बनती हैं और उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ भी मिलता है.

कार्यक्रम के अंत में लकी ड्रा का आयोजन किया गया. इसमें 500 रुपये के 10 पुरस्कार दिए गए. प्रथम पुरस्कार सुखमति देवी ने 3000 रुपये और द्वितीय पुरस्कार राम लखन मौर्य ने 2000 रुपये जीते.
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