जगजीत सिंह डल्लेवालकिसान आंदोलन को लेकर किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने बड़ा ऐलान किया है. हरियाणा प्रशासन के साथ हुई बातचीत के बाद किसानों ने फिलहाल दिल्ली कूच का फैसला टाल दिया है. अब किसान 28 अगस्त तक खनौरी बॉर्डर पर ही अपना मोर्चा जारी रखेंगे. किसानों का कहना है कि वे सड़क जाम नहीं करेंगे और एक तरफ बैठकर शांतिपूर्वक अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे. किसान नेता डल्लेवाल ने बताया कि किसानों और हरियाणा प्रशासन के बीच दिल्ली कूच को लेकर तीन दौर की बैठक हुई. प्रशासन की ओर से किसानों से कहा गया कि दिल्ली जाने वाले जत्थे में 51 की जगह 41 किसान भेजे जाएं. किसान संगठनों ने इस प्रस्ताव पर 41 किसानों का जत्था भेजने की सहमति जताई, लेकिन प्रशासन 41 किसानों के जाने पर भी सहमत नहीं हुआ.
इसके बाद प्रशासन की ओर से हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मुलाकात की बात कही गई. हालांकि, किसान नेताओं ने स्पष्ट किया कि उनकी मांग हरियाणा सरकार से बातचीत की नहीं, बल्कि केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों से सीधे बातचीत की है. किसानों का कहना है कि उनका मुख्य मुद्दा भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील से जुड़ा है, इसलिए इस पर केंद्र सरकार के स्तर पर ही बातचीत होनी चाहिए. बता दें कि संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) की ओर से किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल के नेतृत्व में 16 अगस्त से ‘किसान बचाओ पदयात्रा’ शुरू करने का ऐलान किया गया था.
जगजीत सिंह डल्लेवाल ने कहा कि किसान अपने घरों से 28 अगस्त तक की तैयारी करके आए हैं. ऐसे में अब वे खनौरी बॉर्डर पर ही लगातार मोर्चा लगाए रखेंगे. किसानों ने यह भी स्पष्ट किया है कि वे सड़क को बाधित नहीं करेंगे और शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध जारी रखेंगे. रात के समय भी किसान खनौरी बॉर्डर पर ही रुकेंगे. किसान नेता के मुताबिक, हरियाणा में जिन किसानों को हिरासत में लिया गया था, उन्हें छोड़ दिया गया है. वहीं, किसानों और प्रशासन के बीच बातचीत का एक और दौर होने की बात कही गई है.
किसान संगठनों का कहना है कि अगर केंद्र सरकार की ओर से कृषि मंत्रालय से जुड़े मंत्री या अधिकारी बातचीत के लिए आगे आते हैं, तो वे बैठक के लिए तैयार हैं. किसान अपनी मांगों के साथ भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर भी सरकार के सामने अपना पक्ष रखना चाहते हैं. फिलहाल दिल्ली कूच पर ब्रेक लग गया है और किसान खनौरी बॉर्डर पर ही डटे रहेंगे. अब सभी की नजरें केंद्र सरकार और किसान नेताओं के बीच होने वाली संभावित बातचीत पर टिकी हैं. (कुलवीर सिंह और सुनील कुमार की रिपोर्ट)
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