मुख्यमंत्री भगवंत मानपंजाब में धान की कटाई का सीजन शुरू होने से पहले पराली जलाने को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है. पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा है कि वह पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ FIR दर्ज करने के पक्ष में नहीं हैं. उनका कहना है कि किसान पराली जलाना नहीं चाहते, लेकिन धान की कटाई और गेहूं की बुवाई के बीच कम समय होने के कारण उनके सामने परेशानी रहती है. ऐसे में किसानों को पराली का सही तरीके से प्रबंधन करने के लिए आर्थिक मदद दी जानी चाहिए.
मुख्यमंत्री मान ने कहा कि धान उगाने वाले किसानों को पराली नहीं जलाने के लिए नकद प्रोत्साहन राशि दिया जाना चाहिए. किसान संगठनों की ओर से पराली प्रबंधन के लिए 3,000 रुपये प्रति एकड़ की आर्थिक मदद की मांग की जा रही है. ऐसे में सीएम मान ने कहा कि पंजाब के किसान देश के लिए बड़ी मात्रा में धान पैदा करते हैं. उन्होंने केंद्र से सवाल किया कि जब पंजाब से केंद्रीय पूल में बड़ी मात्रा में धान जाता है, तो उससे निकलने वाली पराली के प्रबंधन की जिम्मेदारी पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए.
पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के किसान मेले में बोलते हुए CM मान ने कहा कि उनका किसानों के खिलाफ FIR दर्ज करने का मन नहीं करता. उन्होंने कहा कि किसान भी पराली का धुआं नहीं चाहते, क्योंकि इसका असर उनके अपने स्वास्थ्य और आसपास के वातावरण पर भी पड़ता है. उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली में प्रदूषण के लिए केवल पंजाब के किसानों को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है. उनके मुताबिक, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से होने वाला प्रदूषण भी हवा की क्वालिटी को प्रभावित करता है.
आंकड़ों के मुताबिक पंजाब में पिछले कुछ वर्षों में पराली जलाने की घटनाओं में काफी कमी आई है. साल 2023 में राज्य में 36,663 घटनाएं दर्ज हुई थीं, जो 2024 में घटकर 10,909 और 2025 में 5,114 रह गईं. यानी 2023 से 2025 के बीच घटनाओं में करीब 86 प्रतिशत की कमी आई है. हालांकि, संगरूर, मानसा, बठिंडा और अमृतसर जैसे जिलों में पराली जलाने की घटनाएं अभी भी सामने आती हैं.
पराली जलाने पर किसानों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223 के तहत FIR दर्ज की जा सकती है. दोषी पाए जाने पर किसान से पर्यावरण मुआवजे के रूप में जुर्माना भी लिया जाता है. इसके अलावा राजस्व रिकॉर्ड में 'रेड एंट्री' दर्ज की जाती है, जिसका असर किसान के लिए लोन लेने या जमीन बेचने पर पड़ सकता है.
किसान संगठन भी सरकार से पराली जलाने के मामले में पहले दर्ज FIR वापस लेने की मांग कर रहे हैं. भारतीय किसान यूनियन (एकता उग्राहन) के नेता सुखदेव सिंह कोकरीकलां ने सरकार से किसानों के खिलाफ दर्ज FIR रद्द करने की अपील की. वहीं BKU (लाखोवाल) के नेता हरिंदर सिंह लाखोवाल ने भी किसानों को पराली प्रबंधन के लिए नकद मदद देने की मांग दोहराई. (PTI)
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