पंजाब में पाई जाने वाली नीली रावी भैंसगुरु अंगद देव पशु चिकित्सा और पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (गडवासु) लुधियाना 4 से 6 अप्रैल, 2023 तक 'नीली रावी दुग्ध प्रतियोगिता' आयोजित करने जा रहा है.इस दुग्ध प्रतियोगिता में पंजाब वे किसान भाग ले सकते है, जिस किसान के भैंस के दूध का उत्पादन 15 किग्रा/दिन से अधिक है. इस दुग्ध प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य अधिक दूध देने वाली नील रावी नस्ल भेंसो की पहचान कर ,किसानों को इस नस्ल की भैंस पालने के लिए प्रोत्साहित करना है.इस प्रतियोगिता में भाग लिए जिस किसान के पास प्रतिदिन 15 किलो से ज्यादा दूध उत्पादन देने वाली नील रावी भैस होगी उन किसान विजेताओं को एक प्रमाण पत्र के साथ टोकन मनी के रूप में 2100 रुपये नकद पुरस्कार दिया जाएगा .इसके अलावा भैस के लिए मुफ्त चारा, पानी और स्वास्थय सेवाओं की व्यवस्था की जाएगी.
गडवासु कुलपति डॉ इंद्रजीत सिंह,ने कहा कि पंजाब राज्य में हो रहे कुल दूध उत्पादन का लगभग 56 दूध प्रतिशत भैंस से आता है. उन्होंने दुग्ध प्रतियोगिता के आयोजन पर खुशी जाहिर करते हुए बताया कि इससे भैंस का पालन कर रहे किसानों को प्रोत्साहन मिलेगा.पंजाब को दूध के मामले में भैंस ब्रांड को स्थापित करने में मदद मिलेगी, जिससे से किसानों में जागरूकता भी आएगी.
गडवासु के प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ. प्रकाश सिंह बराड़ ने किसानों से इस प्रतियोगिता में भाग लेने का आग्रह किया और कहा कि विश्वविद्यालय राज्य में भैंस पालन को बढ़ावा दे रहा है, क्योंकि यह देशी पशु है और इसका दूध भी वसा से भरपूर होता है. इस तरह की प्रतियोगिता किसानों को अच्छी नस्ल के पशु रखने के लिए प्रेरित करता है और लोगों में दूध की गुणवत्ता और सुरक्षा के महत्व के बारे में जागरूकता भी पैदा होती है.
नीली रावी भैंस की जैव उत्पत्ति पंजाब और उसके आसपास के क्षेत्रों में हुई है. दो नदियों के नाम पर इसका नाम नीली रावी रखा गया है. नीली रावी बहुत ही बेहतरीन नस्ल का भैंस है जो पंजाब के फिरोजपुर, अमृतसर और तरणतारण क्षेत्र में पाया जाती है. भारत के अलावा ये नस्ल पाकिस्तान में भी पाई जाती है. आम तौर पर नीली रावी के माथे पर उजले रंग की आकृति बनी रहती है.
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