पाकिस्तान में गेहूं किसानों की बढ़ी चिंतापाकिस्तान के पंजाब प्रांत में इस बार सरकार की नई गेहूं खरीद नीति मुश्किलों में घिर गई है. सरकार ने इस साल पुरानी सरकारी खरीद व्यवस्था को बदलकर निजी कंपनियों के जरिए गेहूं खरीदने का फैसला किया था. लेकिन अब यह योजना पूरी तरह लड़खड़ाती नजर आ रही है. किसानों की नाराजगी, बैंकिंग दिक्कतों और कंपनियों की कमजोरी के कारण गेहूं खरीद की प्रक्रिया लगभग ठप पड़ गई है.
पहले पाकिस्तान में गेहूं की खरीद सरकार खुद करती थी. लेकिन इस बार पंजाब सरकार ने नई व्यवस्था लागू की. इसके तहत करीब 30 लाख टन गेहूं खरीदने की जिम्मेदारी 11 निजी कंपनियों को दी गई.
सरकार को उम्मीद थी कि निजी कंपनियों के आने से खरीद प्रक्रिया तेज और आसान हो जाएगी. इसके लिए कंपनियों को कई सुविधाएं भी दी गईं. सरकार ने सस्ती दर पर कर्ज, गोदामों में मुफ्त भंडारण और अनुभवी अधिकारियों की मदद देने का वादा किया था. लेकिन योजना जमीन पर आते ही मुश्किलों में फंस गई.
निजी कंपनियों को गेहूं खरीदने के लिए बड़ी रकम की जरूरत थी. इसके लिए उन्हें बैंकों से लोन लेना था. लेकिन ब्याज दरों को लेकर बैंक और कंपनियों के बीच सहमति नहीं बन पाई.
आखिर में कंपनियों को ज्यादा महंगे कर्ज पर पैसा लेना पड़ा. इससे कंपनियों को डर है कि लंबे समय तक गेहूं स्टोर करने में उन्हें नुकसान हो सकता है. यही वजह है कि कई कंपनियां गेहूं खरीदने से पीछे हटने लगीं.
रिपोर्ट के मुताबिक, 11 में से कम से कम 9 कंपनियां अब तक एक दाना गेहूं भी नहीं खरीद पाई हैं. इससे पूरी खरीद व्यवस्था लगभग रुक गई है.
सरकार ने गेहूं की खरीद कीमत 3,500 पाकिस्तानी रुपये प्रति मन तय की है. लेकिन बाजार में गेहूं का भाव करीब 3,700 रुपये प्रति मन तक पहुंच गया है. ऐसे में किसान सरकारी केंद्रों पर गेहूं बेचने की बजाय खुले बाजार में व्यापारियों को बेच रहे हैं.
कई किसान अभी गेहूं रोककर बैठे हैं क्योंकि उन्हें उम्मीद है कि आगे कीमत और बढ़ सकती है. इससे सरकारी खरीद केंद्रों पर गेहूं की आवक कम हो गई है.
स्थिति बिगड़ती देख अब पाकिस्तान सरकार ने सख्ती शुरू कर दी है. खबरों के अनुसार, पंजाब से दूसरे राज्यों में जा रहे गेहूं के ट्रकों को रोका जा रहा है. कई जगह सरकारी टीमों ने गेहूं की खेप पकड़कर उसे सरकारी गोदामों में भेजा है, जहां तय सरकारी कीमत पर खरीद की जा रही है. लेकिन इस कदम से किसान और व्यापारी दोनों नाराज बताए जा रहे हैं.
किसान संगठनों ने सरकार की नीति की खुलकर आलोचना की है. पाकिस्तान किसान इत्तेहाद के अध्यक्ष खालिद खोखर का कहना है कि जब गेहूं की कीमतें पहले बहुत गिर गई थीं, तब सरकार ने किसानों की मदद नहीं की. लेकिन अब जब बाजार में कीमतें बढ़ने लगीं तो सरकार हस्तक्षेप करने लगी है. उन्होंने खरीद केंद्रों पर गड़बड़ी के भी आरोप लगाए. किसानों का कहना है कि वजन मापने में धांधली हो रही है और कटौती भी की जा रही है.
एक अन्य किसान नेता मियां उमैर मसूद ने भी सरकारी योजनाओं पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि किसानों को सस्ती दर पर दिए जाने वाले बोरे यानी गन्नी बैग बांटने में भी भ्रष्टाचार और गड़बड़ी हुई है.
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पाकिस्तान सरकार जल्द समाधान नहीं निकालती, तो आने वाले समय में गेहूं संकट और गहरा सकता है. खरीद व्यवस्था कमजोर होने से किसानों को नुकसान होगा और बाजार में अनिश्चितता बढ़ेगी.
इस पूरे मामले ने यह दिखा दिया है कि बिना मजबूत तैयारी के बड़ी नीतियों में बदलाव करना कितना मुश्किल हो सकता है. अब पाकिस्तान सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती किसानों का भरोसा वापस जीतने और गेहूं खरीद व्यवस्था को फिर से पटरी पर लाने की है.
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