छत्तीसगढ़ में धान किसानों की जीतछत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में एक किसान ने अपनी कानूनी जीत का अनोखे अंदाज में जश्न मनाया. रविवार 6 अप्रैल को किसान बैंड-बाजे और ग्रामीणों के साथ नाचते-गाते धान बेचने खरीदी केंद्र पहुंचा. दरअसल किसान का धान प्रशासनिक प्रक्रिया में फंस गया था, जिसके बाद उसने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. कोर्ट के आदेश के बाद उसका धान समर्थन मूल्य पर खरीदी केंद्र में तौला गया.
मामला जिला मुख्यालय से करीब 5 किलोमीटर दूर चित विश्रामपुर पंचायत का है. यहां के किसान राजदेव मिंज का लगभग 524 बोरा धान ऑनलाइन टोकन नहीं कट पाने के कारण समय पर सरकारी खरीदी केंद्र में नहीं बिक पाया था. प्रशासन ने समय सीमा समाप्त होने का हवाला देते हुए धान खरीदी से मना कर दिया था. इसके बाद किसान ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की. मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने किसान के पक्ष में फैसला सुनाते हुए प्रशासन को धान खरीदी कराने का आदेश दिया.
किसान राजदेव मिंज ने कहा, मैं कई बार अपने भाइयों के साथ धान खरीदी केंद्र टोकन कटवाने के लिए गया , लेकिन टोकन नहीं काटा गया. आवेदन तक नहीं लिया गया और यह कहकर लौटा दिया गया कि लिमिट खत्म हो गई है. अधिकारियों से मिलने पर सिर्फ आश्वासन मिला. इसके बाद उन्होंने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जहां से उन्हें न्याय मिला.
इस मामले में कांग्रेस जिला अध्यक्ष हरिहर यादव ने धान खरीदी व्यवस्था को लेकर राज्य की बीजेपी सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने इसे किसान विरोधी सरकार बताते हुए कहा कि कुछ बिचौलियों को संरक्षण दिया जा रहा है. साथ ही हाई कोर्ट के इस फैसले को प्रदेश के किसानों की जीत बताया.
हाई कोर्ट के आदेश के बाद किसान राजदेव मिंज गांव के लोगों के साथ ट्रैक्टर में धान लोड कर बैंड-बाजे के साथ बरदर धान खरीदी केंद्र पहुंचे. यहां धान की तौल कराई गई. न्याय मिलने की खुशी में किसान और ग्रामीण बैंड की धुन पर नाचते-गाते नजर आए. इस दौरान कांग्रेस जिलाध्यक्ष हरिहर प्रसाद यादव भी अपने कार्यकर्ताओं के साथ मौके पर पहुंचे और किसान का समर्थन किया.
गांव के किसान इस फैसले पर बहुत खुश हैं. उनका कहना था कि यह केवल गांव की जीत नहीं बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ की जीत है क्योंकि उपज बिक्री के लिए अब किसानों को मंडी प्रशासन के चक्कर नहीं लगाने होंगे. किसानों ने उन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जिन्होंने धान खरीदने से मना कर दिया था. किसानों ने कहा कि इस फैसले ने साफ कर दिया कि अगर प्रशासन मनमानी करेगा तो किसान ऊपर तक (हाई कोर्ट) जा सकता है. जो लोग किसानों की उपज खरीदने से मना करते हैं, उनके लिए यह स्पष्ट संदेश है.(सुमित सिंह का इनपुट)
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today