किसान तक के मंडी पेज पर आपका स्वागत है। यहां आप देश की हर मंडी में चल रहा फसल का दाम देख सकते हैं। आपको पुराने मंडी भाव की जानकारी भी इस पेज पर मिलेगी। देश भर की मंडियों में आज का सबसे ज्यादा भाव रहा रुपये/क्विंटल और सबसे कम भाव रहा रुपये/क्विंटल ।
| राज्य | मंडी | कृषि जिंस | आवक (क्विंटल में) | व्यापार (क्विंटल में) | दिनांक |
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पंजाब की मंडियों में इस साल गेहूं की खरीद में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. MSP ज्यादा होने के कारण निजी व्यापारी दूसरे राज्यों से सस्ता गेहूं खरीद रहे हैं. इससे सरकारी खरीद 99% तक पहुंच गई है. निजी भागीदारी घटने से बाजार में असंतुलन बन रहा है और किसान पूरी तरह सरकारी खरीद पर निर्भर होते जा रहे हैं.
कपास बाजार में तेज मांग के बीच CCI ने इस सीजन में खरीदे गए स्टॉक का आधे से ज्यादा हिस्सा बेच दिया है. कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के बावजूद मिलों और व्यापारियों की खरीद बनी हुई है, जिससे बाजार की स्थिति मजबूत बनी हुई है.
जब किसान घाटे में था तब उद्योग जगत खामोश रहा, लेकिन जैसे ही किसान की मेहनत की वाजिब कीमत मिलने का समय आया, ड्यूटी फ्री आयात की लॉबिंग शुरू हो गई. असल में, आज जो विदेशी कपास हमें सस्ता लग रहा, वो दरअसल हमारे भविष्य की गुलामी का निवेश है. जब हमारे खेत सूने पड़ जाएंगे और मिलों के पहिए विदेशी सप्लायर्स के रहमोकरम पर घूमेंगे, तब हमें अहसास होगा कि हमने चंद रुपयों के मुनाफे के लिए अपनी 'रीढ़ की हड्डी' ही तोड़ दी है.
हरियाणा के करनाल में यूपी से गेहूं लेकर पहुंचे किसानों को ‘मेरी फसल, मेरा ब्योरा’ (MFMB) पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन न होने के कारण बॉर्डर पर रोक दिया गया. प्रशासन ने साफ किया है कि केवल रजिस्टर्ड किसानों को ही मंडियों में प्रवेश मिलेगा, जबकि किसानों ने नियमों के लागू करने में भेदभाव और तकनीकी दिक्कतों का आरोप लगाया है.
पंजाब में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि के कारण गेहूं उत्पादन में गिरावट दर्ज की गई है. औसतन प्रति एकड़ 2 क्विंटल तक कम पैदावार हुई है, जिससे किसानों को करीब 5,000 रुपये प्रति एकड़ का नुकसान हो रहा है. कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस साल कुल उत्पादन में कमी का अनुमान है, जबकि सरकार ने खरीद नियमों में ढील देकर किसानों को राहत देने की कोशिश की है.
पंजाब के बासमती निर्यातकों ने BEDF में सुधार और पुनर्गठन की मांग उठाई है. बढ़ी हुई फीस और घटते मुनाफे से व्यापार प्रभावित हो रहा है. निर्यातकों का कहना है कि संस्था में बदलाव और बेहतर योजना से बासमती कारोबार को मजबूती मिल सकती है. सरकार से जल्द कार्रवाई की उम्मीद जताई गई है.
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