किसान तक के मंडी पेज पर आपका स्वागत है। यहां आप देश की हर मंडी में चल रहा फसल का दाम देख सकते हैं। आपको पुराने मंडी भाव की जानकारी भी इस पेज पर मिलेगी। देश भर की मंडियों में आज देशी चना का सबसे ज्यादा भाव रहा 5665 रुपये/क्विंटल और सबसे कम भाव रहा 5320 रुपये/क्विंटल ।
| राज्य | मंडी | कृषि जिंस | दाम/क्विंटल रुपये में | आवक (क्विंटल में) | व्यापार (क्विंटल में) | दिनांक | ||
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| न्यूनतम भाव | मॉडल भाव | अधिकतम भाव | ||||||
| मध्य प्रदेश | जबलपुर | देशी चना | 4100.00 | 4670.00 | 5665.00 | 773.00/- | 192.00/- | 18/02/2026 |
| मध्य प्रदेश | जबलपुर | देशी चना | 4700.00 | 4950.00 | 5320.00 | 242.00/- | 151.00/- | 17/02/2026 |
| मध्य प्रदेश | जबलपुर | देशी चना | 4850.00 | 5065.00 | 5365.00 | 403.00/- | 201.00/- | 13/02/2026 |
| मध्य प्रदेश | जबलपुर | देशी चना | 3005.00 | 5070.00 | 5560.00 | 393.00/- | 214.00/- | 11/02/2026 |
| मध्य प्रदेश | जबलपुर | देशी चना | 4800.00 | 5200.00 | 5550.00 | 214.00/- | 383.00/- | 10/02/2026 |
छत्तीसगढ़ में धान बेचने का टोकन न मिलने पर किसान ने हाई कोर्ट का रुख किया और जीत हासिल की. कोर्ट के आदेश के बाद किसान ने बैंड-बाजे के साथ खरीदी केंद्र पहुंचकर समर्थन मूल्य पर अपनी फसल बेची.
अमेरिका-चीन व्यापार और कच्चे तेल की कीमतों से फिलहाल सोयाबीन को सहारा मिला है, लेकिन आगे चलकर बढ़ती वैश्विक आपूर्ति और ब्राजील की रिकॉर्ड फसल कीमतों को सीमित कर सकती है.
पंजाब में गेहूं की सरकारी खरीद शुरू हो गई है, जहां किसानों को MSP 2,585 रुपये प्रति क्विंटल और 24 घंटे में भुगतान का भरोसा दिया गया है. सरकार ने खरीद के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं, लेकिन बेमौसम बारिश और तेज हवाओं से किसान चिंतित हैं. राज्य में 1.30 लाख एकड़ से अधिक गेहूं की फसल को नुकसान हुआ है, जिसके चलते मुआवजे की मांग तेज हो गई है.
मंदसौर कृषि उपज मंडी में कई किसानों का कहना है कि 9 दिन की छुट्टी के बाद आज मंडी खुली है, लेकिन मंडी फिर बंद रहेगी. उन्होंने सोसायटी से कर्ज लेकर और ब्याज पर पैसा लगाकर फसल तैयार की है.
प्याज निर्यात और कीमतों को लेकर DoCA की बैठक में ठोस फैसला नहीं हो सका. निर्यातकों ने स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने की मांग की, जबकि सरकार ने जिम्मेदारी उद्योग पर डाल दी, जिससे प्याज बर्बादी का मुद्दा बरकरार है.
मध्य प्रदेश में गेहूं की सरकारी खरीद में देरी ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. समर्थन मूल्य का इंतजार करते-करते किसान कम दाम पर फसल बेचने को मजबूर हो रहे हैं, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है.
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