एमपी में गेहूं खरीद को लेकर आया अपडेट (सांकेतिक तस्वीर)भोपाल। मध्यप्रदेश की डॉ मोहन यादव सरकार ने किसानों के खेत में एक बड़ा फैसला लिया है । केंद्र सरकार ने राज्य में गेहूं खरीदी के कोटे को बढ़ाते हुए 78 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन कर दिया है। यह फैसला किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्र सरकार से गेहूं उत्पादन में वृद्धि को देखते हुए कोटा बढ़ाने की अपील की थी, जिसे स्वीकार कर लिया गया। इस निर्णय को लेकर उन्होंने सोशल मीडिया पर खुशी जाहिर करते हुए इसे किसानों के हित में बड़ा कदम बताया।
केंद्र-राज्य समन्वय से किसानों को लाभ
सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में इस वर्ष गेहूं का उत्पादन बेहतर हुआ है, ऐसे में अधिक खरीदी की आवश्यकता थी। केंद्र सरकार ने तत्परता दिखाते हुए किसानों के हित में यह निर्णय लिया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी का आभार भी व्यक्त किया।
चरणबद्ध तरीके से होगी खरीदी
मध्य प्रदेश सरकार के अनुसार, गेहूं खरीदी प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से संचालित की जाएगी। सबसे पहले छोटे किसानों से, फिर मध्यम और अंत में बड़े किसानों से खरीदी की जाएगी, ताकि हर वर्ग के किसानों को समान अवसर मिल सके।
किसान कल्याण सरकार की प्राथमिकता
प्रदेश सरकार किसानों की आय बढ़ाने और खेती को लाभकारी बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। फसल बीमा, सिंचाई परियोजनाओं का विस्तार, समय पर खाद-बीज उपलब्धता और प्राकृतिक आपदा में त्वरित राहत जैसी योजनाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रहा बल
सरकार के फैसले से प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत मिली है.प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से किसानों को योजनाओं का सीधा लाभ मिल रहा है। इससे न केवल किसानों की आय में वृद्धि हो रही है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी मजबूत हो रही है।
उपार्जन केंद्रों पर बढ़ी सुविधाएं
किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए डॉ मोहन यादव सरकार ने उपार्जन केंद्रों पर तौल कांटों (वेट मशीन) की संख्या 4 से बढ़ाकर 6 कर दी है। इससे किसानों को लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा और समय पर गेहूं की तुलाई सुनिश्चित हो सकेगी।
प्रदेशभर में 3171 उपार्जन केंद्र स्थापित
गेहूं खरीदी को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए पूरे प्रदेश में 3171 उपार्जन केंद्र बनाए गए हैं। इन केंद्रों के माध्यम से किसानों को नजदीक ही अपनी उपज बेचने की सुविधा मिल रही है, जिससे परिवहन और समय दोनों की बचत हो रही है।
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