किसानों के लिए 'यूनिवर्सल एक्सीडेंटल इंश्योरेंस' का प्रस्ताव, राज्यसभा में प्राइवेट मेंबर बिल पेश

किसानों के लिए 'यूनिवर्सल एक्सीडेंटल इंश्योरेंस' का प्रस्ताव, राज्यसभा में प्राइवेट मेंबर बिल पेश

राज्यसभा सांसद सतनाम सिंह संधू ने किसानों और कृषि मजदूरों के लिए यूनिवर्सल एक्सीडेंटल इंश्योरेंस देने से जुड़ा प्राइवेट मेंबर बिल पेश किया. बिल में मौत पर 25 लाख रुपये तक मुआवजे और राष्ट्रीय कृषि जोखिम बीमा प्राधिकरण (NARIA) के गठन का प्रस्ताव है.

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किसानों के लिए 'यूनिवर्सल एक्सीडेंटल इंश्योरेंस' का प्रस्ताव, राज्यसभा में प्राइवेट मेंबर बिल पेशकिसानों के लिए शुरू हो सकता है यूनिवर्सल एक्सिडेंटल बीमा

राज्यसभा सदस्य सतनाम सिंह संधू ने सोमवार को किसानों को यूनिवर्सल एक्सीडेंटल इंश्योरेंस देने के लिए प्राइवेट मेंबर बिल पेश किया. उन्होंने संसद के चल रहे बजट सत्र के दौरान 'किसान जीवन सुरक्षा एवं दुर्घटना प्रतिपूर्ति विधेयक, 2025', 'प्रवासी भारतीय कौशल एवं प्रतिभा प्रेरक विधेयक, 2025' और 'उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए राष्ट्रीय रैंकिंग और प्रत्यायन प्राधिकरण विधेयक, 2025' पेश किए.

संधू ने राज्यसभा में किसानों की सुरक्षा के लिए विशेष प्राधिकरण बनाने की अपील की. इसमें किसानों और कृषि मजदूरों के लिए अनिवार्य दुर्घटना बीमा योजना देने के लिए राष्ट्रीय कृषि जोखिम बीमा प्राधिकरण बनाने की मांग शामिल है.

सबसे खतरनाक पेशे में शामिल कृषि

सदस्य ने सदन को बताया, "भारत की लगभग 46 प्रतिशत आबादी के लिए कृषि अभी भी मुख्य पेशा है, फिर भी यह सबसे खतरनाक पेशों में से एक बना हुआ है, क्योंकि हर साल खेती के काम के दौरान 10,000 से 15,000 मौतें और हजारों गंभीर चोटें लगती हैं, जिसमें हाथ से कटाई, कीटनाशक छिड़काव, भारी मशीनरी का संचालन, जानवरों के साथ काम करना और अत्यधिक गर्मी या बाढ़ जैसे जोखिमों का सामना करना शामिल है."

उन्होंने आगे कहा, "इन दुर्घटनाओं से न केवल लोगों की जान का नुकसान होता है, बल्कि अक्सर पहले से ही कमजोर ग्रामीण परिवार गरीबी, कर्ज और सामाजिक असुरक्षा के दुष्चक्र में फंस जाते हैं." संधू ने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY) जैसी सरकारी पहलें या तो फसल के नुकसान पर ध्यान केंद्रित करती हैं या न्यूनतम सामान्य दुर्घटना कवरेज मुहैया करती हैं और खेती से जुड़े व्यावसायिक जोखिमों को पर्याप्त रूप से कवर नहीं करती हैं.

किसानों के लिए सुरक्षा ढांचे के लिए कमी 

उन्होंने कहा, “खेती से जुड़ी चोटों और मौतों के लिए मुआवजा देने के लिए एक खास संस्थागत सिस्टम की कमी भारत के ग्रामीण सामाजिक सुरक्षा ढांचे में एक बड़ी कमी है. यह बिल नेशनल एग्रीकल्चरल रिस्क इंश्योरेंस अथॉरिटी (NARIA) बनाकर इस कमी को दूर करने की कोशिश करता है, जो एक कानूनी, ऑटोनोमस संस्था होगी जिसे किसानों और खेतिहर मजदूरों के लिए एक किफायती और अनिवार्य दुर्घटना बीमा योजना को डिजाइन करने, लागू करने और उसकी देखरेख करने का काम सौंपा जाएगा.”

प्राइवेट मेंबर बिल में मुआवजे का प्रावधान

बीजेपी नेता ने कहा कि बिल में मौत होने पर 25 लाख रुपये, स्थायी विकलांगता के लिए 10 लाख रुपये और आंशिक विकलांगता के लिए 1 लाख से 2 लाख रुपये तक का मुआवजा प्रभावित व्यक्ति या उसके नॉमिनी परिवार के सदस्य को देने का प्रस्ताव है. उन्होंने कहा, “यह बिल सभी रजिस्टर्ड खेतिहर मजदूरों और किसानों के लिए यूनिवर्सल कवरेज अनिवार्य करता है, जिसमें प्रीमियम केंद्र (60%) और राज्य सरकारों (40%) द्वारा मिलकर सब्सिडी दी जाएगी.”

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