बीज और किसान का 100 साल पुराना रिश्ताहैदराबाद में Pioneer की 100वीं वर्षगांठ मनाई गई. इस मौके पर Corteva ने किसानों, कर्मचारियों, चैनल पार्टनर्स और ग्राहकों के साथ मिलकर बीज नवाचार (Seed Innovation) की एक सदी पूरी होने का जश्न मनाया. भारत में Pioneer पिछले 54 वर्षों से किसानों के साथ जुड़ा है और मक्का, धान, सरसों और बाजरा जैसी फसलों के लिए स्थानीय जरूरतों के अनुसार हाइब्रिड बीज विकसित कर रहा है.
Corteva ने हैदराबाद में अपने प्रमुख बीज ब्रांड Pioneer की 100वीं वर्षगांठ मनाई. यह कार्यक्रम सिर्फ एक कंपनी की उपलब्धि का जश्न नहीं था, बल्कि उन किसानों, कर्मचारियों और सहयोगियों को सम्मान देने का मौका भी था, जिन्होंने लंबे समय से Pioneer के साथ मिलकर कृषि क्षेत्र को आगे बढ़ाने में योगदान दिया है.
Pioneer की शुरुआत साल 1926 में Henry A. Wallace ने की थी. कंपनी ने हाइब्रिड मक्का बीज को किसानों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. इससे खेती में बीज की गुणवत्ता और पैदावार को बेहतर करने की दिशा में एक नई शुरुआत हुई. धीरे-धीरे Pioneer ने कई देशों में किसानों के साथ काम किया और आज यह ब्रांड 90 से ज्यादा देशों में किसानों तक पहुंच चुका है.
भारत में Pioneer का सफर साल 1972 में शुरू हुआ था. तब से कंपनी लगातार भारतीय किसानों के साथ काम कर रही है. पिछले 54 वर्षों में Pioneer ने देश के अलग-अलग हिस्सों की जलवायु, मिट्टी और खेती की जरूरतों को समझते हुए बीज विकसित करने पर ध्यान दिया है. कंपनी मक्का, धान, सरसों और बाजरा जैसी प्रमुख फसलों के लिए हाइब्रिड बीज समाधान उपलब्ध करा रही है. इसका उद्देश्य ऐसे बीज तैयार करना है, जो किसानों की स्थानीय परिस्थितियों के हिसाब से बेहतर प्रदर्शन कर सकें.
Pioneer का कहना है कि भारत उसके लिए सिर्फ एक बड़ा कृषि बाजार नहीं है, बल्कि उसके वैश्विक शोध और नवाचार नेटवर्क का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है. भारत में होने वाला शोध और बीज विकास स्थानीय किसानों की जरूरतों के साथ-साथ कृषि क्षेत्र में आने वाली नई चुनौतियों को ध्यान में रखकर किया जाता है.
हैदराबाद में आयोजित कार्यक्रम में उन किसानों को भी सम्मान दिया गया, जिन्होंने लंबे समय से Pioneer के बीजों का इस्तेमाल किया है. इसके साथ ही कंपनी के कर्मचारियों और चैनल पार्टनर्स के योगदान को भी याद किया गया. चैनल पार्टनर्स ने देश के अलग-अलग हिस्सों में किसानों तक Pioneer के उत्पाद पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. कार्यक्रम में महाराष्ट्र के संभाजीनगर के मक्का किसान योगेश रामकृष्ण ने अपने अनुभव साझा किए. उन्होंने बताया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से Pioneer के साथ जुड़े हुए हैं. उनके मुताबिक, कंपनी ने उन्हें खेती के बेहतर तरीकों को सीखने और अपनाने में मदद की है.
योगेश रामकृष्ण ने बताया कि Pioneer के सहयोग, बेहतर खेती के तरीकों और नई तकनीकों को अपनाने से उनके क्षेत्र में मक्का की पैदावार में काफी बदलाव आया है. उनके अनुसार, पहले जहां किसानों को करीब 15 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन मिलता था, वहीं अब कुछ किसानों को 50 क्विंटल तक पैदावार मिल रही है. उन्होंने कहा कि Pioneer ने न सिर्फ बीज उपलब्ध कराने में मदद की, बल्कि किसानों को खेती से जुड़ी बेहतर जानकारी और समय पर सहयोग भी दिया. उनके अनुसार, इससे उनके क्षेत्र के कई किसानों को अपनी खेती को अधिक लाभदायक बनाने में मदद मिली है.
कार्यक्रम में Corteva के APAC और Strategic Initiatives के प्रमुख Robert Kaan ने कहा कि Pioneer की 100वीं वर्षगांठ भरोसे, नए प्रयोग और लंबे समय से चले आ रहे किसान संबंधों का उत्सव है. उन्होंने कहा कि भारत में Pioneer का सफर किसानों, कर्मचारियों और चैनल पार्टनर्स के साथ मिलकर बना है. उन्होंने आगे कहा कि आने वाले समय में कंपनी ऐसे बीज समाधान विकसित करने पर ध्यान देगी, जो स्थानीय जरूरतों के अनुसार हों, विज्ञान पर आधारित हों और किसानों को केंद्र में रखकर तैयार किए जाएं.
आज खेती के सामने मौसम में बदलाव, पानी की कमी, मिट्टी की गुणवत्ता और बढ़ती उत्पादन लागत जैसी कई चुनौतियां हैं. ऐसे में किसानों के लिए बेहतर बीज और नई कृषि तकनीकों की जरूरत लगातार बढ़ रही है. Pioneer आने वाले वर्षों में इन चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए बीजों और खेती से जुड़ी तकनीकों को विकसित करने पर काम करने की बात कह रहा है. कंपनी का मानना है कि खेती में असली बदलाव तभी संभव है, जब नई तकनीक और वैज्ञानिक शोध का फायदा सीधे किसानों तक पहुंचे. इसी सोच के साथ Pioneer अपने अगले 100 वर्षों की ओर बढ़ रहा है.
Pioneer के 100 साल पूरे होना बीज उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव है. भारत में भी कंपनी ने पिछले पांच दशकों से ज्यादा समय में किसानों के साथ एक लंबा रिश्ता बनाया है. अब कंपनी इस रिश्ते को और मजबूत करते हुए किसान-केंद्रित नवाचार, स्थानीय जरूरतों के मुताबिक बीज और वैज्ञानिक शोध पर अपना ध्यान बनाए रखना चाहती है. Pioneer का यह सफर बताता है कि कृषि में बदलाव सिर्फ नई तकनीक से नहीं, बल्कि किसान, बीज और सही जानकारी के बीच मजबूत साझेदारी से भी आता है. कंपनी अब अपने अगले 100 वर्षों में इसी साझेदारी को आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है.
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