ओडिशा सरकार ने धान मिलों के लिए खोला खजाना, मिलिंग शुल्क में किया इतना इजाफा

ओडिशा सरकार ने धान मिलों के लिए खोला खजाना, मिलिंग शुल्क में किया इतना इजाफा

एक अधिकारी ने बताया कि ओडिशा सरकार ने किसानों से धान की खरीद को आसान बनाने और मिल मालिकों (मिलर्स) की मदद करने के लिए चावल की मिलिंग का शुल्क दोगुना कर दिया है. मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने शुक्रवार को इस प्रस्ताव को मंजूरी दी.

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ओडिशा सरकार ने धान मिलों के लिए खोला खजाना, मिलिंग शुल्क में किया इतना इजाफाधान मिलों के लिए बड़ा फैसला

ओडिशा सरकार ने किसानों से धान खरीद की प्रक्रिया को आसान बनाने और चावल मिल मालिकों को राहत देने के लिए बड़ा फैसला लिया है. मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने राज्य में चावल की मिलिंग (पिसाई) के शुल्क को दोगुना करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. सरकार का मानना है कि इस कदम से धान की प्रोसेसिंग व्यवस्था मजबूत होगी और किसानों के साथ-साथ मिल उद्योग को भी फायदा मिलेगा.

दोगुना किया गया मिलिंग शुल्क

मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) की ओर से जारी एक बयान के अनुसार, पारबॉइल्ड (उशना) चावल के लिए मिलिंग शुल्क 20 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 40 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है. वहीं, कच्चे (अरुआ) चावल की पिसाई का शुल्क 10 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 20 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है. नई दरें तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई हैं.

फैसले से मिल मालिकों को आर्थिक राहत

अधिकारियों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में मजदूरी, ईंधन और मिल संचालन से जुड़ी अन्य लागतों में लगातार वृद्धि हुई है. इसके कारण चावल मिल मालिक लंबे समय से मिलिंग शुल्क बढ़ाने की मांग कर रहे थे. सरकार के इस फैसले से मिल मालिकों को आर्थिक राहत मिलेगी और वे आसानी के साथ धान की प्रोसेसिंग कर सकेंगे.राज्य में इस समय धान खरीद का सीजन चल रहा है. ऐसे में सरकार को उम्मीद है कि बढ़े हुए मिलिंग शुल्क से मिल मालिकों को पर्याप्त प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे धान की खरीद और उसके प्रोसेसिंग की प्रक्रिया में तेजी आएगी. इससे किसानों से खरीदे गए धान को समय पर चावल में बदलने और भंडारण की व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी.

एग्रीकल्चर वैल्यू चैन को मिलेगा लाभ

अधिकारियों के अनुसार, यह फैसला केवल मिल मालिकों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका लाभ पूरी एग्रीकल्चर वैल्यू चैन को मिलेगा. धान और चावल के स्टॉक का बेहतर प्रबंधन होने से खरीद, भंडारण और वितरण की प्रक्रिया अधिक सुचारू होगी. इससे खाद्य आपूर्ति व्यवस्था भी मजबूत होगी.

धान प्रोसेसिंग क्षेत्र को मिलेगी नई गति

सरकार का मानना है कि बदले हुए मिलिंग शुल्क से चावल मिलों की आर्थिक व्यवहार्यता बढ़ेगी और उद्योग में निवेश और दक्षता को बढ़ावा मिलेगा. साथ ही यह कदम ओडिशा के धान प्रोसेसिंग क्षेत्र को नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. एक्सपर्ट का भी मानना है कि यदि मिलिंग उद्योग मजबूत होगा तो किसानों से धान खरीद की प्रक्रिया और अधिक प्रभावी बनेगी. इससे किसानों को भी समय पर लाभ मिलेगा और राज्य का कृषि और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र और अधिक मजबूत हो सकेगा. (PTI)

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