किसान को मुआवजा देने का आदेशअदालती आदेश की अनदेखी महाराष्ट्र सरकार को भारी पड़ती दिख रही है. औरंगाबाद की सिविल कोर्ट (सीनियर डिवीजन) ने 2.22 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का भुगतान न होने पर सरकार की चल संपत्ति कुर्क करने का वारंट जारी किया है. इस आदेश के तहत कलेक्टर कार्यालय से जुड़े सरकारी वाहन और फर्नीचर जब्त किए जा सकते हैं. पूरा मामला एक सिंचाई प्रोजेक्ट से जुड़ा है जिसके लिए जमीन अधिग्रहित किए गए किसानों को अतिरिक्त मुआवजा देने में देरी के कारण कोर्ट ने कलेक्टर की कुर्सी जब्त करने का आदेश दिया.
यह मामला वर्ष 2006 के भूमि अधिग्रहण से जुड़े एक दीवानी मुकदमे (LAR/151/06) से संबंधित है. अदालत ने 6 अगस्त 2022 को ही डिक्री पारित करते हुए डिक्रीधारक बजरंग हरिचंद टाटू को 2,22,61,019 रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया था. बावजूद इसके, लंबे समय तक भुगतान नहीं किया गया, जिसके बाद अदालत को सख्त कदम उठाना पड़ा.
एक अधिकारी ने बताया कि छत्रपति संभाजीनगर में सिविल जज (सीनियर डिवीजन) ने जिला प्रशासन को किसानों को 2.22 करोड़ रुपये का अतिरिक्त मुआवजा देने का आदेश दिया था. हालांकि, प्रशासन के आदेश का पालन करने में नाकाम रहने पर, कोर्ट ने मंगलवार को जिला कलेक्टर की कुर्सी जब्त करने का आदेश दिया.
याचिकाकर्ताओं के वकीलों और एक कोर्ट अधिकारी के कलेक्टर ऑफिस पहुंचने के बाद, प्रशासन ने आठ हफ्तों के अंदर किसानों को 2.22 करोड़ रुपये देने का लिखित आश्वासन दिया.
अदालत की ओर से जारी ‘वॉरंट ऑफ अटैचमेंट’ के अनुसार, यदि सरकार ने तत्काल राशि जमा नहीं की तो छत्रपति संभाजीनगर कलेक्टर कार्यालय की गाड़ियां और कार्यालयीन फर्नीचर कुर्क किया जा सकता है. कोर्ट ने बेलिफ को निर्देश दिए हैं कि 21 जनवरी 2026 तक वारंट की तामील सुनिश्चित की जाए. साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी हाई कोर्ट से स्थगन आदेश नहीं मिलता है, तो कुर्की की कार्रवाई बिना देरी के की जाए.
इस मामले में लघु सिंचाई विभाग ने अदालत में आश्वासन दिया है कि किसानों को बढ़ा हुआ मुआवजा आठ सप्ताह के भीतर अदा कर दिया जाएगा. विभाग के कार्यकारी अभियंता ने इस अवधि के दौरान सरकारी संपत्तियों की जब्ती पर रोक लगाने की अपील की है.(इसरार चिस्ती का इनपुट)
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