किसानों ने सीखी आधुनिक खेती की नई बातेंबुंदेलखंड के हृदय में धड़कते हुए प्रकृति और इतिहास का अनुपम संगम समेटे ललितपुर जिले में ‘किसान तक’ का किसान कारवां अपने 23वें पड़ाव के तौर पर जखौरा ब्लॉक के पिपरा गांव पहुंचा. बेतवा, धसान और जमनी जैसी पावन नदियों और कई बांधों की गोद में बसा यह जिला कृषि में अपनी आत्मनिर्भरता को दर्शा रहा है. राज्य के 75 जिलों में इंडिया टुडे ग्रुप और उत्तर प्रदेश सरकार के संयुक्त प्रयास से आयोजित हो रहा किसान कारवां जब पिपरा गांव पहुंचा, तो काफी संख्या में महिला और पुरुष किसानों के साथ युवाओं की मौजूदगी रही.
ललितपुर जिले के पिपरा गांव में आयोजित किसान कारवां कार्यक्रम के दौरान कृषि वैज्ञानिकों ने जहां किसानों को खेती से जुड़ी कई अहम और नई जानकारियां दीं, वहीं अधिकारियों ने सरकार द्वारा चलाई जा रही खेती और पशुपालन से जुड़ी योजनाओं के बारे में अवगत कराया. साथ ही मैजिशियन ने अपने जादू के जरिए मौजूद लोगों का मनोरंजन करने के साथ खेती के प्रति लोगों को जागरूक किया. विभिन्न चरणों के माध्यम से मौजूद अतिथियों द्वारा किसानों को उनके हित से जुड़ी जानकारियां दी गईं.
पहले चरण में कृषि विभाग के एडीओ जखौरा के तरुण जामर ने डिजिटल क्रॉप के बारे में जानकारी दी. इसके साथ ही उन्होंने फॉर्मर रजिस्ट्री के बारे में बताया और कहा कि जो किसान फॉर्मर आईडी बनाएगा, उसी को आने वाले समय में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की राशि मिलेगी. उन्होंने किसानों को कृषि यंत्र का लाभ लेने की जानकारी दी और बताया कि कृषि यंत्र का लाभ पहले आओ, पहले पाओ के तहत दिया जाता है. इसके लिए टोकन लेना जरूरी होता है.
दूसरे चरण में पशुपालन विभाग ललितपुर सदर के डिप्टी सीवीओ डॉ. संदीप कुमार ने किसानों को बकरी पालन से जुड़ी योजनाओं के बारे में बताते हुए कहा कि इसको लेकर सरकार की ओर से अनुसूचित वर्ग और सामान्य वर्ग के लिए सुविधा दी जाती है, जिसमें 90 फीसदी तक अनुदान दिया जाता है. साथ ही उन्होंने मुर्गी पालन की योजनाओं की जानकारी देते हुए बैकयार्ड मुर्गी पालन से जुड़ी जानकारी दी और कहा कि इसके तहत किसानों को पचास चूजे दिए जाते हैं. वहीं उन्होंने किसानों द्वारा थनैला रोग के बारे में पूछे गए सवालों का जवाब दिया और उसके विभिन्न चरणों में उपचार की जानकारी दी. वहीं दूध व्यवसाय के लिए गाय पालन को लेकर नंदनी कृषक समृद्धि योजना के तहत मिलने वाले सरकारी अनुदान की जानकारी दी. प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र योजना की तर्ज पर अब पशु औषधि केंद्र की स्थापना प्रत्येक ब्लॉक स्तर एवं जिला स्तर पर की जाएगी.
तीसरे चरण में केवीके हेड ललितपुर डॉ. मुकेश चंद अग्रवाल ने अच्छे बीज के जरिए खेती करने की जानकारी दी. वहीं उन्होंने ललितपुर जिले में गेहूं की खेती नहीं करने का सुझाव देते हुए कहा कि जिले में दलहन की खेती के साथ बागवानी की खेती करने का सुझाव दिया. उन्होंने कहा कि जिले में अमरूद, बेर, मौसमी, आंवला, नींबू, आम सहित अन्य फलदार फलों की बागवानी की जा सकती है. इसके साथ ही फसल विविधीकरण के तहत खेती करने की जानकारी देते हुए कहा कि एक फसल के साथ किसान अन्य फसलों की भी खेती करें. किसानों को खेती व्यापारियों की सोच के अनुसार करने की जरूरत है। तभी उनकी कमाई दोगुनी होगी.
चौथे चरण में जिला उद्यान निरीक्षक ललितपुर के रंजीत कुमार ने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना और एकीकृत बागवानी मिशन योजना से जुड़ी जानकारी दी. वहीं उन्होंने बताया कि इन सभी पर 65 से 75 प्रतिशत तक अनुदान का प्रावधान है. साथ ही उन्होंने ड्रिप और मिनी स्प्रिंकलर पर 80 से 90 प्रतिशत तक अनुदान सरकार द्वारा दिए जाने की जानकारी दी. बुंदेलखंड बिंद क्षेत्र योजना अंतर्गत बागवानी क्षेत्र में मिलने वाले अनुदान के बारे में भी बताया.
पांचवें चरण में केवीके ललितपुर के पशु वैज्ञानिक डॉ. अनुज कुमार गौतम ने केंचुआ खाद से होने वाली कमाई के बारे में बताया और कहा कि वर्मी कंपोस्ट खाद यूनिट लगाकर किसान अच्छी कमाई कर सकते हैं. इसके साथ ही उन्होंने बकरी की लीद से बनने वाली खाद और उसके सही उपयोग के बारे में जानकारी दी.
छठवें चरण में मैजिशियन सलमान द्वारा खेती से जुड़ी जानकारी अपनी कला के जरिए बताई गई.साथ ही उन्होंने किसानों को गोबर खाद और पशुपालन करने का सुझाव दिया.
सातवें चरण में लकी ड्रा का कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें 12 विजेताओं को पांच सौ रुपए और 4 किसानों को एक हजार रुपए दिए गए.
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