
कन्नौज में किसान कारवां आयोजित किया गयाजहां के खेतों में परंपरागत फसलों के साथ फूल और आलू की खेती किसानों की समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करती है, और जिसका मुख्यालय इत्र की सुगंध से महकता है—ऐसी इत्र की राजधानी कहे जाने वाले कन्नौज जिले में ‘किसान तक’ का किसान कारवां पहुंचा. उत्तर प्रदेश सरकार और इंडिया टुडे ग्रुप की संयुक्त पहल से राज्य के 75 जिलों में चल रही इस विशेष कवरेज के तहत कारवां का 29वां पड़ाव नजरापुर पट्टी गांव में रहा. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लेकर आधुनिक खेती से जुड़ी जानकारियां हासिल कीं. इस मौके पर कृषि विभाग, पशुपालन विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों, स्वयं सहायता समूहों और प्रगतिशील किसानों ने सक्रिय भागीदारी निभाई.
परंपरागत खेती के साथ-साथ फूल, आलू और मक्का की खेती के लिए मशहूर जिले में जब ‘किसान तक’ का किसान कारवां पहुंचा तो गांव के किसानों के चेहरों पर अलग ही उत्साह देखने को मिला. कार्यक्रम के दौरान किसानों ने अपनी समस्याएं अधिकारियों के सामने रखीं, जिनका समाधान विभागीय अधिकारियों ने विभिन्न चरणों में किया. साथ ही इफको और चंबल फर्टिलाइजर ने अपने कृषि उत्पादों की जानकारी दी. वहीं टायर निर्माण क्षेत्र की अग्रणी कंपनी जेके टायर ने भी अपने उत्पादों के बारे में विस्तार से बताया. कार्यक्रम के दौरान अतिथियों और प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया गया. लकी ड्रा के माध्यम से 12 किसानों को नकद पुरस्कार भी प्रदान किए गए.
पहले चरण में कन्नौज जिले के कृषि विभाग के डीडीए संतोष यादव ने कहा कि कन्नौज जिले की मिट्टी से कार्बन की मात्रा नाम मात्र की बची है. इस जिले के लोगों को सबसे पहले तो अपने खेतों की कार्बन की मात्रा बढ़ाने की जरूरत है. 0.2 से 0.3 प्रतिशत ही कार्बन की मात्रा जमीन में बची है और यह तब हुआ है जब किसान अंधाधुंध रासायनिक उर्वरकों का खेतों में छिड़काव किए हैं. वहीं उन्होंने मिट्टी की ऑर्गेनिक कार्बन बढ़ाने के लिए किसानों को जागरूक किया और साथ ही इससे जुड़े समस्याएं और फायदे के बारे में भी बताया. उन्होंने बताया कि ऑर्गेनिक कार्बन की मात्रा बढ़ाने के लिए फसलों के अवशेष, पेड़ों की पत्तियों का उपयोग अधिक से अधिक हो तो इसकी मात्रा को बढ़ाया जा सकता है.
दूसरे चरण में जिला मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ शादुल सिंह ने किसानों को नंद बाबा दुग्ध मिशन के अंतर्गत 'मिनी नन्दिनी कृषक समृद्धि योजना' सहित विभिन्न योजनाओं के बारे में बताया.
तीसरे चरण में चंबल फर्टिलाइजर के प्रतिनिधि केशव बंसल ने उत्तम प्रणाम और उत्तम सुपरराइजा उत्पादों को लेकर बताया कि कैसे यह किसानों के लिए ये दोनों बायो प्रोडक्ट उनकी आमदनी को बढ़ाने में मददगार साबित हो सकता है. इन दोनों उत्पादकों के उपयोग से खेतों की जो उर्वरा शक्ति है वह भी बरकरार रहती है. उसमें किसी तरह का नुकसान नहीं होता है.

चौथे चरण में इफको प्रतिनिधि मानवेंद्र सिंह ने बताया कि नैनो डीएपी और नैनो यूरिया को लाने का मकसद कंपनी की क्या थी. उन्होंने कहा कि नैनो डीएपी और नैनो यूरिया का उपयोग करने पर फसल को करीब इसका फायदा 80 से 90 फ़ीसदी तक होता है जबकि दानेदार खादों के प्रयोग करने से फसलों को फायदा बहुत कम होता है. इसलिए आज समय की मांग है कि नैनो फॉर्म से जुड़े हुए उत्पादों का किसान अपने खेती में फसलों के लिए प्रयोग करें.
पांचवें चरण में जेके टायर प्रतिनिधि शरद मिश्रा और मोहित सचान ने बताया कि कृषि सहित ट्रैक्टरों के लिए कंपनी द्वारा श्रेष्ठ प्लस टायर उपलब्ध है. उन्होंने श्रेष्ठ प्लस टायर की खासियत के बारे में बताते हुए कहा कि अगर टायर में किसी तरह की कुछ दिक्कत आती है तो 7 साल तक कंपनी द्वारा टायर में किसी तरह गड़बड़ी पर उन्हें रिप्लेसमेंट की सुविधाएं दी जाती है. वही कंपनी द्वारा टायर का रिप्लेसमेंट 10 से 15 मिनट के भीतर किया जाता है.
छठवें चरण में कृषि विज्ञान केंद्र कन्नौज के वैज्ञानिक डॉ सुशील कुमार ने मेड़ पर मक्के की बुवाई के फायदे को लेकर किसानों को जागरूक किया. उन्होंने कहा कि पहले मक्के में निराई गुड़ाई की जाती थी. वह अब किसानों ने बंद कर दिया है. मक्के के फसल में निराई गुड़ाई की प्रक्रिया को करने की जरूरत है क्योंकि वायु संचार की जो प्रक्रिया है वह काफी आसानी से हो जाती है. उन्होंने बताया कि वायु संचार से फसलों की जड़ काफी मजबूत होती है.
सातवें चरण में कृषि विज्ञान केंद्र कन्नौज के कृषि वैज्ञानिक डॉ एके तिवारी ने बताया कि किसान कारवां के जरिए किसानों के बीच जागरूकता फैल रही है और खेती में क्या कुछ नया किसान कर सकते हैं, इसको लेकर भी जानकारियां दी जा रही है. वहीं उन्होंने फसलों के विभिन्न चरणों में आने वाले रोगों और उसके उपचार के बारे में भी किसानों को विस्तृत जानकारी दी. साथ ही उन्होंने कहा कि केवल खाद के प्रयोग से ही मिट्टी की उर्वरा शक्ति नहीं खत्म हो रही है बल्कि अंधाधुंध दवाओं के प्रयोग से भी फसलों पर काफी नुकसान पहुंच रहा है.
आठवें चरण में मैजिशियन सलमान द्वारा खेती से जुड़ी जानकारी अपनी कला के जरिए बताई गई. साथ ही उन्होंने किसानों को गोबर खाद और पशुपालन करने का सुझाव दिया.
आखिर में नौवें चरण में लकी ड्रॉ का कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें 10 विजेताओं को 500 रुपये और दूसरा पुरस्कार 2000 रुपये राजू को मिला. वहीं प्रथम पुरस्कार में किसान योगेंद्र सिंह को 3000 रुपये दिए गए. आज कन्नौज की पहचान केवल इत्र तक सीमित नहीं, बल्कि फूलों, आलू, मक्का और पशुपालन आधारित विविधीकृत खेती के मॉडल के रूप में भी उभर रही है. ‘किसान तक’ का यह कारवां किसानों को आधुनिक तकनीक, बाजार से जुड़ाव और आय बढ़ाने के उपायों से जोड़ने का मंच प्रदान कर रहा है.
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