जीरा निर्यात को झटकाभारत के मसाला बाजार में अहम स्थान रखने वाले जीरे के निर्यात पर इस साल दबाव देखने को मिला है. दुनिया के सबसे बड़े खरीदारों में शामिल चीन की ओर से खरीदारी में भारी कमी आने के कारण वित्त वर्ष 2025-26 में भारत के जीरा निर्यात में गिरावट दर्ज की गई है. निर्यात की मात्रा और मूल्य दोनों में कमी आई है, जिससे किसानों और व्यापारियों की चिंता बढ़ गई है. आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का जीरा निर्यात घटकर 1.96 लाख टन रह गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में यह 2.29 लाख टन था. यानी निर्यात मात्रा में करीब 14 फीसदी की गिरावट आई है. वहीं, रुपये के लिहाज से भी जीरा निर्यात में करीब 25 फीसदी की कमी आई और यह 6178.86 करोड़ रुपये से घटकर 4611.15 करोड़ रुपये रह गया.
भारत के जीरे का सबसे बड़ा खरीदार चीन रहा है, लेकिन इस साल चीन की मांग में भारी गिरावट देखने को मिली. चीन को होने वाला जीरा निर्यात मात्रा के हिसाब से करीब 76 फीसदी घटकर 9,271 टन रह गया, जबकि पिछले साल यह 38,721 टन था. मूल्य के लिहाज से भी चीन को निर्यात करीब 80 फीसदी गिरकर 22.81 मिलियन डॉलर रह गया. मसाला कारोबार से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले साल चीन में जीरे की घरेलू पैदावार काफी अच्छी रही थी. वहां करीब 85-90 हजार टन की अच्छी फसल होने के कारण चीन ने भारत से खरीदारी कम कर दी है.
जीरा निर्यात पर सिर्फ चीन की कम मांग ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का भी असर पड़ा है. ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच तनाव के कारण पश्चिम एशिया और उत्तरी अफ्रीका (MENA) क्षेत्र में निर्यात प्रभावित हुआ. अमेरिका, UAE और बांग्लादेश जैसे बड़े बाजारों में भी भारतीय जीरे की खरीद कम हुई है. अमेरिका को निर्यात घटकर 15,458 टन रह गया, जबकि UAE और बांग्लादेश को भी शिपमेंट में गिरावट दर्ज की गई.
हालांकि, तुर्की भारतीय जीरे के लिए एक बड़ा बाजार बनकर उभरा है. तुर्की को जीरे का निर्यात पांच गुना से ज्यादा बढ़कर 7,529 टन पहुंच गया है. विशेषज्ञों के अनुसार, तुर्की में जीरे की खेती से जुड़ी समस्याओं और सीरिया में कमजोर फसल के कारण वहां भारत से खरीद बढ़ी है.
व्यापार जगत का मानना है कि इस साल चीन और सीरिया में जीरे की बेहतर पैदावार होने की संभावना है. इससे भारतीय जीरे को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है. गुजरात की करीब 60 फीसदी और राजस्थान की 45 फीसदी फसल बाजार में आ चुकी है. अगर आने वाले समय में निर्यात की रफ्तार नहीं बढ़ी तो किसानों को नुकसान उठाना पड़ सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार कमजोर मांग की स्थिति में किसान दूसरी फसलों की ओर रुख कर सकते हैं और बाजार में जीरे का स्टॉक बढ़ सकता है. भारत दुनिया के प्रमुख जीरा उत्पादक देशों में शामिल है, ऐसे में निर्यात में आई यह गिरावट किसानों और मसाला उद्योग दोनों के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है.
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