तंबाकू उत्पादों पर भारी टैक्स का विरोधकेंद्र सरकार की ओर से तंबाकू उत्पादों पर एक्साइज ड्यूटी में की गई तेज बढ़ोतरी को लेकर किसानों और उनसे जुड़े संगठनों में नाराजगी बढ़ती जा रही है. ऑल इंडिया फार्मर एसोसिएशंस फेडरेशन (FAIFA) ने इस फैसले का खुलकर विरोध किया है और कहा है कि इसका सीधा नुकसान तंबाकू उगाने वाले किसानों को झेलना पड़ेगा. FAIFA ने कहा है कि वित्त मंत्रालय ने चबाने वाले तम्बाकू (Chewing Tobacco), सुगंधित जर्दा तंबाकू (Jarda Scented Tobacco) और गुटखा पैकिंग मशीनों से जुड़े नए नियम लागू कर दिए हैं, जिनके तहत 1 फरवरी 2026 से सिगरेट की लंबाई के आधार पर प्रति 1,000 स्टिक पर 2,050 रुपये से लेकर 8,500 रुपये तक एक्साइज ड्यूटी वसूली जाएगी.
फेडरेशन का दावा है कि इतनी भारी टैक्स बढ़ोतरी से तैयार तंबाकू उत्पाद महंगे हो जाएंगे, जिससे उनकी बिक्री घटेगी. जब बिक्री गिरेगी तो उद्योग तंबाकू की खरीद कम करेगा और इसका असर सीधे किसानों की आय पर पड़ेगा. फेडरेशन ने आशंका जताई है कि निकट भविष्य में तंबाकू फसल का बाजार ठप पड़ सकता है. मांग कम होने से किसानों के पास उपज का स्टॉक जमा हो जाएगा और कीमतों पर दबाव बढ़ेगा.
FAIFA ने कहा है कि सरकार पहले ही यह कह चुकी थी कि कंपनसेशन सेस से नए टैक्स सिस्टम में बदलाव राजस्व-न्यूट्रल होगा यानी कुल टैक्स बोझ नहीं बढ़ेगा. लेकिन, मौजूदा फैसले से यह भरोसा टूटता दिख रहा है. FAIFA ने खास तौर पर फ्ल्यू क्योरड वर्जीनिया (FCV) तंबाकू उगाने वाले किसानों के साथ भेदभाव का आरोप लगाया है. यह तंबाकू मुख्य रूप से आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में उगाया जाता है.
संगठन के मुताबिक, सिगरेट में इस्तेमाल होने वाले FCV तंबाकू पर प्रति किलो टैक्स का बोझ बीड़ी और चबाने वाले तंबाकू की तुलना में कई गुना ज्यादा है. संगठन का दावा है कि प्रति खुराक FCV तंबाकू पर छह रुपये से ज्यादा टैक्स लगता है, जबकि बीड़ी और चबाने वाले तंबाकू पर यह टैक्स एक पैसे से भी कम है.
FAIFA के अध्यक्ष मुरली बाबू ने कहा कि नई एक्साइज ड्यूटी इस असमानता को और गहरा कर देगी. इसका असर सिर्फ किसानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी तंबाकू इकोनॉमी असंतुलित हो जाएगी. उन्होंने याद दिलाया कि 4 सितंबर 2025 को GST 2.0 की घोषणा के समय सरकार ने भरोसा दिया था कि तंबाकू उत्पादों पर कुल टैक्स भार नहीं बढ़ेगा और GST रेट 40 प्रतिशत रिटेल प्राइस तक सीमित रहेगा.
उन्होंने कहा कि किसानों ने सरकार के इस आश्वासन पर भरोसा किया और GST ढांचे में बदलाव का स्वागत किया था, क्योंकि इससे कीमतों में स्थिरता आने की उम्मीद थी. लेकिन अब अचानक टैक्स बढ़ाकर किसानों की आजीविका को खतरे में डाल दिया गया है. इस बीच, तंबाकू इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (TII) ने भी सरकार के फैसले पर गहरी चिंता जताई है.
संस्थान ने कहा है कि एक्साइज ड्यूटी में यह अभूतपूर्व बढ़ोतरी किसानों के साथ-साथ MSME, खुदरा कारोबारियों और स्थानीय सप्लाई चेन के लिए भी भारी नुकसान लेकर आएगी. संगठन ने चेतावनी दी है कि अगर नीति पर दोबारा विचार नहीं किया गया तो इसके आर्थिक और सामाजिक असर लंबे समय तक दिख सकते हैं.
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