दुनिया भर में गेहूं का उत्पादन में गिरावट, लेकिन भारत का किसान करेगा रिकार्ड पैदावार और भरेगा भंडार

दुनिया भर में गेहूं का उत्पादन में गिरावट, लेकिन भारत का किसान करेगा रिकार्ड पैदावार और भरेगा भंडार

साल 2026 में वैश्विक स्तर पर गेहूं के उत्पादन में 3% की गिरावट आने की आशंका है. FAO की रिपोर्ट के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें कम होने की वजह से यूरोपीय संघ, रूस और अमेरिका जैसे बड़े देशों के किसानों ने गेहूं की बुआई कम कर दी है. हालांकि, भारत इस मामले में दुनिया से आगे निकल रहा है. सरकारी प्रोत्साहन, बेहतर किस्में और बेहतर एमएसपी के चलते भारत में इस साल 6.13 लाख हेक्टेयर अधिक क्षेत्र में गेहूं बोया गया है. जहां दुनिया में कमी की चिंता है, वहीं भारतीय किसानों की मेहनत और रिकॉर्ड बुआई से देश के अन्न भंडार भरने और खाद्य सुरक्षा मजबूत होने की पूरी उम्मीद है.

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दुनिया भर में गेहूं का उत्पादन में गिरावट, लेकिन भारत का किसान करेगा रिकार्ड पैदावार और भरेगा भंडारभारत में बंपर गेहूं उत्पादन की उम्मीद

साल 2026 दुनिया के लिए खाने-पीने की चीजों, खासकर गेहूं के मामले में थोड़ा मुश्किल भरा हो सकता है. संयुक्त राष्ट्र (FAO) के मुताबिक, इस साल दुनिया भर में गेहूं के उत्पादन में 3 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है, जिससे कुल पैदावार करीब 810 मिलियन टन रहने का अनुमान है. इस कमी की सबसे बड़ी वजह यह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में गेहूं की कीमतें कम हो गई हैं. मुनाफा कम होता देख रूस, अमेरिका और यूरोपीय देशों के किसानों ने गेहूं की बुआई कम कर दी है. हालांकि, इस वैश्विक मंदी के बीच भारत से बहुत अच्छी खबर आ रही है. अमेरिकी संस्था (USAID) का मानना है कि भारत में इस साल 118 मिलियन टन के आसपास गेहूं पैदा होगा, जबकि भारत के अपने अनुमान के मुताबिक यह 120 मिलियन टन के पार भी जा सकता है. यह न सिर्फ भारत की खाद्य सुरक्षा के लिए अच्छा है, बल्कि दुनिया के लिए भी एक बड़ी राहत साबित हो सकता है.

भारत दुनिया में गेहूं का तीसरा बड़ा पावर हाउस 

अमेरिकी संस्था यूएसएड के आंकड़ों पर नजर डालें तो साल 2026 में वैश्विक गेहूं उत्पादन के यूरोपीय संघ और चीन दोनों ही 17-17 प्रतिशत की बाजार हिस्सेदारी के साथ सबसे बड़े उत्पादक बने हुए हैं, जिनका अनुमानित उत्पादन क्रमशः 144 मिलियन टन और 140.07 मिलियन टन है. इसके बाद भारत 14 प्रतिशत हिस्सेदारी और 117.95 मिलियन टन उत्पादन के साथ तीसरे स्थान पर मजबूती से खड़ा रहेगा. अन्य प्रमुख देशों में रूस 11 प्रतिशत, 89.5 मिलियन टन,  अमेरिका 6 प्रतिशत, 54.01 मिलियन टन और कनाडा 5 प्रतिशत  39.96 मिलियन टन शामिल हैं. वहीं ऑस्ट्रेलिया 4 प्रतिशत, पाकिस्तान 3 प्रतिशत,  अर्जेंटीना 3 प्रतिशत और यूक्रेन 3 प्रतिशत के साथ वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में महत्वपूर्ण योगदान देंगे.

ग्लोबल मार्केट में गेहूं की टेंशन

एफएओ के अनुसार, दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में गेहूं की स्थिति भिन्न है. यूरोपीय संघ में कम कीमतों के कारण बुआई कम हुई है, हालांकि मौसम अनुकूल रहने से वहां पैदावार औसत के करीब रहेगी. रूस में किसान अब गेहूं के बजाय तिलहन उगाने की ओर झुक रहे हैं क्योंकि वहां उन्हें ज्यादा मुनाफा दिख रहा है. अमेरिका में भी कीमतों में नरमी के कारण बुआई क्षेत्र घटा है. दूसरी ओर, कनाडा में नरम गेहूं की बुआई बढ़ी है, लेकिन पिछले साल के रिकॉर्ड उत्पादन के मुकाबले इस साल वहां थोड़ी कमी आ सकती है. यूक्रेन में युद्ध के कारण उत्पादन अभी भी पुराने स्तरों से काफी नीचे है, लेकिन पिछले साल के मुकाबले स्थिति स्थिर बनी हुई है.

भारत में इस साल गेहूं की रिकॉर्ड बुआई  

वैश्विक मंदी के विपरीत, भारत में गेहूं की खेती अच्छी है. भारत सरकार द्वारा दिए गए प्रोत्साहन और न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि के कारण किसानों ने इस साल रिकॉर्ड बुआई की है. हालांकि उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में तापमान बढ़ने और सूखे जैसी स्थिति से फसल के विकास पर थोड़ा असर पड़ा है, लेकिन कुल मिलाकर भारत का उत्पादन पिछले साल के सर्वकालिक उच्च स्तर के बराबर रहने की उम्मीद है. भारत के अलावा पाकिस्तान में भी सिंचाई की अच्छी सुविधा के कारण फसल की स्थिति बेहतर है, और चीन में भी उत्पादन पिछले साल की तरह स्थिर रहने का अनुमान है.

इस साल 6 लाख हेक्टेयर का इजाफा

भारत में कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, रबी सीजन 2025-26 में गेहूं की खेती के क्षेत्र में जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है. देश में गेहूं के उत्पादन और बुआई के आंकड़ों के अनुसार, रबी सीजन 2024-25 में गेहूं की बुआई का कुल क्षेत्र 328.04 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया था. लेकिन सरकार द्वारा दिए गए प्रोत्साहन, गेहूं की जलवायु अनुकल किस्में और किसानों के बढ़ते उत्साह के कारण, चालू वर्ष 2025-26 में यह रकबा बढ़कर 334.17 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है. इसका सीधा मतलब यह है कि पिछले साल के मुकाबले इस साल गेहूं की खेती के क्षेत्र में 6.13 लाख हेक्टेयर की भारी बढ़ोतरी हुई है.

अमेरिकी संस्था यूएसएड के आंकड़ों के अनुसार, गेहूं उत्पादन लगभग 117.95 मिलियन टन है. इससे उपर 120 मिलियन टन भी हो सकता है. यह विस्तार न केवल भारत की घरेलू जरूरतों को पूरा करने में मदद करेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर गेहूं के उत्पादन में आ रही कमी के बीच भारत को एक मजबूत निर्यातक बनाएगा और देश की खाद्य सुरक्षा और मजबूत होगी.

अफ्रीका और ब्राजील में मक्के की बंपर पैदावार

एफएओ के अनुार, पश्चिमी एशिया की बात करें तो ईरान में खेती की लागत बढ़ने के कारण बुआई क्षेत्र कम हुआ है, जबकि तुर्की में पिछले साल के खराब मौसम के बाद इस साल पैदावार में सुधार की उम्मीद है. दुनिया के अन्य हिस्सों जैसे दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील में मक्के की अच्छी फसल होने का अनुमान है, जिससे गेहूं की वैश्विक कमी की कुछ हद तक भरपाई हो सकेगी. निष्कर्षतः, 2026 में जहां दुनिया के बड़े निर्यातक देश उत्पादन में कटौती कर रहे हैं, वहीं भारत अपनी रिकॉर्ड बुआई और सरकारी समर्थन के दम पर दुनिया के लिए एक उम्मीद की किरण बना हुआ है.

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