किसानों को डिजिटल पहचान देने का काम इन दिनों जोर-शोर से चल रहा है. यूपी के किसानों को डिजिटल पहचान देने का काम इन दिनों जोर-शोर से चल रहा है. इसी क्रम में योगी सरकार के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने राजधानी लखनऊ के विधान भवन स्थित अपने कार्यालय में किसान क्रेडिट कार्ड, डिजिटल क्रॉप सर्वे तथा फार्मर रजिस्ट्री के संबंध में समीक्षा बैठक बुलाई. इसके साथ ही उन्होंने धान बुआई की डीएसआर तकनीक को क्रियान्वित किये जाने के संबंध पर भी चर्चा की. किसान क्रेडिट कार्ड, डिजिटल क्रॉप सर्वे तथा फार्मर रजिस्ट्री के संबंध में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान उन्होंने कहा कि किसान रजिस्ट्री का कार्यक्रम चलाया जा रहा है. इसके अंतर्गत किसानों को किसान पहचान पत्र जारी किये जाएंगे. इसके लिए गांवों में कैंप लगाकर किसानों को जागरूक किया जाएगा.
कृषि मंत्री शाही ने आगे बताया कि यह रजिस्ट्री चार मोड में की जा सकेगी. पहला मोड वह स्वयं द्वारा, दूसरा मोड कामन सर्विस सेंटर द्वारा, तीसरा मोड सहायक द्वारा तथा चौथा मोड विभागीय कैम्प में शामिल होकर किसान स्वयं को रजिस्टर कर सकते हैं. उन्होंने बैंकों से आये प्रतिनिधियों को किसान क्रेडिट कार्ड बनाने में तेजी लाने के निर्देश दिये. उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि गांवों के नक्शों का मिलान ग्रामीणों के पास उपलब्ध नक्शों से करा लिया जाए. वहीं इस कार्यक्रम का संचालन राजस्व विभाग के साथ समन्वय कर किया जाए।
इस पहल के तहत सरकार हर किसान को डिजिटल आईडी मुहैया कराएगी. इसके तहत, आधार की तर्ज पर अब किसानों का बनेगा स्मार्ट कार्ड बनाया जा रहा है. वहीं, इस आईडी से किसान की पहचान की जा सकेगी. सरकारी योजनाओं का लाभ भी उन्हीं किसानों को मिल सकेगा, जिनके बारे में डाटा ऑनलाइन रजिस्ट्री में मौजूद होगा.
1. किसान रजिस्ट्री के कारण सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता आएगी.
2. किसान आईडी न होने पर किसान दिसंबर से पीएम किसान योजना का लाभ नहीं उठा सकेंगे.
3. किसानों को फसल बीमा लाभ आसानी से मिल सकेगा.
4. इस आईडी द्वारा किसान क्रेडिट कार्ड व कृषि ऋण जैसी सेवाओं का फायदा उठा पाएंगे.
5. सरकार द्वारा MSP पर खरीद के लिए होने वाला रजिस्ट्रेशन ऑनलाइन हो सकेगा.
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