डॉ. रामजी सिंह बने महात्मा बुद्ध कृषि विश्वविद्यालय कुशीनगर के पहले कुलपति

डॉ. रामजी सिंह बने महात्मा बुद्ध कृषि विश्वविद्यालय कुशीनगर के पहले कुलपति

पाल आनंदीबेन पटेल ने डॉ. रामजी सिंह को कुशीनगर के महात्मा बुद्ध कृषि विश्वविद्यालय का पहला कुलपति नियुक्त किया है. जिला मऊ यूपी के निवासी डॉ. सिंह का कार्यकाल अधिकतम तीन वर्ष होगा इससे पहले वे मेरठ कृषि विश्वविद्यालय में प्रोफेसर व डायरेक्टर रिसर्च थे। उनके पास कृषि शिक्षा और शोध का लंबा अनुभव है उनके कुलपति बनने से शिक्षा जगत और पूर्वांचल के किसानों में नई उम्मीद जगी है। माना जा रहा है कि उनके नेतृत्व में छात्रों को आधुनिक शिक्षा मिलेगी और किसानों की कृषि समस्याओं का वैज्ञानिक समाधान आसान होगा।

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डॉ. रामजी सिंह बने महात्मा बुद्ध कृषि विश्वविद्यालय कुशीनगर के पहले कुलपतिमहात्मा बुद्ध कृषि विश्वविद्यालय के प्रथम कुलपति

उत्तर प्रदेश के कृषि जगत और विशेषकर पूर्वांचल के विकास के लिए यह एक ऐतिहासिक क्षण है. उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने 16 अक्टूबर 2026 को आदेश जारी कर डॉ. रामजी सिंह को कुशीनगर स्थित नवनिर्मित 'महात्मा बुद्ध कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय' का प्रथम कुलपति नियुक्त किया है. इस नियुक्ति से पूर्व डॉ. सिंह सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, मेरठ में प्लांट पैथोलॉजी के प्रोफेसर व डायरेक्टर रिसर्च  के पद पर कार्यरत है. कुलाधिपति के आदेशानुसार, कुलपति के रूप में उनका यह कार्यकाल कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से अधिकतम तीन वर्ष का होगा  कृषिशिक्षा जगत के साथ-साथ पूर्वांचल के लाखों किसानों को भी इस विश्वविद्यालय और इसके नेतृत्व से बड़ी आशाएं हैं यह उम्मीद की जा रही है कि फसल संरक्षण, पौधों के स्वास्थ्य और टिकाऊ कृषि का गहरा ज्ञान रखने वाले डॉ. रामजी सिंह अपनी विशेषज्ञता का लाभ सीधे किसानों के खेतों तक पहुंचाएंगे

मऊ की माटी से कुलपति तक का सफर

डॉ. रामजी सिंह की सफलता की कहानी उत्तर प्रदेश में मऊ जिले के पतेहपुर गांव से शुरू होती है। मऊ जिले के मूल निवासी डॉ. सिंह ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा माध्यमिक शिक्षा  रानीपुर के पतेहपुर से ही प्राप्त की. उन्होंने अपनी शिक्षा की नींव जमीनी स्तर पर बिल्कुल कृषि से जुड़कर रखी. इसके बाद, उन्होंने कृषि स्नातक (B.Sc. Ag) की पढ़ाई आजमगढ़ स्थित चंडेश्वर महाविद्यालय से पूरी की. कृषि विज्ञान के प्रति उनकी इसी गहरी लगन ने उन्हें देश के प्रतिष्ठित गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय (पंतनगर) तक पहुंचाया। वहां से उन्होंने पौध रोग विज्ञान (Plant Pathology) में एमएससी की डिग्री हासिल की और इसी विषय में गहन शोध करते हुए अपनी पीएचडी भी सफलतापूर्वक पूरी की।

कृषि का तीन दशकों का गहरा अनुभव

डॉ. रामजी सिंह का अब तक का करियर सफलताओं, शोध कार्यों और विविध प्रशासनिक अनुभवों की एक शानदार मिसाल रहा है. अपने करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद (उपकार), लखनऊ में अपनी अमूल्य सेवाएं दीं. इसके बाद उन्होंने आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कुमारगंज में एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में अपना अकादमिक योगदान दिया. उनके पेशेवर जीवन का एक बड़ा हिस्सा मेरठ स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि विश्वविद्यालय में बीता, जहां उन्होंने प्रशिक्षण निदेशक, कुलसचिव और वर्तमान में अनुसंधान निदेशक जैसे चुनौतीपूर्ण पदों की जिम्मेदारी निभाई. प्लांट पैथोलॉजी के प्रोफेसर के रूप में उनका यह समृद्ध अनुभव नवस्थापित विश्वविद्यालय की जड़ों को सींचने में बेहद काम आएगा.

पूर्वाचल कृषि शिक्षा पर  जुड़ी नई उम्मीदें

महात्मा बुद्ध कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के प्रथम कुलपति के रूप में डॉ. रामजी सिंह की नियुक्ति से शिक्षा जगत में सकारात्मक आशा का संचार हुआ है. शिक्षाविदों को पूरी उम्मीद है कि उनके नेतृत्व में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) के अनुरूप इस नवस्थापित विश्वविद्यालय का अकादमिक ढांचा एक आदर्श रूप लेगा. यह आशा की जा रही है कि वे एक ऐसा छात्र-केंद्रित वातावरण तैयार करेंगे, जहाँ पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक का अद्भुत संगम होगा. विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के संचालन में उनसे एक ऐसे दूरदर्शी दृष्टिकोण की आशा है, जो संस्थागत रणनीति को ऊंचाइयों पर ले जाए। पूर्वांचल के युवाओं को भी बड़ी उम्मीद है कि कुशीनगर में उन्हें उत्कृष्टता का एक ऐसा केंद्र मिलेगा जो उनके सपनों को साकार करेगा.

पूर्वांचल के किसानों की उम्मीदें और कृषि नवाचार

शिक्षा जगत के साथ-साथ पूर्वांचल के लाखों किसानों को भी इस विश्वविद्यालय और इसके नेतृत्व से बड़ी आशाएं हैं. यह उम्मीद की जा रही है कि फसल संरक्षण, पौधों के स्वास्थ्य और टिकाऊ कृषि का गहरा ज्ञान रखने वाले डॉ. रामजी सिंह अपनी विशेषज्ञता का लाभ सीधे किसानों के खेतों तक पहुंचाएंगे. किसानों को आशा है कि अब उनके क्षेत्र में फसल रोगों का वैज्ञानिक समाधान आसानी से सुलभ हो सकेगा. इसके साथ ही, यह अपेक्षा की जा रही है कि उनके नेतृत्व में राष्ट्रीय अनुसंधान संस्थानों तथा कृषि उद्योगों के साथ दूरगामी साझेदारियां स्थापित होंगी. उद्योग और शिक्षा जगत के बीच तालमेल की जो उम्मीदें आकार ले रही हैं, वे क्षेत्रीय विकास को एक नई दिशा देंगी. कुशीनगर के लोगों को पूर्ण विश्वास है कि यह संस्थान कृषि नवाचार का जीवंत केंद्र बनेगा, जो क्षेत्र की आर्थिक तस्वीर बदलकर किसानों के सुनहरे भविष्य की आकांक्षाओं को पूरा करेगा.

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