ये मोटे अनाज हैं शरीर में मैंग्नशियम बढ़ाने के अच्छे स्त्रोत, फोटो साभार: Freepikहमारे शरीर में माइक्रो मिनरल्स पाए जाते हैं, उनमें से एक मैग्नीशियम है. यह शरीर के मेटाबोलिज्म और DNA निर्माण में मदद करता है. साथ ही यह खाने को ऊर्जा के रूप में बदलता है. यह दिल के लिए अच्छा होता है इसके साथ साथ यह शरीर के आंतरिक वृद्धि और विकास के लिए भी बहुत जरूरी होता है. ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करता है साथ ही माइग्रेन जैसी समस्या से भी बचाता है. अब तक तो आप जान चुके होंगे की यह मिनरल्स हमारे लिए कितना जरूरी होता है. अब हम आपको बताएंगे कि मैग्नीशियम की कमी से होने वाली प्रमुख समस्याएं कौन कौन सी हैं साथ ही उन मोटे अनाजों के बारे में जिनके सेवन से मैग्नीशियम की कमी को पूरा किया जा सकता है.
इसकी कमी से कई गंभीर हृदय रोग हो सकते हैं. मैग्नीशियम हड्डियों और दांतों की वृद्धि और विकास को प्रभावित कर सकते हैं. दिल की बीमारी, मांसपेशी संबंधी समस्याएं ऑस्टियोपोरोसिस, डिप्रेशन और कमजोर याददाश्त जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं. इन समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए शरीर में मैग्नीशियम का उचित मात्रा में होना जरूरी होता है. ऐसे ही कुछ millets के बारे में बताएंगे जो मैग्नीशियम की कमी को पूरा करने में मदद करेंगे.
शरीर में मैग्नीशियम का लेवल कम से कम 400 ग्राम होना जरूरी होता है. इससे कम होने पर ब्लड- प्रेशर बढ़ जाता है. तेज सिर दर्द और सांस फूलने की समस्याएं हो सकती हैं. इसलिए ये कुछ जरूरी मोटे अनाज हैं. जिनके सेवन से मैग्नीशियम को बढ़ाने में मदद मिलेगी.
| अनाज |
मैग्नीशियम की मात्रा (प्रति 1000 में) |
| चेना | 153 मिग्रा |
| रागी | 146 मिग्रा |
| ज्वार | 133 मिग्रा |
| गेहूं | 125 मिग्रा |
| बाजरा | 124 मिग्रा |
| कोदो | 122 मिग्रा |
| कुटकी | 91 मिग्रा |
| सवां | 83 ंमिग्रा |
| कंगनी | 81 मिग्रा |
| चावल | 19 मिग्रा |
दुनियाभर में वर्ष 2023 को इंटरनेशनल ईयर ऑफ मिलेट्स के तौर पर मनाया जा रहा है.इसका शुभारंभ 6 नवंबर 2022 को रोम और इटली से किया जा चुका है. यह आयोजन विश्व में मोटे अनाज की वैश्विक मांग बनाने के लिए किया जा रहा है. देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से अपने खाने में मोटे अनाज को शामिल करने की अपील की है, यह मोटा अनाज बढ़ती उम्र के बच्चों के शारीरिक व मानसिक विकास में सहायक होगा.
Copyright©2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today