
एवोकाडो की खेतीदेश के किसानों के बीच लगातार विदेशी फलों की खेती को देखते हुए कृषि क्षेत्र में कई नए काम किए जा रहे हैं. ऐसे में अब कृषि वैज्ञानिक भी खेती में अधिक कमाई वाली फसलों की नई किस्मों को तैयार कर रहे हैं, जो कम पानी, गर्मी पाला या अन्य चुनौतियों में भी अच्छा उत्पादन दे सकें. इसी दिशा में ICAR-भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान, बेंगलुरु ने एवोकाडो की एक नई और उन्नत किस्म को विकसित किया है. इस किस्म का नाम 'अर्का सुप्रीम' है. ये किस्म न सिर्फ उच्च उपज देने वाली है, बल्कि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को झेलने में भी सक्षम है. ऐसे में आइए जानते हैं इसकी खासियत क्या-क्या है.
ICAR द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, 'अर्का सुप्रीम' एवोकाडो समय पर बुवाई और सिंचित परिस्थितियों के लिए उपयुक्त किस्म है, जो कि बुवाई के करीब 4-5 साल में फल देना शुरू करती हैं. बात करें इस किस्म से होने वाली पैदावार की तो, किसान इस किस्म से प्रति पेड़ औसतन 370 से 400 किलो तक पैदावार ले सकते हैं. इसके साथ ही एवोकाडो की इस किस्म की फल 367-428 ग्राम के होते हैं. वहीं, इस किस्म के फल मीठा और स्वादिष्ट होते हैं.

एवोकाडो स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होने के साथ ही किसानों के लिए आय का एक अच्छा स्रोत बन रहा है. भारत में इसकी मांग बढ़ रही है, जिससे किसान इसकी खेती कर रहे हैं. एवोकाडो विटामिन, मिनरल और फाइबर से भरपूर है, जो स्वास्थ्य के लिए अच्छा है. एवोकाडो एक जादुई फल है जो विटामिन, मिनरल और फाइबर से भरपूर होता है. यह दिल की सेहत को बेहतर बनाता है, कोलेस्ट्रॉल कम करता है और वजन घटाने में मदद करता है. इसमें पाए जाने वाले मोनोसैचुरेटेड फैट्स से त्वचा को निखार मिलता है और इम्यूनिटी भी मजबूत होती है. भारत में एवोकाडो की खेती बढ़ती जा रही है और अब उत्तर भारत के किसान भी इसकी खेती की संभावनाओं को तलाश रहे हैं.
रिपोर्ट्स की मानें तो एवोकाडो की बढ़ती मांग के कारण इसकी कीमतें आसमान पर हैं. एक एवोकाडो की कीमत 150 से 200 रुपये तक हो सकती है. यह किसानों के लिए एक फायदेमंद फसल है क्योंकि इसकी खेती की लागत कम है और यह लंबे समय तक चलने वाली फसल है. सेहत के प्रति जागरूकता और फिटनेस ट्रेंड्स के कारण एवोकाडो का बाजार विस्तार हो रहा है.
एवोकाडो की खेती बीज से की जाती है, लेकिन इसके बीज सिर्फ 2-3 हफ्तों तक ही जीवित रहते हैं, इसलिए तुरंत बोना जरूरी होता है. यह एक लंबी चलने वाली फसल है, जो 4-5 साल में फल देना शुरू करती है. ज्यादा गर्मी इसके लिए अनुकूल नहीं होती है. वहीं, इसकी खेती के लिए जल निकासी अच्छी होनी चाहिए, क्योंकि जड़ें जलभराव सहन नहीं कर सकती हैं. इसलिए ग्राफ्टेड पौधे लगाएं, जो 3 साल में फल देते हैं. वहीं, पौधे लगाते समय ये ध्यान रखें कि पौधे से पौधे के बीच दूरी होनी चाहिए.
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