बकरी पालन से आत्मनिर्भर बनीं 20 हजार से ज्यादा महिलाएं! 5 साल में लिखी सफलता की कहानी

बकरी पालन से आत्मनिर्भर बनीं 20 हजार से ज्यादा महिलाएं! 5 साल में लिखी सफलता की कहानी

बिहार के सीमांचल इलाके में बकरी पालन ने हजारों महिलाओं की जिंदगी बदलने का काम किया है. पिछले 5 साल में 20 हजार से ज्यादा महिलाएं बकरी पालन से जुड़कर अपनी आमदनी बढ़ा रही हैं और आत्मनिर्भर बन रही हैं.

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बकरी पालन से आत्मनिर्भर बनीं 20 हजार से ज्यादा महिलाएं! 5 साल में लिखी सफलता की कहानीबकरी पालन से बदली तकदीर

बिहार में जीविका और बकरी पालन ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं के अर्थव्यवस्था का सफल माध्यम बन चुके हैं. आज जीविका से जुड़कर ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं पशुपालन, मुर्गी पालन से लेकर बकरी पालन के जरिए अपनी सफलता की कहानी लिख रही हैं. वहीं, राज्य में जीविका के स्वयं सहायता समूह आधारित मॉडल लगातार नए और प्रेरणादायक अवसर पैदा कर रहे हैं. इसी कड़ी में बिहार के सीमांचल की जीविका गोट प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड बकरी पालन के जरिए सफलता और आत्मनिर्भरता की कहानी लिख रही है. महज 6 सालों में यह कंपनी करीब 20,000 महिलाओं को अपने साथ जोड़कर बकरी पालन के जरिए 15 करोड़ रुपये से अधिक के कारोबार के साथ एक नई मिसाल कायम कर चुकी है.

चार जिलों की महिलाओं की सफलता की कहानी

सीमांचल जीविका गोट प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के साथ चार जिलों-अररिया, पूर्णिया, कटिहार और किशनगंज की करीब 20 हजार जीविका दीदियां जुड़ी हुई हैं. ये महिलाएं गुलाबी क्रांति यानी बकरी पालन और मांस उत्पादन के जरिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदल रही हैं. दिसंबर 2020 में स्थापित यह कंपनी बकरी पालन को एक संगठित और मूल्य-श्रृंखला आधारित व्यवसाय में बदलने का काम कर रही है. अगस्त 2026 तक कंपनी से 19,956 यानी करीब 20,000 शेयरधारक जुड़ चुके हैं और कुल शेयर पूंजी 99.78 लाख रुपये तक पहुंच गई है.

25 लाख से बढ़कर 5 करोड़ हुआ कंपनी का टर्नओवर

अगर कंपनी के टर्नओवर की बात करें तो महज पांच साल में बकरी पालन के कारोबार ने बड़ी सफलता हासिल की है. सीमांचल जीविका गोट प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड से जुड़ी जीविका दीदियों की मदद से वित्तीय वर्ष 2021-22 में कंपनी का टर्नओवर 25.50 लाख रुपये था, जो 2025-26 में बढ़कर 530.63 लाख रुपये यानी करीब 5.31 करोड़ रुपये हो गया. इस तरह करीब पांच वर्षों में कंपनी के टर्नओवर में 20 गुना से अधिक की वृद्धि हुई है. वहीं, प्रखंड स्तर पर खरीद-बिक्री को सुगम बनाने के लिए 44 डेमो-सह-कलेक्शन सेंटर बनाए गए हैं. साथ ही गांव-गांव तक पशु स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए 700 से अधिक प्रशिक्षित पशु सखियों का नेटवर्क काम कर रहा है.

मांस के कारोबार से एक करोड़ से अधिक की कमाई

जीविका के अधिकारियों के अनुसार, सीमांचल जीविका मीट आउटलेट के माध्यम से अगस्त 2026 तक 14,566 किलोग्राम मांस की बिक्री की गई.  इससे 1.03 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार हुआ है. कंपनी की ओर से लाइव बॉडीवेट यानी जीवित वजन के आधार पर पारदर्शी मूल्य निर्धारण प्रणाली अपनाई गई है. ग्रामीण विकास विभाग और सूचना और जनसंपर्क विभाग, बिहार के मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि सीमांचल में बकरी पालन के रूप में 20,000 महिलाओं की एकजुटता ने 15 करोड़ रुपये के कारोबार का इतिहास रचा है. बकरी पालन को संगठित बाजार और वैज्ञानिक तकनीकों से जोड़कर जीविका ने बिचौलियों की भूमिका को कम किया है और महिलाओं को सीधे आर्थिक लाभ पहुंचाया है.

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