क्लीनिक से खेत तकजहां ज्यादातर डॉक्टरों की पहचान अस्पताल और क्लीनिक से होती है, वहीं कर्नाटक के बेलगावी के डॉ. समीर नाइक ने खेती में कमाल कर दिखाया है. पेशे से आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. नाइक ने अपनी खेती के शौक को एक सफल बिजनेस में बदल दिया है. दरअसल, उन्होंने अपनी 4 एकड़ जमीन पर इजरायली तकनीक से केसर आम की खेती शुरू की. आधुनिक बागवानी तकनीकों और प्राकृतिक खेती के तरीकों को मिलाकर उन्होंने ऐसा मॉडल तैयार किया, जिसने शानदार सफलता दिलाई, जिससे इस सीजन में उन्हें करीब 30 टन आम उत्पादन मिलने की उम्मीद है.
खास बात यह है कि डॉ. नाइक सिर्फ आम उगाते ही नहीं, बल्कि उन्हें अपनी मां के नाम से बनाए गए एक खास ब्रांड के तहत बाजार में बेचते भी हैं. आमों की पैकिंग और मार्केटिंग खुद के ब्रांड से की जाती है, जिससे उन्हें बेहतर कीमत मिलती है. बाजार में उनके आम 350 रुपये से 700 रुपये तक में बिक रहे हैं. डॉक्टर से सफल आम उत्पादक बने डॉ. समीर नाइक की यह कहानी दिखाती है कि नई तकनीक, सही योजना और जुनून से साथ खेती को भी एक लाभदायक और सफल कारोबार बनाया जा सकता है.
आयुर्वेद में पोस्ट ग्रेजुएशन और पीएचडी कर चुके डॉ. समीर नाइक पिछले 28 सालों से चिकित्सा क्षेत्र में काम कर रहे हैं. हालांकि डॉक्टर होने के बावजूद उनका दिल हमेशा खेती से जुड़ा रहा. किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले डॉ. नाइक की हमेशा से इच्छा थी कि वे खेती-किसानी में कुछ नया और अलग करके दिखाएं. इसी सोच के साथ उन्होंने आम की खेती में इजरायली तकनीक अपनाने का फैसला किया. इसके लिए उन्होंने पहले इस तकनीक का गहराई से जानकारी ली. उन्होंने यूट्यूब पर वीडियो देखकर जानकारी जुटाई और महाराष्ट्र के उन खेतों का भी दौरा किया, जहां इजरायली मॉडल पर सफलतापूर्वक आम की खेती की जा रही है.
दूसरे किसानों की सफलता देखकर डॉ. नाइक को भरोसा और आत्मविश्वास मिला, जिसके बाद उन्होंने बेलगावी में भी इसी मॉडल को अपनाने का निर्णय लिया. साल 2019 में उन्होंने बेलगावी तालुका के नंदीहल्ली गांव में 5.5 एकड़ जमीन खरीदी. इसके बाद हिडकल बांध के पास स्थित बागवानी केंद्र से केसर आम के 2,800 पौधे लाकर चार एकड़ खेत में लगाए. वहीं, आज उनके इस आम के बाग को सात साल पूरे हो चुके हैं और बाग में चौथे सीजन की फसल तैयार हो रही है. उनकी मेहनत और नई तकनीक के इस्तेमाल का नतीजा यह है कि अब उनका बाग आसपास के किसानों के लिए भी एक प्रेरणा बन गया है.
डॉ. समीर नाइक के मुताबिक, पहले पारंपरिक आम की खेती में एक एकड़ में केवल 35 से 40 पेड़ लगाए जाते थे और किसानों को फल मिलने के लिए 8 से 10 साल तक इंतजार करना पड़ता था. लेकिन इजरायली मॉडल ने इस तस्वीर को पूरी तरह बदल दिया है. उन्होंने बताया कि इस तकनीक में आम के पेड़ सिर्फ तीन साल के भीतर फल देना शुरू कर देते हैं. डॉ. नाइक ने अपने बाग में प्रति एकड़ करीब 700 पौधे लगाए हैं. पौधों के बीच 7 फीट और पंक्तियों के बीच 12 फीट की दूरी रखी है. उनका मानना है कि इस मॉडल से हर साल उत्पादन तेजी से बढ़ रहा है और उपज लगभग दोगुनी हो रही है.
डॉ. नाइक ने बताया कि केसर आम अपने बेहतरीन स्वाद और खुशबू के कारण बाजार में काफी पसंद किए जाते हैं, जिससे उन्हें अच्छे दाम भी मिलते हैं. वे अपने आम "वैशाली फार्म केसर आम" नाम के ब्रांड से बेचते हैं, जिसका नाम उन्होंने अपनी मां के सम्मान में रखा है. ग्राहकों को उनके आम काफी पसंद आ रहे हैं और कई लोग सीधे फार्म पर पहुंचकर ही आम खरीदते हैं. पिछले साल उन्होंने अपने आम यूरोप और खाड़ी देशों में भेजने वाले निर्यातकों को भी सप्लाई किए थे. हालांकि, पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध जैसे हालात के कारण इस बार निर्यात में दिक्कतें आ रही हैं. इसलिए उन्होंने इस सीजन में अपना खुद का मार्केटिंग नेटवर्क तैयार किया है.
डॉ. समीर नाइक का आम का बाग सिर्फ ज्यादा उत्पादन के लिए ही नहीं, बल्कि प्राकृतिक खेती के लिए भी चर्चा में है. उनके बाग में लगभग 95 फीसदी खेती जैविक तरीकों से होती है. इसके लिए वे अपनी सात गायों के गोबर और खेत से निकलने वाले जैविक कचरे का इस्तेमाल खाद बनाने में करते हैं. केवल जरूरत पड़ने पर ही बहुत कम मात्रा में रासायनिक खाद का उपयोग किया जाता है. डॉ. नाइक का कहना है कि अच्छी मिट्टी ही अच्छी फसल की नींव होती है, मिट्टी की सेहत बेहतर रहने से पेड़ों में बीमारियां कम होती हैं और फूलों और फलों की संख्या बढ़ती है.
डॉ. नाइक खेती को सिर्फ कमाई का जरिया नहीं, बल्कि अपना जुनून मानते हैं. उन्होंने बताया कि जब उन्होंने यह जमीन खरीदी थी, तब यह पूरी तरह पथरीली और ऊबड़-खाबड़ थी. लेकिन लगातार कड़ी मेहनत और सही योजना के दम पर उन्होंने इसे एक खूबसूरत और आधुनिक बाग में बदल दिया. उनके अनुसार, फार्म पर समय बिताने से उन्हें मानसिक शांति और खुशी मिलती है. वहीं, डॉ. नाइक आम के अलावा अमरूद और कटहल की भी खेती करते हैं. इस साल उन्हें आम की बिक्री से करीब 30 लाख रुपये का कारोबार होने की उम्मीद है, जबकि खेती पर उनका खर्च लगभग 8 लाख रुपये है. डॉ. नाइक का मानना है कि यदि किसान नई तकनीक अपनाएं और खेती को आधुनिक नजरिए से देखें, तो वे खेती से कहीं ज्यादा मुनाफा कमा सकता है.
बेलगावी के बागवानी विभाग के संयुक्त निदेशक महंतेश मुरागोड ने डॉ. समीर नाइक की खूब तारीफ की है. उन्होंने कहा कि डॉ. नाइक ऐसे केसर आम उगा रहे हैं, जो क्वालिटी के मामले में अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरे उतरते हैं और निर्यात के लिए भी बेस्ट हैं. उन्होंने कहा कि एक आयुर्वेदिक डॉक्टर का बागवानी के क्षेत्र में इतनी बड़ी सफलता हासिल करना बेहद प्रेरणादायक है. विभाग ने उनकी खेती को आगे बढ़ाने के लिए हर संभव मदद और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं. महंतेश मुरागोड का मानना है कि दूसरे किसानों को भी डॉ. नाइक के अनुभवों से सीख लेनी चाहिए. यदि किसान नई तकनीकों को अपनाएं और सही तरीके से बागवानी करें, तो वे भी आम की खेती से अच्छी कमाई कर सकते हैं और सफल किसान बन सकते हैं.
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