यूरिया की टेंशन खत्म! बिना ज्यादा खर्च के धान को मिलेगा भरपूर पोषण, जानिए एक्सपर्ट का फॉर्मूला

यूरिया की टेंशन खत्म! बिना ज्यादा खर्च के धान को मिलेगा भरपूर पोषण, जानिए एक्सपर्ट का फॉर्मूला

धान की खेती के मौसम में यूरिया की कमी से किसान परेशान हैं. ऐसे में कृषि वैज्ञानिकों ने गोबर की खाद, बायो-कल्चर और एनपीके खाद जैसे प्रभावी विकल्प सुझाए हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि इन तरीकों को अपनाकर किसान कम लागत में फसल को पूरा पोषण दे सकते हैं और यूरिया की कमी के बावजूद अच्छी पैदावार प्राप्त कर सकते हैं.

Advertisement
यूरिया की टेंशन खत्म! बिना ज्यादा खर्च के धान को मिलेगा भरपूर पोषण, जानिए एक्सपर्ट का फॉर्मूलाअब नहीं होगी खाद की कमी

कई राज्यों में इन दिनों किसान धान की खेती की तैयारियों में लगे हुए हैं. खेतों की जुताई, नर्सरी तैयार करने और रोपाई की तैयारियां तेजी से चल रही हैं. लेकिन इसी बीच किसानों के सामने एक बड़ी समस्या खड़ी हो गई है. बाजार में यूरिया की कमी देखी जा रही है, जिससे किसान चिंतित हैं. धान की फसल में शुरुआती विकास के लिए यूरिया बहुत जरूरी माना जाता है. ऐसे में किसान सोच रहे हैं कि यदि समय पर यूरिया नहीं मिला तो फसल का विकास कैसे होगा. हालांकि कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को चिंता न करने की सलाह दी है और कुछ ऐसे वैज्ञानिक उपाय बताए हैं जिनकी मदद से यूरिया की कमी को काफी हद तक पूरा किया जा सकता है.

धान की फसल में क्यों जरूरी है यूरिया?

यूरिया पौधों को नाइट्रोजन देने का सबसे बड़ा स्रोत माना जाता है. नाइट्रोजन पौधों की बढ़वार के लिए बहुत जरूरी तत्व है. इसकी मदद से पौधों की पत्तियां हरी-भरी रहती हैं और उनका विकास तेजी से होता है. यूरिया के इस्तेमाल से पौधों में क्लोरोफिल का निर्माण बढ़ता है, जिससे वे सूर्य की रोशनी से अधिक भोजन बना पाते हैं. यही कारण है कि धान की खेती में किसान सबसे ज्यादा यूरिया का उपयोग करते हैं.

जब फसल को पर्याप्त नाइट्रोजन मिलती है तो पौधे मजबूत बनते हैं, नई शाखाएं निकलती हैं और उत्पादन बढ़ने की संभावना भी अधिक होती है. लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि केवल यूरिया पर निर्भर रहने की बजाय किसान दूसरे विकल्प भी अपना सकते हैं.

गोबर की खाद बन सकती है अच्छा विकल्प

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि किसान अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद का उपयोग करके भी फसल को जरूरी पोषण दे सकते हैं. गोबर की खाद मिट्टी की उर्वरता बढ़ाती है और पौधों को धीरे-धीरे पोषक तत्व उपलब्ध कराती है. यदि इसमें कुछ जरूरी बायो-कल्चर मिलाकर खेत में डाला जाए तो इसका असर और भी बेहतर होता है. इससे मिट्टी में लाभकारी जीवाणु बढ़ते हैं और पौधों की जड़ें मजबूत बनती हैं.

रोपाई से पहले करें यह आसान उपाय

विशेषज्ञों ने किसानों को धान की नर्सरी और रोपाई के समय एक आसान तरीका अपनाने की सलाह दी है. इसके लिए किसान एनपीके 19:19:19 या 20:20:20 का घोल तैयार कर सकते हैं. पांच ग्राम एनपीके को एक लीटर पानी में मिलाकर घोल बनाया जाता है. धान के बीजों को इस घोल में उपचारित करने से पौधों को शुरुआती अवस्था में जरूरी पोषण मिल जाता है.

जब धान की रोपाई का समय आए तो पौधों की जड़ों को रोपाई से लगभग आधा घंटा पहले इस घोल में डुबोकर रखें. कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार इससे पौधों को शुरुआती दिनों में यूरिया की जरूरत के बराबर पोषण मिल सकता है और पौधे तेजी से बढ़ते हैं.

यूरिया को बिखेरने के बजाय घोल बनाकर करें उपयोग

यदि किसान के पास यूरिया कम मात्रा में उपलब्ध है तो उसे सीधे खेत में फैलाने की बजाय पानी में घोल बनाकर पत्तियों पर छिड़काव करना अधिक फायदेमंद हो सकता है. ऐसा करने से पौधे सीधे पत्तियों के माध्यम से पोषक तत्व ग्रहण कर लेते हैं. इससे यूरिया की बर्बादी कम होती है और कम मात्रा में भी अच्छा परिणाम मिलता है.

एनपीके से मिलते हैं कई फायदे

विशेषज्ञों का मानना है कि एनपीके खाद कई बार यूरिया से भी ज्यादा लाभकारी साबित हो सकती है. इसमें नाइट्रोजन के साथ-साथ फास्फोरस और पोटाश भी होता है. नाइट्रोजन पौधों को हरा-भरा बनाता है, फास्फोरस जड़ों को मजबूत करता है और पोटाश पौधों की रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ाता है. इससे फसल का संतुलित विकास होता है और उत्पादन बेहतर मिलने की संभावना बढ़ जाती है.

घबराने की जरूरत नहीं

कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि यूरिया की कमी जरूर एक चुनौती है, लेकिन किसान सही तकनीक और वैज्ञानिक सलाह अपनाकर इस समस्या का समाधान कर सकते हैं. गोबर की खाद, बायो-कल्चर और एनपीके जैसे विकल्पों का सही उपयोग करके धान की फसल को पर्याप्त पोषण दिया जा सकता है. इससे न केवल फसल स्वस्थ रहेगी बल्कि किसानों की लागत भी कम होगी और उत्पादन पर भी कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा.

ये भी पढ़ें:

खाद की कमी का डर खत्म! एमपी के इस जिले में भरपूर स्टॉक, ई-विकास पोर्टल बना किसानों का सहारा
किसानों की जेब खाली कर रहा सस्ता आयातित तेल? तेलंगाना ने उठाई बड़ी मांग

POST A COMMENT