नैनो फर्टिलाइजर की जबरन बिक्री पर रोक, किसानों को राहत देने के लिए सरकार का बड़ा फैसला

नैनो फर्टिलाइजर की जबरन बिक्री पर रोक, किसानों को राहत देने के लिए सरकार का बड़ा फैसला

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने नैनो फर्टिलाइजर की जबरन बिक्री पर रोक लगा दी है. अब सब्सिडी वाले उर्वरकों के साथ नैनो उत्पादों को बंडल बनाकर बेचना गैरकानूनी होगा. सरकार के इस फैसले से किसानों को अनावश्यक खर्च से राहत मिलने की उम्मीद है, साथ ही कंपनियों के लिए पारदर्शिता और सही जानकारी देना भी अनिवार्य कर दिया गया है.

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नैनो फर्टिलाइजर की जबरन बिक्री पर रोक, किसानों को राहत देने के लिए सरकार का बड़ा फैसलानैनो यूरिया पर सवाल

किसानों को राहत देते हुए कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने एक अहम नोटिफिकेशन जारी किया है. इसमें साफ कहा गया है कि नैनो फर्टिलाइजर की जबरन बिक्री नहीं की जा सकती. अब नैनो फर्टिलाइजर को किसी अन्य खाद या कृषि उत्पाद के साथ जोड़कर (बंडल बनाकर) किसानों को बेचने पर रोक लगा दी गई है.

यह फैसला ऐसे समय पर आया है, जब कई जगहों से शिकायतें सामने आ रही थीं कि सब्सिडी वाले उर्वरकों के साथ ऐसे कृषि उत्पाद जबरन बेचे जा रहे हैं, जिनकी जरूरत नहीं होती या जिनके फायदे अभी संदिग्ध हैं. इससे किसानों का आर्थिक बोझ बढ़ रहा था. पहले से ही खाद संकट, ईरान युद्ध जैसे अंतरराष्ट्रीय हालात और कम बारिश की आशंका के कारण किसान दबाव में हैं.

क्या है नैनो यूरिया?

नैनो यूरिया यूरिया खाद का तरल रूप है. यह पौधों को नाइट्रोजन देता है, जो अमीनो एसिड, पिगमेंट, एंजाइम और कई जरूरी चीजों को बनाने के लिए जरूरी होता है. हालांकि, नैनो यूरिया के फायदे को लेकर सवाल उठते रहे हैं, खासकर इस दावे पर कि 500 मिलीलीटर नैनो यूरिया, 45 किलो नीम-कोटेड दानेदार यूरिया के बराबर है.

कंपनियों के लिए नए नियम

सरकार के नोटिफिकेशन में नैनो फर्टिलाइजर बनाने के नियम भी तय किए गए हैं. नैनो डाई-अमोनियम फॉस्फेट (लिक्विड) का उत्पादन इफको (IFFCO) और कोरमंडल इंटरनेशनल लिमिटेड करती हैं. नैनो यूरिया (लिक्विड) का निर्माण रे नैनो साइंसेज एंड रिसर्च सेंटर करता है.

सरकार ने इन कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे अपने प्रोडक्ट से जुड़ी पूरी और स्पष्ट जानकारी किसानों को दें. 

लेबल और जानकारी देना अनिवार्य

अब कंपनियों को नैनो फर्टिलाइजर की बोतल पर या उसके साथ दिए गए पर्चे में यह जानकारी देना जरूरी होगा-

  • अलग-अलग फसलों के लिए सही मात्रा (डोज)
  • फसल की किस अवस्था में इसका इस्तेमाल करना है
  • इस्तेमाल का सही तरीका

इसके अलावा, कंपनियों को कृषि विज्ञान केंद्रों (Krishi Vigyan Kendras) में किसानों को नैनो फर्टिलाइजर के फायदे समझाने और उनके उपयोग का डेमोंस्ट्रेशन देने का भी आदेश दिया गया है.

पहले भी जारी हुए निर्देश

यह पहली बार नहीं है जब सरकार ने इस तरह की अवैध बिक्री पर सख्ती दिखाई है. नवंबर 2020 में रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय ने भी स्पष्ट किया था कि केंद्र सरकार द्वारा सब्सिडी दिए जाने वाले उर्वरकों के साथ अन्य प्रोडक्ट जोड़कर बेचना गैरकानूनी है. इससे उर्वरकों की लागत बढ़ती है और किसानों की मुश्किलें और बढ़ जाती हैं.

व्यापारियों का विरोध

हाल ही में हरियाणा के करनाल जिले में खाद, बीज और कीटनाशक व्यापारियों ने एक दिन की हड़ताल भी की थी. उनका आरोप था कि थोक व्यापारी और खाद कंपनियां उन पर दबाव डालती हैं कि वे यूरिया और डीएपी जैसे सब्सिडी वाले उर्वरकों के साथ नैनो यूरिया, नैनो डीएपी जैसे प्रोडक्ट बेचें.

वैज्ञानिकों ने भी उठाई आवाज

वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने भी इस अवैध प्रचलन पर चिंता जताई है. आईसीएआर-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के पूर्व प्रधान वैज्ञानिक डॉ. वीरेंद्र सिंह लाठर सहित कई विशेषज्ञों ने मांग की है कि इफको और कृभको जैसी बड़ी कंपनियों और व्यापारियों द्वारा सब्सिडी वाले उर्वरकों के साथ नैनो प्रोडक्ट बेचने पर सख्त कार्रवाई की जाए. 

कुल मिलाकर, सरकार का यह फैसला किसानों को फालतू खर्च से बचाने और खाद बिक्री की व्यवस्था को दुरुस्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.

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