बीज निर्यात में भारत की बड़ी छलांग, तीन साल में 1,317 लाइसेंसिंग समझौते: संसद में सरकार

बीज निर्यात में भारत की बड़ी छलांग, तीन साल में 1,317 लाइसेंसिंग समझौते: संसद में सरकार

केंद्र सरकार ने संसद में बताया कि बीजों के आयात और निर्यात को आसान बनाने के लिए प्रक्रियाओं को सरल किया गया है. भारत का बीज निर्यात लगातार बढ़ रहा है और पिछले तीन वर्षों में आईसीएआर के 27 संस्थानों ने 1,317 लाइसेंसिंग समझौते किए हैं. सरकार बीज उद्योग में सार्वजनिक-निजी भागीदारी को भी बढ़ावा दे रही है.

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बीज निर्यात में भारत की बड़ी छलांग, तीन साल में 1,317 लाइसेंसिंग समझौते: संसद में सरकारभारत से बीजों का निर्यात बढ़ा

केंद्र सरकार ने संसद में जानकारी दी है कि देश में बीजों और रोपाई के सामान (प्लांटिंग मैटेरियल) के आयात-निर्यात को आसान बनाने के लिए प्रक्रियाओं को आसान किया गया है. सरकार का कहना है कि इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा मिलेगा और किसानों के लिए बेहतर क्वालिटी वाले बीज उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी. साथ ही भारतीय बीज उद्योग को दुनिया के बाजार में नई संभावनाएं मिलेंगी.

कृषि क्षेत्र से जुड़े एक प्रश्न के लिखित उत्तर में सरकार ने संसद में बताया कि अक्टूबर 2024 में एक्सिम (EXIM) समिति को समाप्त किए जाने के बाद बीज आयात और निर्यात से संबंधित अनुमतियां अब डीजीएफटी (DGFT) के डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से दी जा रही हैं. हालांकि प्लांट क्वारंटाइन और अन्य रेगुलेटरी नियमों का पालन पहले की तरह अनिवार्य रहेगा.

लगातार बढ़ रहा है भारत का बीज निर्यात

संसद में दी गई जानकारी के अनुसार बीज निर्यात में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है. सरकार की ओर से दिए गए बीज आयात-निर्यात की डिटेल कुछ इस प्रकार है-

वित्त वर्ष 2024-25

आयात मात्रा: 27.69 हजार मीट्रिक टन
आयात मूल्य: 1,561.22 करोड़ रुपये
निर्यात मात्रा: 92.06 हजार मीट्रिक टन
निर्यात मूल्य: 2,323.39 करोड़ रुपये

वित्त वर्ष 2025-26

आयात मात्रा: 31.84 हजार मीट्रिक टन
आयात मूल्य: 1,755.96 करोड़ रुपये
निर्यात मात्रा: 123.82 हजार मीट्रिक टन
निर्यात मूल्य: 3,023.16 करोड़ रुपये

वित्त वर्ष 2026-27 (मई 2026 तक)

आयात मात्रा: 4.43 हजार मीट्रिक टन
आयात मूल्य: 357.36 करोड़ रुपये
निर्यात मात्रा: 18.46 हजार मीट्रिक टन
निर्यात मूल्य: 582.19 करोड़ रुपये

आंकड़ों से साफ है कि साल 2025-26 में बीज निर्यात का मूल्य 3,000 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गया, जो भारतीय बीज उद्योग की दुनिया भार में बढ़ती वैश्विक मांग को दर्शाता है.

बीज की क्वालिटी सुधारने पर खास जोर

सरकार ने बताया कि भारत बीज के क्वालिटी सिस्टम को अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुरूप बनाने पर काम कर रहा है. इसके लिए देश OECD Seed Schemes, International Seed Testing Association (ISTA) और NABL मान्यता प्राप्त बीज लेबोरेटरी के माध्यम से बीज की क्वालिटी पर खास ध्यान दिया जा रहा है. इससे भारतीय बीजों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग बढ़ाने में मदद मिल रही है.

दुनिया के बड़े कृषि संस्थानों के साथ सहयोग

सरकार ने बताया कि भारत कई अंतरराष्ट्रीय कृषि अनुसंधान संस्थानों के साथ मिलकर काम कर रहा है. इनमें शामिल हैं—इंटरनेशनल राइस रिसर्च इंस्टीट्यूट (IRRI), इंटरनेशनल क्रॉप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर द सेमी एरिड ट्रॉपिक्स (ICRISAT), इंटरनेशनल मक्का एंड व्हीट इम्प्रूवमेंट सेंटर (CIMMYT), इंटरनेशनल सेंटर फॉर एग्रीकल्चरल रिसर्च इन द ड्राई एरियाज (ICARDA) और बायोवर्सिटी इंटरनेशनल और CIAT गठबंधन. इन संस्थानों के साथ साझेदारी के जरिए जलवायु अनुकूल बीज तकनीक, नई किस्मों और आधुनिक कृषि पद्धतियों पर काम किया जा रहा है.

वाराणसी और आगरा बने अंतरराष्ट्रीय रिसर्च सेंटर

सरकार ने बताया कि भारतीय सहयोग से साल 2018 में वाराणसी में IRRI का दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र (ISARC) बनाया गया था. यह केंद्र धान अनुसंधान और क्षमता निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. इसके अलावा 25 जून 2025 को उत्तर प्रदेश के आगरा जिले के सिंगना में इंटरनेशनल पोटैटो सेंटर (CIP) के दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र बनाने को भी मंजूरी दी गई है.

बीज क्षेत्र में बढ़ रही पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप

सरकार बीज क्षेत्र में सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की साझेदारी (PPP) को भी बढ़ावा दे रही है. इसके तहत ICAR संस्थान, राज्य कृषि विश्वविद्यालय, राज्य बीज निगम, राष्ट्रीय बीज निगम और निजी बीज कंपनियां मिलकर काम कर रही हैं.
इस सहयोग के तहत बीज उत्पादन, नई किस्मों का परीक्षण, ब्रीडर सीड से प्रमाणित बीज तक की सीरीज, टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देने और सार्वजनिक संस्थानों द्वारा विकसित किस्मों का लाइसेंस जारी करने जैसे काम किए जा रहे हैं.

तीन साल में 1,317 लाइसेंसिंग समझौते

सरकार के अनुसार वर्ष 2023-24 से 2025-26 के दौरान आईसीएआर के 27 संस्थानों ने सार्वजनिक और निजी संगठनों के साथ 1,317 लाइसेंसिंग समझौते किए हैं. इन समझौतों के माध्यम से नई बीज किस्मों और रोपाई के सामान को बड़े स्तर पर किसानों तक पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है. केंद्र सरकार ने बताया कि कृषि अवसंरचना कोष (Agriculture Infrastructure Fund-AIF) के माध्यम से बीज प्रोसेसिंग यूनिट सहित कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है. सरकार का मानना है कि बेहतर बीज, मजबूत रिसर्च व्यवस्था, आसान निर्यात-आयात प्रक्रिया और निजी क्षेत्र की भागीदारी से भारतीय बीज उद्योग आने वाले वर्षों में वैश्विक बाजार में और मजबूत स्थिति हासिल कर सकता है.

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