आलू को पाले से बचाएगी राखदेश के कई राज्यों में पिछले कुछ दिनों में घने कोहरे और नमी के साथ शीतलहर का प्रकोप बढ़ गया है. शाम ढलते ही तेज हवाओं से तापमान में गिरावट देखी जा रही है. ऐसे में अधिक ठंड और तापमान में गिरावट के कारण आलू की फसल पर पाला पड़ने का खतरा बढ़ गया है. इस दौरान झुलसा सहित कई रोग आलू की फसल में लग सकते हैं. ऐसे में समय रहते कोई उपाय नहीं हुआ तो आलू की फसल पूरी तरह नष्ट हो सकती है. इससे किसानों को भारी नुकसान होता है. ऐसे में आज हम आपको कुछ घरेलू टिप्स बताएंगे जिसकी मदद से आप आलू की फसल को देखभाल करके पाला लगने से बचा सकते हैं और अधिक से अधिक पैदावार ले सकते हैं.
आलू की फसल पर पाला पड़ने से भारी नुकसान होता है, जिससे पत्तियां झुलसकर सूख जाती हैं, पौधे की बढ़वार रुक जाती है और झुलसा रोग का प्रकोप बढ़ जाता है, जिससे पैदावार काफी कम हो जाती है और आलू का आकार बिगड़ जाता है और वे काले पड़ सकते हैं या सड़ सकते हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान होता है. यह नुकसान लगभग 30-50 फीसदी या उससे अधिक तक हो सकता है, खासकर अगर पाला तेज हो और बचाव के उपाय न किए जाएं.
अगर तापमान में ज्यादा गिरावट है, तो किसान घर के चूल्हे में प्रयोग की जाने वाली लकड़ी की बची राख का इस्तेमाल कर सकते हैं. किसानों को आलू के खेतों में 10 से 12 किलो लकड़ी की राख का फसल पर छिड़काव करना चाहिए. ऐसा करने से आलू की फसल को थोड़ी गर्मी मिल जाती है और फसल को पाला लगने की संभावना कम हो जाती है. इसके अलावा सड़े हुए छाछ का उपयोग कीटनाशक के तौर पर कर सकते हैं. ये भी फसल को पाले से बचाने में प्रभावी होता है.
कृषि वैज्ञानिकों की मानें तो घटते तापमान को देखते हुए आलू की फसल और सब्जियों को संभावित पाले से बचाने के लिए हल्की सिंचाई कर सकते हैं, क्योंकि जमीन में नमी पाले के असर को बहुत कम कर देती है. साथ ही पाला से फसल को बचाने के लिए गंधक का स्प्रे भी कर सकते हैं. एक लीटर गंधक 1000 लीटर पानी में मिलाकर एक हेक्टेयर में स्प्रे कर दें. इससे आलू की फसल पर पाला का प्रभाव नहीं पड़ता है.
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