winter care tips फूलगोभी भला किस पसंद नहीं है और सर्दियों के मौसम में यह सब्जी लगभग हर किसी की फेवरिट होती है. ठंड का मौसम फूलगोभी की खेती के लिए सबसे अनुकूल माना जाता है. सही समय, उपयुक्त किस्म और वैज्ञानिक तरीके अपनाकर किसान कम लागत में अच्छी पैदावार हासिल कर सकते हैं. हालांकि, थोड़ी सी लापरवाही से फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों प्रभावित हो सकते हैं. इसलिए सर्दियों में फूलगोभी की खेती करते समय कुछ खास बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है.
फूलगोभी ठंडी जलवायु की फसल है. इसकी अच्छी बढ़वार के लिए 15 से 20 डिग्री सेल्सियस तापमान उपयुक्त माना जाता है. बहुत ज्यादा ठंड या पाला पड़ने से फूल की गुणवत्ता खराब हो सकती है. इसलिए उत्तर भारत में अक्टूबर से नवंबर के बीच इसकी रोपाई सबसे बेहतर रहती है. फूलगोभी की खेती के लिए दोमट या बलुई दोमट मिट्टी सबसे अच्छी होती है. मिट्टी का जल निकास अच्छा होना चाहिए. खेत की तैयारी के लिए 2–3 गहरी जुताई करें और पुरानी फसल के अवशेष हटा दें. अंतिम जुताई के समय 20–25 टन सड़ी हुई गोबर की खाद प्रति हेक्टेयर मिलाएं, जिससे मिट्टी की उर्वरता बढ़े.
अच्छी पैदावार के लिए प्रमाणित और उन्नत किस्म के बीज का चयन करें. ठंड के मौसम के लिए पूसा स्नोबॉल, पूसा दीपाली, पूसा शुभ्रा जैसी किस्में उपयुक्त मानी जाती हैं. पहले बीज की नर्सरी तैयार करें और 25–30 दिन बाद स्वस्थ पौधों की रोपाई खेत में करें. रोपाई के समय पौधों की दूरी 45×45 सेमी रखें. ठंड के मौसम में ज्यादा सिंचाई की जरूरत नहीं होती, लेकिन मिट्टी में नमी बनी रहनी चाहिए. 7–10 दिन के अंतराल पर हल्की सिंचाई करें. उर्वरक प्रबंधन के लिए नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश का संतुलित प्रयोग करें. रोपाई के 20–25 दिन बाद पहली टॉप ड्रेसिंग करना फायदेमंद रहता है.
जब फूल पूरी तरह विकसित हो जाए और रंग सफेद और घने दिखाई दें, तब कटाई करें. देर से कटाई करने पर फूल ढीला हो सकता है. गोभी की खेती लाइन में की जाती है और हर लाइन के बीच 45 सेंटीमीटर की दूरी होनी चाहिए. जबकि एक पौधे से पौधे दूसरे पौधे के बीच की दूरी भी करीब इतनी ही यानी 45 सेंटीमीटर की होनी चाहिए. गोभी की खेती में रासायनिक की जगह ऑर्गेनिक खाद का प्रयोग फसल की गुणवत्ता को तो बढ़ाता ही है, साथ ही साथ इस पर तेज गर्मी का प्रभाव भी कम करता है. इस बात का ध्यान जरूर रखें कि इस पर यूरिया को खाद के तौर पर हरगिज प्रयोग न करें.
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