अरहर सुबह में हरा और दोपहर को मुरझा जाए तो समझ लें खतरा है, तुरंत डालें ये दवा

अरहर सुबह में हरा और दोपहर को मुरझा जाए तो समझ लें खतरा है, तुरंत डालें ये दवा

दरअसल, उकठा रोग लगने पर दलहन का पौधा दोपहर में मुरझा जाता है और सुबह में हरा हो जाता है. बाद में यह पूरा पौधा ही सूख जाता है. इससे किसान को भारी नुकसान उठाना पड़ता है क्योंकि उसके बीज, सिंचाई, मजदूरी लागत आदि का खर्च डूब जाता है. अगर आपको दलहन फसल में ऐसा लक्षण दिखे तो तुरंत उकठा रोग का इलाज शुरू कर दें.

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अरहर सुबह में हरा और दोपहर को मुरझा जाए तो समझ लें खतरा है, तुरंत डालें ये दवाअरहर की खेती

अगर आपने दलहन फसलों जैसे कि अरहर, चना, मसूर आदि की खेती की है तो यह खबर आपके लिए है. यह खबर आपको आगाह करने के लिए है कि उसमें लगने वाले रोगों के बारे में सावधान रहें. अभी मौसम में हल्की ठंड है जो कि कई रोगों को बुलावा देती है. खासकर तब जब आप इस ठंड में फसलों में सिंचाई करते हैं. इसलिए दलहन के नए पौधों पर बराबर नजर रखें और लक्षण पढ़ते रहें जिससे आपको रोगों की जानकारी मिल जाएगी. इसी में एक लक्षण है कि कोई दलहन पौधा अगर सुबह में हरा और दोपहर में मुरझा जाए तो सावधान हो जाएं. यह संकेत एक गंभीर बीमारी का है.

दरअसल, उकठा रोग लगने पर दलहन का पौधा दोपहर में मुरझा जाता है और सुबह में हरा हो जाता है. बाद में यह पूरा पौधा ही सूख जाता है. इससे किसान को भारी नुकसान उठाना पड़ता है क्योंकि उसके बीज, सिंचाई, मजदूरी लागत आदि का खर्च डूब जाता है. अगर आपको दलहन फसल में ऐसा लक्षण दिखे तो तुरंत उकठा रोग का इलाज शुरू कर दें.

उकठा रोग से नुकसान

दलहन फसलों में चने को उकठा रोग सबसे अधिक प्रभावित करता है जिससे बड़े पैमाने पर नुकसान होता है. भारत की दलहन फसलों में चना सबसे अहम स्थान रखता है इसलिए इसे दालों का राजा भी कहते हैं. इसकी हरी पत्तियां साग और हरा और सूखा दाना सब्जियों में इस्तेमाल होता है. चने की दाल का छिलका और भूसा पशु आहार में काम आता है. चना दलहन फसल है इसलिए इसकी जड़ें वायुमंडल से नाइट्रोजन लेकर मिट्टी में फिक्स करती हैं जिससे मिट्टी की उपजाऊ क्षमता बढ़ती है. हालांकि चने को कई रोगों से खतरा होता है जिससे उत्पादन गिरता है. इसी में एक रोग है उकठा जो इसकी पैदावार को बहुत प्रभावित करता है. 

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दलहन में उकठा रोग से निपटने के लिए ट्राइकोडर्मा का 5 ग्राम या कार्बेंडाजिम का 2 ग्राम प्रति किलो बीज की दर से और राइजोबियम कल्चर से बीजोपचार करने के बाद ही बुवाई करनी चाहिए. फसल में उकठा रोग के लक्षण दिखने पर कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 50 घुलनशील चूर्ण का 3 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से पौधों की जड़ क्षेत्र में पटवन करें.

हरदा रोग भी खतरनाक 

दलहन में इसी तरह की एक बीमारी हरदा रोग है जिसमें पौधों की पत्तियों, तना, टहनियों और फलियों पर काले रंग के फफोले हो जाते हैं और पौधे सूख जाते हैं. इसके अलावा दलहन फसल में स्टेमफिलियम ब्लाइट का संक्रमण होता है. इसमें पहले पौधे के निचले भाग की पत्तियों पर बहुत छोटे काले रंग के धब्बे बनते हैं और रोग पौधों के ऊपरी भाग पर बढ़ते हैं. इस रोग का भी समय पर इलाज जरूरी है.

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इन दोनों रोगों के लिए किसानों को कार्बेंडाजिम का 2 ग्राम प्रति किलो बीज की दर से बीजोपचार कर बीज की बुवाई करनी चाहिए. कार्बेंडाजिम और मैन्कोजेब को मिलाकर 1.5 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करना चाहिए.

 

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