मध्यप्रदेश में बारिश, सूखा, ओलावृष्टि और बेमौसम बारिश से फसल नुकसान का जोखिम बढ़ रहा है. ऐसे में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों के लिए आर्थिक सुरक्षा का अहम सहारा है.लेकिन सरकारी आंकड़े और किसानों की शिकायतें नुकसान के आकलन, क्लेम प्रक्रिया और भुगतान में देरी को लेकर कई सवाल खड़े करती हैं.
सागर के बीना विकासखंड के ग्राम बेलई में किसान विवेक दुबे ने डेढ़ एकड़ में वर्मी कम्पोस्ट और जैविक खाद निर्माण इकाई शुरू की है. 40-50 लाख रुपये की लागत वाली इस परियोजना में 100 से अधिक बेड तैयार किए गए हैं और रोजाना 1 टन जैविक खाद उत्पादन का लक्ष्य है.
जबलपुर के युवा हृदेश राय ने कोरोना काल में करीब 12 लाख रुपये सालाना कमाई वाली आईटी नौकरी छोड़कर वर्मी कंपोस्ट का कारोबार शुरू किया। छोटे स्तर से शुरू हुआ यह काम आज करीब 1.5 करोड़ रुपये सालाना टर्नओवर तक पहुंच चुका है। हृदेश ने अकेले कारोबार बढ़ाने के बजाय 26-27 किसानों को अपने साथ जोड़ा और उनकी तैयार वर्मी कंपोस्ट को बाजार उपलब्ध कराया। आज किसानों के नेटवर्क से सालाना 6 हजार टन से ज्यादा वर्मी कंपोस्ट का कारोबार होता है, जिसकी सप्लाई देश के कई राज्यों तक की जा रही है।
विदिशा जिले के करीब 70 किसानों ने भोपाल स्थित भारतीय मृदा विज्ञान संस्थान में उन्नत कृषि तकनीकों का प्रशिक्षण लिया. किसानों ने मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, प्राकृतिक खेती, संतुलित उर्वरक उपयोग, नरवाई प्रबंधन और सोयाबीन की उन्नत तकनीकों को समझा.साथ ही कार्बन क्रेडिट के जरिए भविष्य में अतिरिक्त आय की संभावनाओं की जानकारी भी दी गई.
जबलपुर की महिला किसान शीला कुशवाहा ने पारंपरिक खेती से हटकर प्राकृतिक खेती को अपनाकर अपनी आय बढ़ाने की दिशा में सफलता हासिल की है. डेढ़ एकड़ में गेहूं, चना और विभिन्न सब्जियों की खेती के साथ वे बीजामृत और जीवामृत का उपयोग कर रही हैं. जैविक हाट में बेहतर कीमत मिलने से उनकी आमदनी बढ़ी है.
धार के बदनावर का रूपाखेड़ा गांव आधुनिक संरक्षित खेती की मिसाल बनकर उभरा है. यहां 44 पॉलीहाउस में गुलाब, जरबेरा, लिलियम समेत विदेशी फूलों और 13 शेडनेट हाउस में उन्नत सब्जियों की खेती हो रही है.MIDH योजना और आधुनिक तकनीक ने किसानों की खेती और आमदनी की तस्वीर बदल दी है.
भोपाल स्थित आईसीएआर-केन्द्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान (CIAE) और भारतीय पैकेजिंग संस्थान (IIP) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय मंथन में कृषि उत्पादों के लिए स्मार्ट एवं इंटेलिजेंट पैकेजिंग तकनीकों पर व्यापक चर्चा हुई.विशेषज्ञों ने AI, IoT, बायोडिग्रेडेबल पैकेजिंग और फ्रेशनेस इंडिकेटर जैसी आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देने तथा इनके व्यावसायीकरण के लिए राष्ट्रीय स्तर पर रोडमैप तैयार करने की आवश्यकता पर जोर दिया.
मध्य प्रदेश के मंडला जिले में आरकेवीवाई-रफ्तार योजना की मदद से एक युवा उद्यमी ने मछली पालन को सफल स्टार्टअप में बदल दिया है.यहां फिश चिप्स, फिश टेंगल, लेमन मसाला फिश और फिश अचार जैसे हेल्दी वैल्यू एडेड प्रोडक्ट्स तैयार किए जा रहे हैं, जिनकी मांग मध्य प्रदेश के साथ-साथ बिहार सहित अन्य राज्यों में भी बढ़ रही है.
यूके से बिजनेस की पढ़ाई करने वाले भोपाल के युवा किसान हर्षित गोधा ने इजरायल की तकनीक अपनाकर 8.5 एकड़ में सफलतापूर्वक एवोकाडो की खेती शुरू की है. उन्होंने 5,000 पौधों की हाईटेक नर्सरी भी तैयार की है और अब देशभर के किसानों को पौधे व डिजिटल प्रशिक्षण उपलब्ध करा रहे हैं.
मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के जावर गांव के किसान अश्विन बादल सिंह सावले ने 2 एकड़ से सब्जी की खेती शुरू कर आज 160 किसानों के एफपीओ के साथ 400 एकड़ में उत्पादन का मॉडल तैयार किया है. यहां उगने वाला टमाटर और खीरा दुबई तक निर्यात हो रहा है, जबकि किसानों को प्रति एकड़ 4 से 5 लाख रुपये तक की आय मिल रही है.
मध्य प्रदेश में सामान्य से कम वर्षा की आशंका के बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों से कम पानी और कम अवधि वाली फसलें अपनाने की अपील की है. उन्होंने श्रीअन्न, प्राकृतिक खेती, ड्रिप सिंचाई और जल संरक्षण पर जोर देते हुए कहा कि वैज्ञानिक खेती ही बदलते मौसम में किसानों की आय और उत्पादन को सुरक्षित रखने का सबसे प्रभावी उपाय है.
एमपी में मूंग खरीदी का विवाद गहराया. सरकार की 40% खरीद की नीति को नकारते हुए किसान अब 100% MSP पर खरीद की मांग कर रहे हैं. 6 जुलाई को प्रदेश भर में बड़े प्रदर्शन और रेल रोको आंदोलन की तैयारी, किसान अपने साथ राशन-तंबू लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठने को तैयार.
मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले के किसान इशरार खान ने पारंपरिक खेती छोड़ मिर्च सहित उद्यानिकी फसलों की खेती अपनाकर सफलता की नई मिसाल कायम की है. महज 2 बीघा में वीएनआर-285 किस्म की मिर्च उगाकर उन्होंने 2 से 2.5 लाख रुपये तक की आय अर्जित की.
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) के तहत ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग तकनीक अपनाकर विदिशा के किसान भगवानसिंह ने 1.20 हेक्टेयर क्षेत्र में मिर्च और टमाटर की खेती से 3.40 लाख रुपये की आय अर्जित की.उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन और आधुनिक सिंचाई तकनीकों की मदद से उन्होंने कम पानी में अधिक उत्पादन हासिल कर अन्य किसानों के लिए प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है
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