किसानों के लिए बड़ा डिजिटल प्लान! (Smart Tech in Agri)राजस्थान सरकार कृषि क्षेत्र को डिजिटल बनाने और किसानों तक सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से पहुंचाने की तैयारी में जुटी है. इसके तहत किसान रजिस्ट्री, किसान आईडी, डिजिटल क्रॉप सर्वे, खाद वितरण और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद जैसी व्यवस्थाओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जा रहा है. मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में हुई कृषि स्टैक की राज्य स्तरीय बैठक में इन सभी व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई और कई अहम फैसले लिए गए.
राजस्थान में अब तक 87.44 लाख किसानों की किसान रजिस्ट्री पूरी हो चुकी है. यह केंद्र सरकार की ओर से तय लक्ष्य का 96.95 प्रतिशत है. इनमें 49.46 लाख पीएम-किसान लाभार्थी किसान रजिस्ट्री से जुड़ चुके हैं. किसान रजिस्ट्री का मकसद किसानों की पहचान को डिजिटल तरीके से दर्ज करना है, ताकि उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ सही व्यक्ति तक पहुंचाने में आसानी हो.
किसान रजिस्ट्री के काम में तेजी लाने के लिए ग्रामीण सेवा शिविरों, जन आधार के जरिए सत्यापन और कृषि पर्यवेक्षकों को डिजिटल सिस्टम से जोड़ने जैसे कदम उठाए गए हैं. कृषि विभाग की कई किसान योजनाओं में किसान आईडी को पहचान के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है. अब सभी किसान हित की योजनाओं में किसान आईडी के इस्तेमाल को अनिवार्य करने की दिशा में काम किया जाएगा.
कृषि स्टैक को बेहतर तरीके से लागू करने के लिए कृषि विभाग के तहत एक अलग कृषि स्टैक कमिश्नरी बनाया जाएगा. कृषि आयुक्त को कृषि स्टैक आयुक्त की जिम्मेदारी दी जाएगी. इससे किसान रजिस्ट्री, डिजिटल डेटा, अलग-अलग डिजिटल प्लेटफॉर्म और कृषि योजनाओं को एक-दूसरे से जोड़ने में मदद मिलेगी. इससे किसानों को अलग-अलग योजनाओं के लिए बार-बार जानकारी देने की परेशानी भी कम हो सकती है.
बैठक में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना को सहकारिता विभाग से कृषि विभाग में स्थानांतरित करने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई. इसके लिए राज्य सरकार को विस्तृत प्रस्ताव भेजा जाएगा. वहीं राजस्थान की मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 26वीं किस्त से किसान आईडी को अनिवार्य करने की दिशा में भी काम किया जाएगा.
किसानों की जमीन से जुड़े रिकॉर्ड और किसान रजिस्ट्री के बीच भी डेटा जोड़ा जाएगा. इसके लिए RoR यानी Record of Rights और किसान रजिस्ट्री का डेटा 31 अगस्त 2026 तक सिंक्रनाइज करने का लक्ष्य रखा गया है. इसके बाद दोनों सिस्टम के बीच लगातार डेटा साझा करने की व्यवस्था बनाई जाएगी.
इसके अलावा जमीन के रिकॉर्ड में बदलाव यानी म्यूटेशन की प्रक्रिया में आवेदक का आधार नंबर और किसान आईडी दर्ज करना जरूरी किया जाएगा. इसके लिए 15 सितंबर 2026 की समय-सीमा तय की गई है.
राजसमंद और सिरोही में करीब 70 हजार किसानों पर फर्टिलाइजर डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (FFS) का पायलट सफल रहा है. अब इसे अगस्त 2026 में पूरे राजस्थान में लागू करने का फैसला लिया गया है. डिजिटल खाद वितरण प्रणाली से खाद की उपलब्धता और वितरण पर बेहतर नजर रखी जा सकेगी. इससे खाद वितरण में पारदर्शिता बढ़ने और किसानों को खाद मिलने की प्रक्रिया आसान होने की उम्मीद है.
किसान रजिस्ट्री को खाद्य विभाग और राजफेड की MSP खरीद व्यवस्था से भी जोड़ा जाएगा. इस व्यवस्था का पायलट मौजूदा खरीद सीजन में दो जिलों में शुरू किया जाएगा. किसान रजिस्ट्री से किसानों की पहचान आसानी से हो सकेगी और पात्र किसानों को MSP पर फसल बेचने की प्रक्रिया सरल बनाने में मदद मिलेगी.
राजस्थान में केवल जमीन के मालिक किसानों तक किसान रजिस्ट्री सीमित नहीं रहेगी. किरायेदार और दूसरे कृषक किसानों को भी इसमें शामिल करने की तैयारी है. इसके लिए नियम और प्रक्रिया तय करने वाली एसओपी को जल्द अंतिम रूप देने के निर्देश दिए गए हैं.
कम प्रदर्शन वाले जिलों और ऐसे इलाकों पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा, जहां किसानों की ओर से योजनाओं के लिए दावे कम किए जा रहे हैं. नवंबर 2026 से पूरे प्रदेश में किसान रजिस्ट्री को अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा. वहीं बाकी बचे करीब 600 ऑफलाइन गांवों को 15 सितंबर 2026 तक ऑनलाइन करने का लक्ष्य रखा गया है.
राजस्थान में फसलों की जानकारी जुटाने के लिए डिजिटल क्रॉप सर्वे भी किया जा रहा है. रबी 2025-26 के सर्वे में कुल 4.54 करोड़ खसरों में से कृषि सर्वे के लिए करीब 2.36 करोड़ खसरों को चुना गया. इनमें से अब तक 80.21 प्रतिशत खसरों का डिजिटल क्रॉप सर्वे पूरा हो चुका है.
इस काम के लिए 20,465 निजी सर्वेक्षकों और 7,718 सरकारी पटवारियों को लगाया गया था. डिजिटल सर्वे से खेत में कौन सी फसल बोई गई है, इसकी जानकारी डिजिटल रूप में दर्ज की जा सकेगी. इससे सरकारी योजनाओं और फसल से जुड़े आंकड़ों को ज्यादा सही तरीके से तैयार करने में मदद मिलेगी.
खरीफ 2026-27 में राजस्थान की सभी 424 ऑनलाइन तहसीलों में डिजिटल क्रॉप सर्वे किया जाएगा. सरकार ने लक्ष्य रखा है कि कम से कम 25 प्रतिशत सर्वे किसान खुद अपने मोबाइल के जरिए सेल्फ-गिर्दावरी के रूप में करें. इसके लिए किसानों को प्रति खसरा 10 रुपये का भुगतान किया जाएगा.
इस काम के लिए करीब 29.10 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया गया है. बेरोजगारी भत्ता पाने वाले युवाओं को भी सर्वे के काम में प्राथमिकता दी जाएगी. इससे डिजिटल सर्वे के साथ युवाओं को काम का अवसर मिलने की उम्मीद है.
कृषि सर्वे में अब सैटेलाइट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी तकनीकों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है. रबी सीजन में सैटेलाइट डेटा की मदद से करीब 75 लाख परती भूमि के खसरे चिन्हित किए गए. इससे सरकार को लगभग 7.5 करोड़ रुपये की बचत हुई.
वहीं AI आधारित फोटो जांच से डिजिटल क्रॉप सर्वे में दर्ज जानकारी की जांच करने में मदद मिल रही है. इससे सर्वे की गुणवत्ता और उसकी विश्वसनीयता बेहतर होने की उम्मीद है.
किसानों को किसान आईडी, किसान रजिस्ट्री और डिजिटल कृषि सेवाओं के बारे में जानकारी देने के लिए सोशल मीडिया का भी इस्तेमाल किया जाएगा. इसके लिए एक सोशल मीडिया एजेंसी नियुक्त कर जागरूकता अभियान चलाने की योजना है. किसानों को आसान भाषा में बताया जाएगा कि किसान रजिस्ट्री क्या है, किसान आईडी कैसे काम करेगी और इससे उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ कैसे मिलेगा.
नई खाद वितरण व्यवस्था से जुड़े 665 करोड़ रुपये के प्रोत्साहन में से 100 करोड़ रुपये आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर और कृषि स्टैक पर खर्च करने का प्रस्ताव भी वित्त विभाग को भेजा जाएगा.
बैठक में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने कृषि स्टैक से जुड़े सभी काम समय पर पूरा करने के निर्देश दिए. इसके लिए हर महीने स्टीयरिंग कमेटी की समीक्षा और हर 15 दिन में विभागीय स्तर पर समीक्षा की जाएगी. सरकार का कहना है कि कृषि स्टैक सिर्फ एक तकनीकी व्यवस्था नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य किसानों को सरकारी योजनाओं और कृषि सेवाओं का लाभ आसान, पारदर्शी और सही तरीके से उपलब्ध कराना है.
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