प्याज किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी! मल्टी-मॉड्यूल प्याज भंडारण सिस्टम से फसल खराब होने का खतरा होगा कम

प्याज किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी! मल्टी-मॉड्यूल प्याज भंडारण सिस्टम से फसल खराब होने का खतरा होगा कम

भारत में प्याज की बंपर पैदावार के बावजूद सालभर अच्छी क्वालिटी वाले प्याज की उपलब्धता सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती है. इसी समस्या के समाधान के लिए विकसित मल्टी-मॉड्यूल प्याज भंडारण प्रणाली किसानों के लिए वरदान साबित हो सकती है. इस आधुनिक भंडारण तकनीक से प्याज में वजन की कमी, अंकुर निकलने, सड़ने और नमी के कारण होने वाले नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है. इससे किसानों को अपनी उपज लंबे समय तक सुरक्षित रखने, बेहतर कीमत पाने और बाजार में प्याज की नियमित आपूर्ति बनाए रखने में मदद मिलेगी.

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प्याज किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी! इस नए सिस्टम से फसल खराब होने का खतरा होगा कममल्टी-मॉड्यूल प्याज भंडारण सिस्टम से किसानों को फायदा

भारत में प्याज सबसे महत्वपूर्ण व्यावसायिक सब्जियों में से एक है और भारतीय आहार का एक अनिवार्य हिस्सा है. भारत दुनिया के प्रमुख प्याज उत्पादक देशों में से एक है. यह फसल किसानों की आजीविका, कृषि व्यापार, खाद्य आपूर्ति और उपभोक्ताओं के लिए कीमतों में स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.

'एग्रीकल्चरल स्टैटिस्टिक्स एट ए ग्लान्स (2025)' के अनुसार, 2024-25 के दौरान भारत में लगभग 1.98 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में प्याज की खेती की गई, जिससे कुल 30.80 मिलियन टन प्याज का उत्पादन हुआ. पिछले पांच दशकों में, भारत में प्याज की खेती में काफी वृद्धि हुई है. 1960 के दशक में इसका रकबा लगभग 0.12 मिलियन हेक्टेयर था, जो अब बढ़कर 1.9 मिलियन हेक्टेयर से अधिक हो गया है. बेहतर किस्मों, सिंचाई और उन्नत कृषि पद्धतियों के कारण उत्पादन में दस गुना से अधिक की वृद्धि हुई है. हालांकि, हाल के समय में जलवायु परिवर्तन और बाजार के कारकों के कारण इसमें कुछ उतार-चढ़ाव भी देखे गए हैं.

इतने बड़े पैमाने पर उत्पादन के बावजूद, पूरे साल अच्छी क्वालिटी वाले प्याज की लगातार सप्लाई सुनिश्चित करना एक बड़ी राष्ट्रीय चुनौती बनी हुई है. इसके मुख्य कारणों में मौसमी कटाई, भंडारण के लिए अपर्याप्त बुनियादी ढांचा, कटाई के बाद होने वाला नुकसान और बाजार की कीमतों में उतार-चढ़ाव शामिल हैं.

रबी प्याज के खराब होने की आशंका अधिक

प्याज के भंडारण में एक बड़ी चुनौती यह है कि इसका उत्पादन एक ही मौसम में केंद्रित होता है. विशेष रूप से रबी की फसल, जो कुल प्याज उत्पादन का लगभग 60% हिस्सा है और आमतौर पर अप्रैल-मई के बीच काटी जाती है. मॉनसून और कम उत्पादन वाले महीनों (जो अक्सर अक्टूबर-नवंबर तक चलते हैं) के दौरान बाजार की मांग को पूरा करने के लिए, रबी के मौसम में जमा किया गया प्याज बहुत महत्वपूर्ण होता है.

हालांकि, लंबे समय तक भंडारण के दौरान प्याज का वजन कम हो सकता है, उसमें अंकुर निकल सकते हैं, वह सड़ सकता है या सूक्ष्मजीवों के कारण खराब हो सकता है. उच्च तापमान, अधिक नमी, हवा के वेंटिलेशन की कमी, डैमेज और प्याज को ठीक से न सुखाना (अनुचित 'क्युरिंग') इन नुकसानों को और बढ़ा देते हैं, खासकर मॉनसून के मौसम में.

पारंपरिक भंडारण के तरीकों में, जहां केवल हवा के आवागमन की व्यवस्था होती है, कुछ परीक्षणों में कुल नुकसान 50% से भी अधिक देखा गया है. प्याज के भंडारण की अपर्याप्त व्यवस्था के चलते प्याज का केवल डैमज नहीं होता बल्कि यह सीधे तौर पर किसानों की आय, उपभोक्ताओं की खरीद क्षमता और राष्ट्रीय बाजार की स्थिरता को प्रभावित करते हैं.

इसलिए, किफायती, कुशल और वैज्ञानिक रूप से डिजाइन की गई प्याज भंडारण तकनीकों का विकास और उन्हें अपनाना एक राष्ट्रीय प्राथमिकता है. पारंपरिक, प्राकृतिक रूप से हवादार (नेचुरली वेंटिलेटेड) भंडारण ढांचे काफी इस्तेमाल किए जाते हैं क्योंकि इनकी शुरुआती लागत कम होती है. हालांकि, प्रतिकूल तापमान और नमी की स्थिति में इनका काम संतोषजनक नहीं होता, जिससे भंडारण के दौरान 30-50% तक नुकसान हो सकता है.

बेहतर भंडारण समाधान—जैसे कि हवा के बहाव को अनुकूलित करने वाले प्राकृतिक रूप से हवादार ढांचे, मॉड्यूलर और मल्टी-टियर (कई स्तरों वाले) भंडारण सिस्टम, और तापमान और नमी को नियंत्रित करने वाली विशेष सुविधाएं—भंडारण के नुकसान को 25% तक कम करने में मदद कर सकते हैं. इसलिए, प्याज के भंडारण में होने वाले नुकसान को कम करना न केवल किसानों का मुनाफा बढ़ाने के लिए जरूरी है, बल्कि कीमतों को स्थिर रखने, साल भर प्याज की उपलब्धता सुनिश्चित करने और भारत की कृषि सप्लाई चेन (एग्रीकल्चरल सप्लाई चेन) को मजबूत करने के लिए भी जरूरी है.

मल्टी-मॉड्यूल प्याज भंडारण प्रणाली: प्याज किसानों के लिए वरदान

इन समस्याओं को दूर करने के लिए एक 'मल्टी-मॉड्यूल प्याज भंडारण प्रणाली' (multi-module onion storage system) को डिजाइन और विकसित किया गया है. इस प्रणाली में कई मॉड्यूल होते हैं, जिनमें से प्रत्येक की भंडारण क्षमता 1 टन है. हर मॉड्यूल को PVC पाइपों के नेटवर्क के जरिए एक 'एरेशन ब्लोअर यूनिट' (हवा फेंकने वाली मशीन) से जोड़ा गया है. इसके बाद, हवा को एक वर्टिकल (खड़ी) छिद्रयुक्त पाइप के माध्यम से भेजा जाता है, जो आयताकार भंडारण मॉड्यूल के बीच में लगी होती है.

वर्टिकल पाइप में हवा जाने से पहले, 'फ्लो कंट्रोलिंग बॉल वाल्व' (हवा के प्रवाह को नियंत्रित करने वाले वाल्व) की मदद से यह सुनिश्चित किया जाता है कि हवा सभी तरफ समान रूप से फैले. प्याज को आसानी से बाहर निकालने के लिए, प्रत्येक मॉड्यूल की निचली सतह पर लगी छिद्रयुक्त प्लाईवुड शीट को थोड़ा तिरछा (कोण पर) रखा गया है.

इस पूरी प्रणाली को एक शेड के नीचे लगाया गया है, जिसका कुल आकार 7.92 मीटर × 6.10 मीटर × 2.44 मीटर (लंबाई × चौड़ाई × ऊंचाई) है और इसमें 9 टन प्याज रखने की क्षमता है. यह विकसित प्रणाली आसानी से मोड़ी जा सकती है और इसे कहीं भी लगाना या ले जाना बहुत आसान है. जरूरत के हिसाब से इसके कई यूनिट्स (इकाइयां) एक साथ लगाए जा सकते हैं. उपलब्ध जगह और ब्लोअर यूनिट्स की संख्या के आधार पर, इन भंडारण मॉड्यूलों को अलग-अलग तरीके से—जैसे कि एक-दूसरे से जुड़े हुए (स्टैगर्ड ब्रांचिंग) या एक सीधी कतार (लीनियर सीरीज) में—व्यवस्थित किया जा सकता है.

शेड के खुले किनारों पर लचीली पॉलीथीन शीट लगाई गई है, जिसे पाइप के सहारे लटकाया गया है. इसे रोल करके खोला या बंद किया जा सकता है, जिससे बारिश के दौरान भंडारण क्षेत्र को सुरक्षित रखा जा सकता है. 5 टन भंडारण क्षमता के आधार पर देखें तो यह प्रणाली मॉनसून के चरम मौसम के दौरान 6 महीने की अवधि में कुल भंडारण नुकसान को 14.07% तक कम कर देती है. कुल नुकसान में वजन में कमी 11.12% रही, जबकि अंकुरण 0.59% और सड़न 2.36% देखी गई. इसकी तुलना में, सामान्य (कंट्रोल) स्थितियों में कुल नुकसान 51.76% था, जिसमें 22.15% वजन में कमी, 7.65% अंकुरण और 21.96% सड़न शामिल थी. कुल मिलाकर, यह विकसित प्रणाली सामान्य स्थितियों की तुलना में कुल नुकसान को 72.81% तक कम कर देती है.

किसान को प्रति टन 20,320 रुपये का शुद्ध लाभ

भंडारण की अवधि के दौरान प्याज की क्वालिटी काफी हद तक बनी रहती है. 9 टन भंडारण क्षमता वाली इस प्रणाली की लागत 1.5 लाख रुपये है. यदि कोई किसान प्याज का स्टॉक रखता है, जिसकी शुरुआती बाजार कीमत 10 रुपये प्रति किलो है, और 6 महीने तक भंडारण के बाद उसे 40 रुपये प्रति किलो की कीमत पर बेचता है, तो यह प्रणाली किसान को प्रति टन 20,320 रुपये का शुद्ध लाभ दिलाती है.

प्याज भंडारण प्रणाली की कम लागत को देखते हुए, यह छोटे और सीमांत किसानों के लिए काफी किफायती है. यह प्रणाली प्याज उगाने वाले किसानों और उद्यमियों को एक उपयोगी समय (बफर पीरियड) मुहैया करती है, जिससे वे अपनी मार्केटिंग रणनीतियों को बेहतर बना सकते हैं. इससे उन्हें कम कीमत पर प्याज बेचने (distress sales) की मजबूरी से राहत मिलती है और वे अपना मुनाफा अधिकतम कर सकते हैं. यह प्रणाली 'सर्कुलर इकॉनमी' (चक्रीय अर्थव्यवस्था) के एक साधन के रूप में भी काम कर सकती है.

कुल मिलाकर, यह विकसित प्रणाली किसानों, उद्यमियों और MSME (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों) के लिए एक वरदान है.

(Source: ICAR - Central Institute of Agricultural Engineering, Bhopal)

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