'Case IH' और 'New Holland' के हार्वेस्टर आज के दौर में खेती केवल मेहनत का काम नहीं रह गई है, बल्कि यह आधुनिक तकनीक और समझदारी का मेल बन चुकी है. पुणे के चाकन में स्थित CNH (सीएनएच ) इंडस्ट्रियल का 2,80,000 वर्ग मीटर में फैला विशाल प्लांट इसी बदलाव का सबसे बड़ा केंद्र है. यहां से बनने वाली मशीनें, जैसे 'Austoft' सीरीज के गन्ना हार्वेस्टर और अत्याधुनिक बेलर्स, भारतीय किसानों की सबसे बड़ी समस्याओं — मजदूरों की कमी और पराली जलाने की मजबूरी—का पक्का समाधान पेश कर रही हैं. यह प्लांट न केवल भारत के लिए मशीनें बना रहा है, बल्कि यहां से दुनिया भर में उपकरण एक्सपोर्ट किए जा रहे हैं. सीएनएच के मैनेजिंग डायरेक्टर नरिंदर मित्तल के अनुसार, जैसे-जैसे भारत एक विकसित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है. मशीनीकरण के जरिए खेती की उत्पादकता और स्थिरता को बढ़ाना ही उनकी प्राथमिकता है. उन्होंने बताया कि असेंबली लाइन पर रोबोटिक तकनीक और बारीकी से होने वाला काम यह सुनिश्चित करता है कि किसान को ऐसी मशीन मिले जो कम तेल की खपत में सबसे ज्यादा काम करके दे. यह प्लांट भारत के भविष्य की उस खेती की नींव रख रहा है, जहां किसान को कम मेहनत में अधिक मुनाफा मिल सके.
भारत में गन्ने की खेती बड़े पैमाने पर होती है, लेकिन इसकी कटाई आज भी एक बड़ी चुनौती है क्योंकि देश में केवल 5% से भी कम गन्ने की कटाई मशीनों से होती है. सीएनएच इंडस्ट्रियल ने इस कमी को अपना हथियार बनाया है. पुणे प्लांट में तैयार होने वाले 'Case IH' और 'New Holland' ब्रांड के हार्वेस्टर आज भारत के गन्ने के खेतों की पहली पसंद बन चुके हैं. कंपनी के पास इस सेगमेंट में 50% से ज्यादा बाजार हिस्सेदारी है. ये मशीनें गन्ने की कटाई इतनी सफाई से करती हैं कि किसान की फसल का नुकसान कम से कम होता है. साल 2025 में एक ही ग्राहक को 117 गन्ना हार्वेस्टर्स बेचें हैं. साफ है कि अब भारतीय किसान और बड़े उद्यमी आधुनिक मशीनों पर कितना भरोसा कर रहे हैं.
पराली जलाना न केवल पर्यावरण के लिए हानिकारक है, बल्कि यह खेत की उपजाऊ शक्ति को भी खत्म कर देता है. सीएनएच का पुणे प्लांट इस समस्या के लिए 'स्मॉल स्क्वायर बेलर्स' जैसी बेहतरीन मशीनें तैयार कर रहा है. इन मशीनों का काम खेत में बची पराली को इकट्ठा करके उसकी गठरी बनाना है, जिसे बाद में बिजली बनाने या अन्य उद्योगों में इस्तेमाल किया जा सकता है. इस क्षेत्र में भी CNH का 50% से ज्यादा मार्केट शेयर है. इसके अलावा, कंपनी ने 2023 में भारत का पहला TREM-V उत्सर्जन मानक वाला गन्ना हार्वेस्टर लॉन्च किया था, जो प्रदूषण को बहुत कम करता है. यह तकनीक न केवल सरकार के नियमों के अनुकूल है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक साफ और सुरक्षित वातावरण भी सुनिश्चित करती है.
सीएनएच केवल लोहे और इंजन की मशीनें नहीं बेचता, बल्कि वह किसानों और ग्रामीण युवाओं को सशक्त बनाने पर भी काम कर रहा है. कंपनी के '360-डिग्री ईकोसिस्टम' के तहत महाराष्ट्र के गांवों में ड्रोन और डिजिटल टूल्स के जरिए स्मार्ट फार्मिंग सिखाई जा रही है. युवाओं को मशीनों को चलाने और उनकी मरम्मत करने की ट्रेनिंग दी जा रही है, जिससे उनके लिए रोजगार के नए अवसर खुल रहे हैं. इतना ही नहीं, यह प्लांट सामुदायिक विकास में भी आगे है — चाहे वह गांवों में स्कूलों को सुधारना हो या मोबाइल हेल्थकेयर वैन के जरिए स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाना. कंपनी का लक्ष्य एक ऐसा माहौल तैयार करना है जहां तकनीक और समाज का विकास साथ-साथ चले.
अभी भारत में अनाज की कटाई में लगभग 30% और पराली प्रबंधन में मात्र 2% मशीनीकरण हुआ है, जो यह बताता है कि अभी बहुत काम करना बाकी है. सीएनएच का पुणे प्लांट "ब्रेकिंग न्यू ग्राउंड" की अपनी सोच के साथ इस गैप को भरने के लिए पूरी तरह तैयार है. आरामदायक केबिन वाले 'कंबाइन हार्वेस्टर्स' से लेकर शक्तिशाली ट्रैक्टरों तक, यहां की हर मशीन भारतीय मिट्टी और मौसम के हिसाब से बनाई गई है. जैसे-जैसे देश के किसान इन मशीनों को अपना रहे हैं, यह साफ होता जा रहा है कि पुणे में बनने वाली ये मशीनें सिर्फ कारखाने का उत्पाद नहीं हैं, बल्कि ये भारत के कृषि क्षेत्र में बड़े बदलाव लेकर आ रही हैं.
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