किसान अब खेती में स्मार्ट डिवाइस की मदद ले रहे हैं. इसमें आईओटी डिवाइस भी है जिससे किसानों को खेती की हर जानकारी रियलटाइम में मिल रही है. इससे किसान समय पर खाद-पानी आदि की व्यवस्था कर लेते हैं. इससे उनकी खेती की लागत बच रही है और कमाई बढ़ रही है.
किसान राहुल अहीर ने बताया कि वह ट्रैक्टर चालक हैं और फसल कटाई या बुवाई के सीजन में अच्छे ड्राइवर नहीं मिलते और अगर अच्छा ड्राइवर मिल भी जाए तो उसे 500 से 1000 रुपये प्रतिदिन भत्ता देना पड़ता है. जीपीएस सिस्टम लगवाने के लिए आपको पैसे देने होंगे और इसे कोई भी व्यक्ति सामान्य रूप से चला सकता है. ट्रैक्टर चालक इस ट्रैक्टर को चला सकेगा. इस ट्रैक्टर में दो जीपीएस सिस्टम लगाए गए हैं, जबकि स्टीयरिंग को ऑटोमैटिक तरीके से फिट किया गया है.
तमिलनाडु एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी ने कोयंबटूर जिले के वेलिंगाडू गांव में हल्दी की फसल पर स्टडी की है. स्टडी में पाया गया कि इस फसल में दो दिन में दो घंटे सिंचाई की गई, लेकिन जब सॉफ्टवेयर की मदद ली गई तो एक दिन में 30 से 45 मिनट तक पानी देने की जरूरत पड़ी. इस तरह फसल में लगभग 50 फीसद तक पानी की बचत देखी गई.
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