फर्रुखाबाद में गंगा का जलस्तर बढ़ने से दर्जनों गांवों में बाढ़, हजारों एकड़ फसल पानी में डूबी

फर्रुखाबाद में गंगा का जलस्तर बढ़ने से दर्जनों गांवों में बाढ़, हजारों एकड़ फसल पानी में डूबी

फर्रुखाबाद में गंगा नदी एक बार फिर उफान पर है और जलस्तर खतरे के निशान 137.10 मीटर तक पहुंच गया है. करीब पांच दर्जन गांव बाढ़ की चपेट में हैं और खेतों में पानी भरने से किसानों की चिंता बढ़ गई है.

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फर्रुखाबाद में गंगा का जलस्तर बढ़ने से दर्जनों गांवों में बाढ़, हजारों एकड़ फसल पानी में डूबीफर्रुखाबाद में कई गांवों में बाढ़ के हालात

उत्‍तर प्रदेश के फर्रुखाबाद में गंगा नदी एक बार फिर उफान पर है. कुछ दिन पहले जलस्तर कम होने से राहत महसूस कर रहे ग्रामीणों की चिंता अब फिर बढ़ गई है. गंगा का जलस्तर बढ़कर खतरे के निशान 137.10 मीटर तक पहुंच गया है. नदी के बढ़ते पानी से खेत, सड़कें और गांव जलमग्न हो गए हैं, जिससे किसानों के सामने फसलों को बचाने का संकट खड़ा हो गया है. फर्रुखाबाद के दोआबा क्षेत्र में गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है.

इसका असर जिले की तीनों तहसीलों के करीब पांच दर्जन गांवों में दिखाई दे रहा है. कई इलाकों में बाढ़ का पानी खेतों तक पहुंच गया है. हजारों एकड़ कृषि भूमि जलमग्न होने से किसानों को फसल खराब होने की आशंका सता रही है. खेतों में लंबे समय तक पानी भरा रहा तो फसलों को भारी नुकसान हो सकता है.

समेचीपुर चितार में कटान से मकानों पर खतरा

कायमगंज तहसील के समेचीपुर चितार गांव में बाढ़ और गंगा की कटान ने हालात और गंभीर कर दिए हैं. गंगा की तेज धारा में कई पक्के मकान समा चुके हैं. ग्रामीण अपने घर और बची हुई जमीन को बचाने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं. लगातार बढ़ते जलस्तर ने गांव के अस्तित्व पर भी खतरा बढ़ा दिया है.

बाढ़ के कारण गांवों का संपर्क प्रभावित

अमृतपुर तहसील के कई गांवों में बाढ़ का पानी फैल चुका है. सड़कें, खेत और खलिहान पानी से घिरे हैं. कई जगह सड़कें डूब जाने के बाद ग्रामीणों को नाव के सहारे आवागमन करना पड़ रहा है. जरूरी कामों और घरों तक पहुंचने के लिए भी लोगों को नाव का सहारा लेना पड़ रहा है.

NDRF ने संभाला राहत और बचाव मोर्चा

बाढ़ का खतरा बढ़ने के बाद प्रशासन ने NDRF की टीम तैनात कर दी है. टीम बाढ़ प्रभावित इलाकों में पहुंचकर ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों और बाढ़ चौकियों तक निकाल रही है. प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में नावों की व्यवस्था की गई है. बाढ़ चौकियों पर ठहरे लोगों के लिए भोजन और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने का दावा किया गया है.

पशुओं के चारे की भी बढ़ी समस्या

बाढ़ का असर केवल लोगों और फसलों तक सीमित नहीं है. खेत और आसपास के इलाके जलमग्न होने से पशुओं के चारे की समस्या भी बढ़ने लगी है. ग्रामीणों के सामने घर, फसल और पशुधन को सुरक्षित रखने की चुनौती एक साथ खड़ी हो गई है. लगातार बढ़ते गंगा के जलस्तर ने प्रभावित गांवों में फिर से दहशत का माहौल पैदा कर दिया है.

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