किसानों को पछेती झुलसा रोग से बचाव करना चाहिएउत्तर प्रदेश में इन दिनों कड़ाके की ठंड पड़ रही है. गलन के साथ कोहरा भी खूब पड़ रहा है. घना कोहरा आलू की फसल के लिए घातक हो सकता है. ऐसे में वे किसान ज्यादा सतर्क रहें जिन्होंने आलू की पिछेती बोआई की है. इसी क्रम में कानपुर के चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसएयूएटी) के साकभाजी विज्ञान विभाग के प्रभारी डॉ केशव आर्य ने कड़ाके की ठंड को मद्देनजर एडवाइजरी जारी की है. आलू विशेषज्ञ डॉक्टर अजय यादव ने बताया कि मौसम को देखते हुए आलू मे झुलसा रोग आने की संभावना दिख रही है. किसानों को पछेती झुलसा रोग से बचाव करना चाहिए.
उन्होंने कहा कि केंद्रीय एवं पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसानों की आलू एक मुख्य फसल है. जिसका समय रहते हुए देखभाल न किया जाए तो नुकसान हो सकता है. दरअसल, आलू की फसल में झुलसा रोग बहुत गंभीर बीमारी है, जो सर्दी और कोहरे में तेजी से फैलती है. वहीं तापमान में गिरावट के कारण इस रोग के प्रकोप की आशंका ज्यादा बढ़ जाती है.
डॉ यादव ने बताया कि खड़ी फसल में झुलसा रोग महत्वपूर्ण होता है जिसके लिए किसान को पहले से ही प्रबंधन करना है.वहीं सायमोक्सनिल+मैंकोजेब 2.5 ग्राम दवा प्रति लीटर पानी के दर से अथवा एजोक्सीस्ट्रॉबिन+टीनूकोनाजोल 1 ग्राम दवा प्रति लीटर पानी कि दर से घोल बनाकर छिड़काव करें. जिसमें झुलसा रोग से बचा जा सकता है. उन्होंने बताया कि आलू की पत्तियों पर छोटी-छोटी बिंदी के रूप में बहुत सारे धब्बे दिखाई पड़ते हैं जो अलटरनेरिया की वजह से आता है.
यह बिंदिया पोषक तत्व की कमी को जैसे भी दिखाई देते हैं जिसको मैनी लीफ कॉम्प्लेक्स डिजीज कहते हैं. डॉक्टर अजय यादव ने आगे बताया कि इसका उपाय क्लोरोथेलोनील नाम की दवा ढाई ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाएं जिसमें मल्टी माइक्रोन्यूट्रिएंट नाम से पैकेट बाजार में उपलब्ध होते हैं. जिसमें (आयरन, कॉपर, जिंक, कैल्शियम, मलिबडनम, बोरान, क्लोरीन) आदि तत्व होते हैं. जो एक किलोग्राम प्रति एकड़ के लिए पर्याप्त होता है यदि एक एकड़ में 15 लीटर की एक टंकी है, तो 8 से 10 टंकी में पूर्ण हो जाता है. वहीं 100 ग्राम से लेकर के 120 ग्राम एक टंकी में डालना चाहिए जिससे काफी हद तक उसे रोग का कंट्रोल कर लेते हैं.
डॉक्टर अजय यादव ने बताते हैं कि रोग को फैलने से रोकने के लिए फसल की सिंचाई करें और खेत में पानी न रुकने दें. संक्रमित पौधों को उखाड़कर नष्ट करें. उन्होंने बताया कि किसी भी दवा का छिड़काव करते समय साफ पानी का प्रयोग करें. सुबह या शाम के समय ही सावधानी से छिड़काव करें.
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